श्री कृष्ण जन्माष्टमी 15  अगस्त 2017 को कैसे मनाएं ?

जन्माष्टमी अर्थात कृष्ण जन्मोत्सव इस वर्ष जन्माष्टमी का त्यौहार 14/15 अगस्त 2017 को मनाया जाएगा. जन्माष्टमी जिसके आगमन से पहले ही उसकी तैयारियां जोर शोर से आरंभ हो जाती है पूरे भारत वर्ष में इस त्यौहार का उत्साह देखने योग्य होता है. चारों का वातावरण भगवान श्री कृष्ण के रंग में डूबा हुआ होता है. जन्माष्टमी पूर्ण आस्था एवं श्रद्ध के साथ मनाया जाता है |

शास्त्रों के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। 14 अगस्त को 19:45 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी और 15 अगस्त को 17:39 बजे तक ही रहेगी। इसलिए दोनों दिनों में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा सकता है।

 

जानिए वर्ष 2017  के लिए जन्माष्टमी पर्व तिथि व मुहूर्त —

 

14 अगस्त
निशिथ पूजा– 24:09+ से 24:53+
समयावधि = कुल 0 Hours 44 मिनिट
मध्य रात्रि समय  = 24:31+
पारण– 17:39 (15 अगस्त) के बाद
रोहिणी समाप्त- रोहिणी रहित जन्माष्टमी
अष्टमी तिथि आरंभ – 19:45 (14 अगस्त)
अष्टमी तिथि समाप्त – 17:39 (15 अगस्त)

 

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि से हिंदुओं के त्योहार और कोई भी तिथि निर्धारित की जाती है। पहले सिर्फ उदया तिथि को ध्यान में रखकर त्योहार निर्धारित होते थे तो हर त्योहार एक ही होता था, लेकिन अब अलग—अलग मान्यताओं के साथ कई तरह के पंचांग बन गए हैं जिससे हर त्योहार दो बार होने लगा है जो कि सही नहीं है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि 15 अगस्त वाली जन्माष्टमी उदया तिथि में है इसलिए जन्माष्टमी का त्योहार 15 अगस्त को ही मनाना शास्त्र संवत है।

 

आप सभी को ‘भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी’ के पावन पर्व की “हार्दिक शुभकामनाएँ…..”।।।
में पण्डित “विशाल” दयानन्द शास्त्री माखनचोर, मुरलीमनोहर भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता हूँ की वह आपकी सभी मनोकामनाये पुरी करे एंव आप व आपका परिवार सदैव सुख समृद्ध खुशहाल रहें ।।।

 

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन शादीशुदा महिलायें भविष्य में भगवान कृष्ण को एक बच्चे के रूप में प्राप्त करने के लिए बहुत कठिन व्रत करतीं हैं। कहीं कहीं अविवाहित महिलाएं भी इस व्रत को रखती हैं। वे भोजन, फल और पानी नहींलेती और मध्य रात्रि में पूजा पूरी होने तक पूरे दिन और रात के लिए निराजल उपवास रखतीं हैं।

 

महिलाएं आमतौर पर सूर्योदय के बाद अगले दिन अपने उपवास (भी पारान के रूप में) को तोड़ती हैं जब अष्टमी तिथी और रोहिणी नक्षत्र खत्म हो जाते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब कोई दो (या तो अष्टमी तिथि या रोहिणी नक्षत्र) में से किसी एक में से एक हो जाए, तो उसे इंतजार करना चाहिए, यदि कोई दो (या तो अष्टमी तिथि और न ही रोहिणी नक्षत्र) खत्म हो जाए, तो महिलाएं उपवास तोड़ सकती हैं। अष्टमी तिथी और रोहिणी नक्षत्र के समय के अंत के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी पर उपवास की अवधि बढ़ सकती है (एक या दो दिन) आम तौर पर, सुबह-सुबह महिलाएं एक दिन में उपवास तोड़ देती हैं, अगर वे दो दिन तक बर्दाश्त नहीं कर पातीं।
============================== ============================== =======
जानिए कुछ जानकारी भगवान् श्री कृष्ण के बारे में–

