किस्सा कुर्सी का

जब चुनाव सयुक्त रूप से लड़ा था,
फिर सत्ता में सयुक्त क्यों नही रहते हो ?
दोनों ही सी एम की कुर्सी के भूखे हो ,
फिर जनता को क्यों बेवकूफ़ बनाते हो ?

केवल किस्सा एक सी एम कुर्सी का है ,
दोनों ने महाराष्ट में महासंग्राम मचाया है |
अपनी आपनो ढपली लेकर तुमने,
दोनों ने बेसुरा अलाप ही गाया है ||

देश हित नहीं है खून में तुम्हारे,
तुम दोनों ही सत्ता के भूखे हो |
जनता का क्या हित तुम करोगे ?
जब आपस में दोनों तुम रूखे हो ||

अभी समय है तुम बदल जाओ,
वर्ना जनता तुमको बदल देगी |
अगले चुनाव में तुम दोनों को,
सत्ता से ही बे दखल कर देगी ||

सी एम की कुर्सी की चार टाँगे है,
फिफ्टी फिफ्टी चाहते हो तुम |
दो टांग की कुर्सी पर कैसे बैठोगे ?
जरा अक्ल से ये सोचो तुम ||

दोनों ही राष्टवादी बनते हो तुम,
राष्ट नही महाराष्ट में रहते तुम |
राष्ट भावना नहीं तुम्हारे मन में,
जब आपस में ही लड़ते हो तुम ||

लौट रहा है महाभारत का समय,  
फिर से तुम्हारे महाराष्ट राज्य में |
कौरव-पांडव की तरह लड़ रहे हो,
भाजपा शिव सेना इस महाराष्ट में ||

आर के रस्तोगी

Leave a Reply

%d bloggers like this: