भारत स्वाइन फ्लू से निपटने को तैयार

इन दिनों दुनिया भर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप है। अमेरिका समेत सभी देशों की सरकार इससे चिंतित है। इधर भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश, स्वाइन फ्लू नामक इनफ्लुएंजा ए (एच1 एन1)…

इन दिनों दुनिया भर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप है। अमेरिका समेत सभी देशों की सरकार इससे चिंतित है। इधर भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश, स्वाइन फ्लू नामक इनफ्लुएंजा ए (एच1 एन1)...

images27इन दिनों दुनिया भर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप है। अमेरिका समेत सभी देशों की सरकार इससे चिंतित है। इधर भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश, स्वाइन फ्लू नामक इनफ्लुएंजा ए (एच1एन1) से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।हालांकि देश में स्वाइन फ्लू का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनीत चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू, गोवा, अमृतसर, कोचीन, अहमदाबाद, त्रिची और श्रीनगर में स्थित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्वाइन फ्लू प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। बाकी बचे अंतर्राष्टीय हवाई अड्डों पर भी यात्रियों की जांच का काम जल्द शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अबतक 20 हजार से भी अधिक यात्रियों की जांच की जा चुकी है। लेकिन स्वाइन फ्लू का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आया है। लेकिन हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

चौधरी के अनुसार 12 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्थापित किए गए 32 जांच काउंटरों पर कुल 96 चिकित्सकों को तैनात किया गया है।

3 thoughts on “भारत स्वाइन फ्लू से निपटने को तैयार

  1. सवाईन-फ्लू के बारे में एक नई जानकारी यह है कि कैनेडा ने सवाईन-फ्लू की दवाओं को बीमारी से कहीं अधिक घातक माना है तथा केनेडा में इनके प्रवेश और प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगादिया है. फ्लू के इलाज के लिए सबसे असरकारक दवा के रूप में विटामिन ‘डी’ की सिफारिश की गई है. उसके लिए भी दवा खाने की जरूरत नहीं. बस कुछ देर सूर्य के प्रकाश में बैठने से यह काम हो जाता है. रोग निरोधक शक्ती इतनी बढ़ जाती है कि फ्लू सहित और भी अनेक रोग पास नहीं फटकते. कमाल की बात यह है कि जो बात कैनेडा के लिए अच्छी है वह भारत और अमेरिका के लिए क्यों नहीं? बात साफ़ है कि दवा कंपनियों को किसी भी कीमत पर कमाई करनी है. उसके लिए अमेरीकन मरे या भारतीय, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. अतः सरकार देश का अरबों रुपया लुटाने से बाज नहीं आती तो कमसे कम आप तो अपनी जान के दुश्मन ना बनें और जानलेवा दवाएं खाने से बचें. ज्ञातव्य है कि अबतक फ्लू से केवल वे ही लोग संसार मे मरे हैं जिन्होंने इसकी एलोपेथिक दवा खाई थी. इस बारे मे तथ्यों की कोई कमी नहीं. प्रमाण के लिए देखें mercola.com

  2. टैमीफ्लू कॆ नाम पर एक और ठगी भारत‌ कॆ साथ अमॆरीका करगया. जॊ रॊग खतरनाक हैही नही, उसका आतक फैलाकर करॊड़ॊ डालर की टैमीफ्लु की गॊलिया भारत कॊ बॆचदी गयी. अमॆरीका मॆ हर‌ साल लगभग 60 मिलियन लॊग फ्लू का शिकार बनतॆ है. कॊई वैक्सीन या दवा हॊती तॊ सबसॆ पहलॆ अपनॆ दॆशवसियॊ की रक्शा वह क्यॊ नही करता? सच यह है कि अमॆरिका का काम है, डर फैलाकर पैस कमाना. हैपॆटाईटिस का डर फैलाकर दुनिया कॊ लूटनॆ का भॆद भी खुलचुका है. पर भारत सरकार की परदॆसभक्ति कॆ कारण बार‌ बार दॆश लुट रहा है और कॊई रॊकनॆ टॊकनॆ वाला नहि है.
    हर प्रकार कॆ फ्लु कॆ अनॆक‌ इलाज उपलब्ध है. तुलसि+काली मिर्च+ अदरक का क्वाथ दॊ तीन दिन का इलाज है. हॊमियॊपैथी की इनफ्लूगीनम२00 कॆवल एक बार खानॆ सॆ बचाव हॊजाता है. छॊटासा अग्निहॊत्र् इसका उत्तम इलाज है. फिर अमॆरीकी टैमीफ्लु की गॊली क्यॊ ?

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