 

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के ने पृथ्वी को पापियों से मुक्त करने हेतु कृष्ण रुप में अवतार लिया, भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी और वासुदेव के पुत्ररूप में हुआ था. जन्माष्टमी को स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के लोग अपने अनुसार अलग-अलग ढंग से मनाते हैं. श्रीमद्भागवत को प्रमाण मानकर स्मार्त संप्रदाय के मानने वाले चंद्रोदय व्यापनी अष्टमी अर्थात रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाते हैं तथा वैष्णव मानने वाले उदयकाल व्यापनी अष्टमी एवं उदयकाल रोहिणी नक्षत्र को जन्माष्टमी का त्यौहार मनाते हैं |

 

भगवान कृष्ण को गोविंदा, बालगोपाल, कान्हा, गोपाल लगभग 108 नामों से जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण को प्राचीन समय से हिंदू धर्म के लोगों द्वारा उनकी विभिन्न भूमिकाओं और शिक्षाओं (जैसे भगवद गीता) के लिए पूजा जाता है।

 

भगवान श्री कृष्ण विष्णु के अकेले ऐसे अवतार हैं जिनके जीवन के हर पड़ाव के अलग रंग दिखाई देते हैं। उनका बचपन लीलाओं से भरा पड़ा है। उनकी जवानी रासलीलाओं की कहानी कहती है, एक राजा और मित्र के रूप में वे भगवद् भक्त और गरीबों के दुखहर्ता बनते हैं तो युद्ध में कुशल नितिज्ञ। महाभारत में गीता के उपदेश से कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया है आज भी उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं। भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों के लिए इस धरती पर जन्म लिया और शिक्षक, संरक्षक, दार्शनिक, भगवान, प्रेमी, विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। हिंदू लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और विभिन्न प्रकार के कृष्ण के रुपों की पूजा करते हैं।भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने से लेकर उनकी मृत्यु तक अनेक रोमांचक कहानियां है। इन्ही श्री कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले और भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिये भक्तजन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।

 

भगवान श्री कृष्ण का जन्म और उनका बचपन पूरी तरह से उनकी कलाओं और लीलाओं से भरा पड़ा है। उनकी जवानी में गोपियों संग उनकी रासलीलाओं की कहानी ही मिलेंगी, भगवान श्री कृष्ण एक राजा और एक सच्चे दोस्त के रूप सबके प्रिय है, वे भगवद् भक्त और सुदामा जैसे गरीबों के दुखहर्ता भी समय-समय पर बनते रहते हैं और तो और कृष्ण से अच्छा तो कोई युद्ध में कुशल नितिज्ञ भी नहीं होगा। महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने गीता के उपदेश से कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ अर्जुन को पढ़ाया आज भी उसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करने पर हर बार अनेकों अर्थ निकल कर लोगों के सामने आ जाते हैं।

 

भगवान श्री कृष्ण की जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेकों रोमांचक और मनोहर कहानियां हैं। 

 

श्री कृष्ण भगवान् ने धरती पर फैले अत्याचार और बुराइयों को मिटाने ,दानवों और राक्षसों का वध करने और मानव जाती की रक्षा करने और लोक कल्याण का कार्य करने के लिए धरती पर अवतार लिया |उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाती के लिए भलाई का कार्य किया | सुधामा जैसे गरीब को अपना दोस्त बनाया और अपनी शरण मैं लिया,मामा कंस जैसे बलशाली राक्षश का वध किया,महाभारत मैं द्रोपदी की लाज बचाई ,इस प्रकार श्री कृष्णा ने लोक कल्याण के लिए बहुत कार्य किये उसकी वजह से ही आज कृष्ण भगवान को कन्हैया ,नंदलाला,गायों का ग्वाला, मुरलीवाला, बंशिवाले, मोहन मुरलीवाले,यशोदा का नन्दलाल ,गोपियों का ग्वाला आदि विविध नामों से प्यार से पुकारा जाता हैं |

