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    Homeसाहित्‍यगजलहिंदी गजल -रक्षाबधन पर

    हिंदी गजल -रक्षाबधन पर

    रिश्ते है कई दुनिया में,बहन का रिश्ता खास है
    बाँधती है जो धागा बहन,वह धागा कोई खास है

    लगाये रखती है बहन टकटकी,रक्षाबंधन के पर्व पर
    आयेगा उसका भाई जरुर,उसका यह एक विश्वास है

    सजाती है बहन जब थाली,राखी रोली और मिठाई से
    लगाती है जब प्यार से टीका,वह प्यार भी खास है

    खा लेती है रूखा-सूखा,भले ही वह अपनी जिन्दगी में
    रक्षाबंधन के दिन वह बनाती है कोई व्यंजन खास है

    बिछड़ जाता है भाई,जब बहन आ जाती है सुसराल में
    भाई कितनी भी दूर हो, समझती है वह उसके पास है

    छोड देती है पूरा परिवार एक पति के लिये वह सदा
    फिर भी लगी रहती बहन को मायके से कोई आस है

    आर के रस्तोगी
    गुरुग्राम (हरियाणा)

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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