जीएसटी: एक सार्थक पहल

विगत कुछ समय से जीएसटी पर जारी अनवरत चर्चा की गहराई में जाने पर व्यापारी वर्ग की मायूसी का पता चलता है । हैरानी इस बात की है कि व्यापारियों को टैक्स की रकम, ग्राहकों को विक्रय की गई वस्तु के बदले में मिले दाम के एक हिस्से से ही चुकाना है फिर इतनी हायतौबा क्यों । जबकि व्यापारी को अपनी जेब से टैक्स के रूप में कुछ अलग से जमा नहीं करना है, बल्कि ये तो वह रकम है, जिसे वह ग्राहकों से पहले ही वसूल चुका है । फिर जीएसटी के विरोध का आधार समझ से परे है ।
जीएसटी का विरोध करने वालों को यह बात जरूर सोचनी चाहिए कि उनके एक बडे वर्ग ने अब तक सरकार को कितना टैक्स ईमानदारी से अदा किया है । अब तक बाजार की स्थिति यह है कि दुकानदार 5 फीसदी से भी कम मामलों में ग्राहकों को पक्का बिल देते हैं । बाकी 95 फीसदी से अधिक मामलों में दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल नहीं देते हैं । पक्के बिल की चाह रखने वाले ग्राहकों को दुकानदार यह सीख देते हैं कि बिल लेने पर सौदे की रकम बढ सकती है तथा बिल न लेने पर दुकानदार और ग्राहक दोनों का फायदा है । ग्राहक और दुकानदार के बीच यही तय मानसिकता सरकार को अब तक बहुत बडा नुकसान पहुॅंचा चुकी है ।
हाल ही में ग्राहक और दुकानदार के बीच असमंजस की स्थिति दूर करने के लिये केन्द्रीय वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा जीएसटी रेट्स फाइंडर के नाम से एक मोबाईल एप जारी किया गया है । इसके उपयोग से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की जीएसटी दरों की जानकारी ली जा सकेगी । कोई भी व्यक्ति इस एप को अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड करके किसी भी वस्तु या सेवा का नाम दर्ज करके उसकी जीएसटी दर को प्राप्त कर सकते हैं । उदाहरण के लिये कोई भी व्यक्ति किसी होटल से प्राप्त बिल अथवा खरीदी गई वस्तु का बिल मिलने पर वसूली गई जीएसटी दर की सत्यता को इस एप की मदद से जाॅंच सकता है । कुल मिलाकर कोई भी करदाता अपनी आपूर्ति पर लागू सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूटीजीएसटी दर और मुआवजा उपकर को खोज सकता है । सरकार के इस कदम का मुख्य लक्ष्य जीएसटी दरों पर तैयार गणन पुस्तिका सुलभ कराना है । इससे वस्तुओं और सेवाओं की सही जीएसटी दर पता लगाने के मामले में न केवल करदाता, बल्कि भारत का हर नागरिक भी अब सक्षम होगा ।
इसी की अगली कडी में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जीएसटी के कार्यान्वयन और उसमें जरूरी मदद के लिये एक जीएसटी केन्द्र की स्थापना की है । इसके माध्यम से प्रमुख उद्योग और कारोबारी संस्थाओं को यह टैक्स लागू करने में हर संभव मदद मिल सकेगी । यह केंद्र मंत्रालय से संबंधित किसी भी क्षेत्र के समक्ष आ रहे मसलों को सुलझाने के लिये संपर्क के प्रथम केंद्र के रूप में सेवाएॅं प्रदान करेगा तथा जीएसटी कानून, नियम, दर, संरचना आदि से संबंधित जानकारी से पूर्णतः सम्पन्न होगा । यह मंत्रालय जीएसटी के बारे में उद्योग जगत को जानकारी प्रदान करने के लिये कई कार्यक्रमों के आयोजन की प्रक्रिया में है और उसने नई कर व्यवस्था के बारे में जानकारी का प्रचार करने के लिये अनेक वैचारिक आयोजनों की रूपरेखा भी तैयार कर ली है ।
भारत सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि रोजमर्रा उपभोक्ता इस्तेमाल की वस्तुओं की आपूर्ति तथा उनकी कीमतों पर काबू रखने के लिये निगरानी समिति गठित की जाएगी । सरकार ने केन्द्र और राज्य सरकार के अधिकारियों से परस्पर सम्पर्क साधने और बेहतर तालमेल के लिये कहा है ताकि जीएसटी को सुगमतापूर्वक लागू किया जा सके ।

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