 

श्री कृष्ण भगवान बहुत ही नटखट थे | वे मथुरा की गोपियों को अपने इशारो पर नचाते थे | गोपियों की दही से भरी हांड़ी को फोड़ देते थे |मथुरा की गुजरियों का दही खा जाते थे | गोपियों के साथ नाचते गाते थे और विचित्र रास लूगलीलाए करता था | ये सब नट खट कार्य और मानव जाती के लिए किया गया त्याग और उपकार के लिए लोग आज भी उन्हें याद करते हैं |
============================== ============================== ====================
इन श्रीकृष्ण मंत्रों से बदलेगा भाग्य—

 

भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन जमाष्टमी पर इस दिन तीन मंत्रों का जाप बहुत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। सात अक्षरी, आठ अक्षरी और बारह अक्षरी मंत्र बोलने और जप करने में बड़े सरल और मंगलकारी हैं और ये मंत्र हैं

 

‘गोकुल नाथाय नम:’
‘ऊँ नमो भगवते श्री गोविन्दाय’
‘गोवल्लभाय स्वाहा’
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:॥

 

शास्त्रों में निम्न कृष्ण मंत्र को बहुत ही प्रभावशाली माना गया है। यह मंत्र बीज मंत्र की तरह काम करता है। यह अति गूढ़ मंत्र है। इस मंत्र से सभी प्रकार का भय और संकट दूर हो जाता है। जीवन में आने वाली बाधाएं दूर करने में भी यह मंत्र कारगर होता है।

 

यह दिव्य मंत्र है- “”ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णायाकुण्ठमेधसे। सर्वव्याधिविनाशाय प्रभो माममृतं कृधि””।।

 

उज्जैन के ज्योतिष पंडित दयानंद शास्त्री के अनुसार 14 अगस्त 2017 (सोमवार) को रात 19:45  मिनट से ही अष्टमी लग जायेगी। लेकिन व्रत रखने का अच्छा दिन गुरूवार को ही है इसलिए इच्छुक जातक इसी दिन को व्रत रखे। इस बार इस रोहिणी नक्षत्र लग रहा है इसलिए निशिता पूजा का सर्वोत्तम समय मध्यरात्रि यानी कि 12 बजे से लेकर 12: 45 बजे तक है।इस वक्त उपवास रखने वाले पूजा करके प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं, जबकि पारण का समय 15 तारीख 2017 (मंगलवार) को शाम 17  बजकर 39  मिनट है लेकिन जो लोग पारण को नहीं मानते वो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद और पूजा करने के बाद यानी कि रात 12: 45 बजे के बाद अपना व्रत तोड़ सकते हैं।

 

तंत्र की दृष्टि से यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा होली, दिवाली तथा शिवरात्रि के समान महत्वपूर्ण मानी गई है। मनोकामना पूर्ति के प्रयोग नीचे दिए जा रहे हैं

 

(1) जिन व्यक्तियों के जीवन में समस्याओं का अम्बार लगा हो तथा कोई रास्ता सूझता न हो, वे ‘श्री कृष्ण: शरणं मम्’ का जप करें तथा आर्त हृदय से भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करें, अवश्य ही सुनवाई होगी।
(2) घर में तनाव, अशांति, स्वास्थ्य की समस्या हो तो ‘क्लीं ऋषिकेशाय नम:’ की 51 माला करें।
(3) आर्थिक समस्या आदि के लिए ‘श्री गोपीजन वल्लभाय स्वाहा’ जपें।
(4) विवाह समस्या या गृहस्थी की समस्या हो तो ‘ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय स्वाहा’ जपें।
(5) ईष्ट सिद्धि के लिए ‘श्रीकृष्णाय नम:’ का जप करें।
(6) सौभाग्य वृद्धि, सुख-शांति तथा मोक्ष के लिए ‘ॐ ऐं श्रीं क्लीं प्राणवल्लभाय सौ: सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा’ का जप करें।
(7) संतान सुख प्राप्त करने हेतु निम्न मंत्र का जप तथा लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें।

