खण्डेल के रोगहरण हनुमानजी : भक्तों को मिलता है यहाँ आरोग्य का वरदान

डॉ. दीपक आचार्य

 

रामभक्त हनुमानजी कलियुग में शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में मान्य हैं। यही वजह है कि हर कहीं बजरंगबली के मन्दिरों की लम्बी श्रृंखला देखने को मिलती है। चिरंजीवी हनुमान थोड़ी सी भक्ति करने मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों के कष्टों का निवारण करने के साथ ही सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

राजसमन्द जिले में भी हर तरफ बजरंगबली के मन्दिर विद्यमान हैं। इन्हीं में राजसमन्द-भीलवाड़ा मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर खण्डेल में कुरज चौराहे के पास अवस्थित भगवान रोगहरण हनुमानजी का मन्दिर क्षेत्रवासियों के लिए आस्था और विश्वास का धाम है।

इस धाम के बारे में भक्तों की मान्यता है कि हनुमानजी रोगों से मुक्ति दिलाकर आरोग्य का वरदान देते हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। चारों तरफ हरे-भरे वृक्षों व हरियाली के बीच रोगहरण हनुमान मन्दिर आश्रम है।

इसमें मुख्य मन्दिर के गर्भगृह में हनुमानजी की सिन्दूर से पूजित अत्यन्त प्राचीन प्रतिमा है तथा इसके पीछे अधिष्ठान पर हनुमानजी की बहुत ही सुन्दर एवं ओजस्वी स्वरूप में नई मूर्ति स्थापित है। मन्दिर के ठीक बाहर एक तरफ श्वेत मार्बल की बनी संत समाधि एवं छतरी है।

दिव्य माहौल से भरा-पूरा है आश्रम

आश्रम परिसर में धर्मशाला व सत्संग भवन है जिसमें संतों व महंतों के छायाचित्र लगे हुए हैं तथा श्रद्धालुओं के आवास व भोजनादि के लिए जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। मन्दिर के ठीक पीछे संत निवास है जिसमें सरल स्वभाव के संत बाबा जयरामदास महाराज का आवास है। महन्त जयरामदास महाराज के प्रति भक्तों की श्रद्धा है और क्षेत्र भर के भक्तगण उन्हें बहुत अधिक मानते हैं।

मनोकामना पूर्ण करते हैं हनुमान

रोगहरण हनुमानजी के बारे में जन मान्यता यह है कि बजरंग बली हर किसी भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं और कोई यहाँ से निराश नहीं लौटता। सच्चे भक्तों को जब भी धन की आवश्यकता पड़ती तब हनुमानजी के सम्मुख निवेदन करने के कुछ समय बाद ही कहीं न कहीं से पैसों की उधार व्यवस्था हो जाती थी।

सिद्ध संत गोर्धनदास महाराज ने बनवाया मन्दिर

रोगहरण हनुमानजी के मन्दिर का निर्माण महंत गोर्धनदास महाराज ने कराया। उनके बारे में कहा जाता है वे पहुंचे हुए सिद्ध और विरक्त संत थे जिन्हें वाक्सिद्धि प्राप्त थी और वे जो कहते वह बात सच निकलती थी। महन्त श्री गोर्धनदास महाराज फलाहारी थे तथा उन्होंने दशकों से अन्न का त्याग कर रखा था। क्षेत्र भर में उनकी जबर्दस्त ख्याति थी और दूर-दूर से भक्त उनका आशीर्वाद पाने आते थे।

आरोग्य का वरदान मिलता है यहाँ

हनुमानजी मन्दिर के प्रति श्रद्धा रखने वाले तथा बरसों से यहाँ आते रहने वाले भक्त श्री हजारीमल प्रजापत बताते हैं कि विशेष तौर पर बीमारियों से परेशान लोग यहाँ आकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं। यों तो साल भर में मंगल-शनि को श्रद्धालुओं का आवागमन यहाँ चलता रहता है किन्तु गुरुपूर्णिमा को यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़़ता है।

क्षेत्र भर में है आस्था के भाव

ख़ासकर कुरज, खण्डेल, वगतपुरा, नेगड़िया का खेड़ा, रूपपुरा, फियावड़ी, लापस्या, जूणदा, जीतावास, बैठुण्डी, जीवाखेड़ा, गोगाथला, मालीखेड़ा तथा आस-पास के दर्जन भर गांवों से भक्त यहाँ आते हैं। इन गांवों के लोग हनुमानजी को अपना संरक्षक मानकर पूजते हैं और नई फसल हनुमानजी के चरणों में समर्पित करने के उपरान्त ही उपयोग में लाते हैं।

एकान्तिक साधना और असीम आनंद के लिए यह हनुमान धाम सर्वथा अनुकूल है जहाँ हनुमानजी के आश्रय में प्रकृति से लेकर परमेश्वर तक सब कुछ पाया जा सकता है।

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