” जनता से जनमत मांगने के लिए रथ से उतरिए महारथी महोदय “

विवेक कुमार पाठक

सड़क पर चुनावी चल समारोह और रोड शो की राजनीति भी कम दिलचस्प नहीं। आखिर सड़क पर काफिले के साथ रथ पर हाथ हिलाते हुए राजनेता कैसे जान लेते हैं कि नीचे खड़े हजार लोग उनसे खुश हैं। पूरे रास्ते सड़क के दोनों ओर आगे पीछे मिलने वाले नर नारी उन्हें वोट देने का वायदा करने सड़क पर मौजूद हैं। राजनेताओं के इन सुनहरे सपनों को लेकर आइए कुछ बात करें।हमें 1947 में बिट्रिश हुकूमत से आजादी मिली उसमें हजार सालों की राजशाही से भी आजादी शामिल है। आजादी का उत्सव इसलिए मनाया जाता है क्योंकि हम अपने जीवन के प्रति बहुत से महत्वपूर्ण अधिकार पाते हैं। हम मन का खा सकते हैं। मन का पहन सकते हैं। सड़कों पर आ जा सकते हैं। दूसरों की आजादी का ख्याल करते हुए अपनी आजादी का उत्सव मना सकते हैं।हर नागरिक पर मूलभूत अधिकार के रुप में संविधान की जो धरोहर है उसमें सड़क पर बिना बाधा के चलने का अधिकार भी शामिल है। हम सार्वजनिक सड़क पर अपने जीवन यापन के लिए बिना बाधा के चल फिर सकेंगे।ये बहुत बड़ी आजादी है और सुप्रीम केर्ट ने सड़क और हाइवे जाम करने को जो कानून अपराध माना है वो इसी आजादी के संरक्षण के लिए माना है।हमारा जीवन हमारे घर और मकान में बंद रहते हुए संभव नहीं है। हमें रोजगार के लिए, खरीदारी के लिए, शिक्षा के लिए, ऑक्सीजन से भरे बगीचे जाने के लिए घर से बाहर निकलना होता है। सार्वजनिक सड़कों से नागरिक अपने लक्ष्य पर पहुंचते हैं। जो सड़क पर बिना बाधा के आवागमन नागरिकों की बहुत बड़ी सहूलियत है।आजकल पूरी राजनीति सड़क पर हीरो बनकर ही की जा रही है। बिल्कुल कीजिए राजनेता भी नागरिक हैं और उनके दूसरे नागरिकों जैसे अधिकार हैं मगर सड़क पर दूसरों की गति रोकने के लिए ये अधिकार नहीं हैं।ये अधिकार न होने पर भी आजकल लोकतंत्र के बड़े बड़े राजा सड़कों पर चलने के अधिकार में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने सड़कों को राजनीतिक प्रदर्शन का मंच बना दिया है। ये चलता फिरता प्रदर्शन बहुत सुविधाजनक है।आपको सड़कें जाम होते ही लोगों की जमावट दोनों ओर अपने आप मिलने लगती है।बाजारों में नागरिकों का आना जाना बंद हो जाता है। पुलिस काफी पहले से सायरन बजाती गाड़ियों के साथ चौराहे तिराहे पर बेरीकेडिंग कर देती है। अब जो लोग फंसे थे वे मजबूरीवश राजनेता के प्रदर्शन की भीड़ बन जाते हैं। हजारों लोग बहुत बड़े हजार गाड़ियों के काफिले और तमाम झंडे, बैनर, नारे होर्ड़िंग वाले तामझाम खुद व खुद देखने आते हैं। राजनेताओं के जमीनी कार्यकर्ताओं की पीठ पर शाबासी तभी मिलती है जबकि उन्होंने सड़क पर विशाल काफिले के आने के पहले अपने बस तक बैनर होर्डिंंग, झंडे मन भरकर लगवा दिए हों और तमाम अंतराल पर स्वागत सत्कार के लिए कुछ लोगों को राजी कर लिया हो।इस पूरी तैयारी के बाद अगर आप सत्ता में हैं तो फिर पुलिस प्रशासन भी बाराती जैसे रंग में रंग जाता है
हालांकि विपक्ष के चल समारोह की भी वो चिंता करते हैं। उन्हें पता है कोई न कोई उनके उपर रहेगा और वो ही उनका अंतिम हुकुम है। सड़कों पर ये राजनैतिक चल समारोह और रोड शो क्या टैफ्रिक को जाम करने वाले धरना प्रदर्शन जैसे ही नहीं हैं जो कानून नागरिक अधिकारों की सुरक्षा में अवैध घोषित कर दिए गए हैं। आज हाइवे और सड़क पर जाम लगाने पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर सकती है तो फिर सड़कों पर नागरिक आवागमन को बंद करने वाले रोड शो किस कानून के तहत शासन प्रशासन और पुलिस अनुमति से किए जा रहे हैं।लोगों के वोटों की दम सरकार में है और सरकार आम जनता के लिए केवल सेवा प्रदाता भर है लोकतंत्र में ।संप्रभुता जनता में निहित होने पर भी जनता का स्वभाविक आवागमन लोकतंत्र के राजाओं क शो के लिए रोक देना कहां तक उचित है। उस रोड शो से वे लोकतंत्र के भगवान से कितना संवाद कर पाते हैं। सिवाय हाथ हिलाकर राजाओं जैसा स्वागत सत्कार कराना राजनीति नहीं होती।अगर जनता का मत चाहिए तो जनता से संवाद के कार्यक्रम कीजिए। रथों से उतरकर जनता के बराबर आइए। अपनी बातों को कहने के लिए सार्वजनिक मैदानों में सभा कीजिए जो आजादी के बाद से भारत के तमाम लोकप्रिय नेता करते रहे हैं।इसमें आना न आना जनता की मर्जी से होगा मगर चलने के लिए छोड़ी पब्लिक की सड़क पर आप फौज फाटे सैकड़ों और हजार गाड़ियों के काफिले से उतरकर जनता की मर्जी दरकिनार कर देते हैं।उसका आना जाना बंद कर देते हैं। व्यापारी का कारोबार और खोमचे वाले का रोजगार बंद कर देते हैं कई घंटे के लिए । बीमार भी फंस जाते हैं तो डॉक्टर भी रोड शो की मुसीबत भुगतते हैं। हजारों लोग अत्यावश्यक होने के बाबजूद सड़क पर आ जा नहीं पाते अपने जरुरी कामों से। ये किस तरह की जनसेवा और जननायक वाला व्यवहार है।”आत्ममुग्ध राजनेताओं को इस बारे में सोचना चाहिए।”याद रखिए आप जनता की ताकत से ताकतवर हैं। आप जनमत से रथों पर विराजमान हैं उसका ख्याल रखिए। जनता से जनमत मांगने के लिए रथ से उतरिए महारथी महोदय.

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