मंत्र-

‘ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
दे‍हि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।’ 

संतान प्राप्ति के लिए इससे अच्छा मंत्र नहीं है। ‘तनयं’ शब्द के उच्चारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

(8) धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष प्राप्ति के लिए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ का जप करें।

 

उपरोक्त मंत्र का मानसिक जप हमेशा तथा हर जगह किया जा सकता है। जप माला तुलसी की तथा आसन कुश का प्रयोग करें। चंदनादि प्रयोग करें। प्रसाद में पंचामृत में तुलसी-मिश्रित करें। स्वयं तुलसी की माला तथा श्वेत वस्त्र धारण करें। पीताम्बर भी चल सकता है। पंजीरी का प्रसाद वितरण करें। सात्विक भोजन करें, ब्राह्मण भोजन साधना के फल को द्विगुणित करता है।

 

(9)जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए- क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।’

 

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इस बार जन्माष्टमी (15 अगस्त 2017) सोमवार के दिन सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 17:39 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी।

 

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार 14 अगस्त 2017 (बुधवार) की रात 19:45 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस वजह से तिथि काल मानने वाले सोमवार को भी जन्मोत्सव मनाएंगे, लेकिन मंगलवार उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।

 

पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ऐसा शुभ संयोग बनने से इस वर्ष की जन्माष्टमी विशेष बन गई है।
इस दिन किए गए दान-पुण्य आदि कर्मों का विशेष फल प्राप्त होगा तथा सौभाग्य में बढ़ोतरी होगी।
============================== ============================== ============
जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप अनंत गुना फल देता है । उसमें भी जन्माष्टमी की पुरी रात, जागरण करके जप-ध्यान का विशेष महत्व है ।
— पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार भविष्य पुराण में लिखा है कि जन्माष्टमी का व्रत अकाल मृत्यु नहीं होने देता है । जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके धर में गर्भपात नहीं होता ।
—- एकादशी का व्रत हजारों – लाखों पाप नष्ट करनेवाला अदभुत ईश्वरीय वरदान है लेकिन एक जन्माष्टमी का व्रत हजार एकादशी व्रत रखने के पुण्य की बराबरी का है ।
— एकादशी के दिन जो संयम होता है उससे ज्यादा संयम जन्माष्टमी को होना चाहिए । बाजारु वस्तु तो वैसे भी साधक के लिए विष है लेकिन जन्माष्टमी के दिन तो चटोरापन, चाय, नाश्ता या इधर – उधर का कचरा अपने मुख में न डालें ।
— इस दिन तो उपवास का आत्मिक अमृत पान करें ।अन्न, जल, तो रोज खाते – पीते रहते हैं, अब परमात्मा का रस ही पियें । अपने अहं को समाप्त कर दें।
============================== ============================== ========
ये हैं भगवान् श्री कृष्ण आराधना के कुछ प्रभावी मन्त्र—

 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के सुंदर और मनोहारी पर्व पर श्रीकृष्ण के विभिन्न मंत्र दिए जा रहे हैं। इन मंत्रों के जाप से सुख-सौभाग्य-समृद्धि, सफलता, खुशियां,संपत्ति, संतान और विजय की प्राप्ति होती है। शुभ प्रभाव बढ़ाने व सुख प्रदान करने में यह मंत्र अत्यन्त प्रभावी माने जाते हैं। सुविधा के लिए हमने मंत्र से संबंधित जानकारी भी यहां दी है।
लेकिन भगवान श्रीकृष्ण तब ही अपने मंत्रों का पूर्ण प्रभाव देते हैं जब जातक स्वयं कर्मयोगी और परिश्रमी हो-
भगवान श्रीकृष्ण का मूलमंत्र :
‘कृं कृष्णाय नमः’
– यह श्रीकृष्ण का मूलमंत्र है। इस मूलमंत्र का जाप अपना सुख चाहने वाले प्रत्येक मनुष्य को प्रातःकाल नित्यक्रिया व स्नानादि के पश्चात 108 बार करना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य सभी बाधाओं एवं कष्टों से सदैव मुक्त रहते हैं।
सप्तदशाक्षर श्रीकृष्णमहामंत्र :
ॐ श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा’
यह श्रीकृष्ण का सप्तदशाक्षर महामंत्र है। इस मंत्र का 5 लाख जाप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है। जप के समय हवन का दशांश अभिषेक का दशांश तर्पण तथा तर्पण का दशांश मार्जन करने का विधान शास्त्रों में वर्णित है। जिस व्यक्ति को यह मंत्र सिद्ध हो जाता है उसे सबकुछ प्राप्त हो जाता है।
सात अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘गोवल्लभाय स्वाहा’
इस सात (7) अक्षरों वाले श्रीकृष्ण मंत्र का जाप जो भी साधक करता है उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
आठ अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘गोकुल नाथाय नमः’
इस आठ (8) अक्षरों वाले श्रीकृष्ण मंत्र का जो भी साधक जाप करता है उसकी सभी इच्छाएं व अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं।
दशाक्षर श्रीकृष्ण मंत्र :
‘क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः’

 

यह दशाक्षर (10) मंत्र श्रीकृष्ण का है। इसका जो भी साधक जाप करता है उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
द्वादशाक्षर श्रीकृष्ण मंत्र :
‘ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय’
इस कृष्ण द्वादशाक्षर (12) मंत्र का जो भी साधक जाप करता है, उसे हर प्रकार की समृद्धि प्राप्त हो जाती है।
22 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘ऐं क्लीं कृष्णाय ह्रीं गोविंदाय श्रीं गोपीजनवल्लभाय स्वाहा ह्‌सों।’

 

यह बाईस (22) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण का मंत्र है। जो भी साधक इस मंत्र का जाप करता है उसे वागीशत्व की प्राप्ति होती है। इस मंत्र से वाणी में निखार आता है।
23 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीकृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय श्रीं श्रीं श्री’

 

यह तेईस (23) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण का मंत्र है। जो भी साधक इस मंत्र का जाप करता है उसकी सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
28 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘ॐ नमो भगवते नन्दपुत्राय आनन्दवपुषे गोपीजनवल्लभाय स्वाहा’

 

यह अट्ठाईस (28) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र है। जो भी साधक इस मंत्र का जाप करता है उसको समस्त अभिष्ट वस्तुएं प्राप्त होती हैं।
29 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘लीलादंड गोपीजनसंसक्तदोर्दण्ड बालरूप मेघश्याम भगवन विष्णो स्वाहा।’
यह उन्तीस (29) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र है। इस श्रीकृष्ण मंत्र का जो भी साधक एक लाख जप और घी, शकर तथा शहद में तिल व अक्षत को मिलाकर होम करते हैं, उन्हें स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
32 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘नन्दपुत्राय श्यामलांगाय बालवपुषे कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।’

 

यह बत्तीस (32) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र है। इस श्रीकृष्ण मंत्र का जो भी साधक एक लाख बार जाप करता है तथा पायस, दुग्ध व शक्कर से निर्मित खीर द्वारा दशांश हवन करता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
33 अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र :
‘ॐ कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण सर्वज्ञ त्वं प्रसीद मे। रमारमण विद्येश विद्यामाशु प्रयच्छ मे॥’

 

यह तैंतीस (33) अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र है। इस श्रीकृष्ण मंत्र का जो भी साधक जाप करता है उसे समस्त प्रकार की विद्याएं निःसंदेह प्राप्त होती हैं।

Leave a Reply

%d bloggers like this: