वर्चस्व की लडार्इ के कारण पनपती नौकरशाही वैमनस्यता

विशाल शर्मा

वाकया ताजा है, सिद्धार्थ नगर के एस पी मोहित गुप्ता का बस्ती के कमिश्नर पद पर तैनात रहते हुए अनुराग श्रीवास्तव द्वारा दुर्व्यवहार का मामला आर्इएएस एवं आर्इपीएस के बीच की वैमन्सयता का नतीजा दिखता नजर आ रहा है। नौकरशाही के सिपहसलारों से लेकर आला अफसरों मे ये चर्चा का विषय बना हुआा है कि सरकार किसका पक्ष लेती है ओर किस के खिलाफ कारवार्इ की जायेगी।

उत्तर प्रदेश जो चुनाव के ज्वर मे तप रहा है, जहाँ सभी राजनीतिक दल एक दूसरे दल की खिलाफत करते है ओर परस्पर एक दूसने को नीचा दिखाने के लिए जहर उगल रहे है तथा जनता के सामने सत्ताधारी सरकार की भ्रष्ट नौकरशाही व्यवस्था को भी दिखाना चाहते है कि किस कदर राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण नौकरशाही प्रभावित एवं दिशाहीन होती जा रही है ओर कैसे सत्ताधारी पार्टियो ने अपने अपने फायदे के लिए इसका दुरुपयोग किया है, ऐसे मे आला अफसरों के बीच की जिरह ओर परस्पर वर्चस्व की टकराहट जनता के सामने नौकरशाही व्यवस्था की सच्चार्इ दिखाती है ओर चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य के होने के बावजूद भी यह सच्चार्इ सामने लाकर खड़ी करती है कि राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधारों की नितान्त आवश्यकता है जिन्हें अब टाला नही जा सकता।

आज आर्इपीएस ऐसोसियेशन अपनी मागें लेकर सरकार के सम्मुख जाती है ओर सरकार उन मागों को मानने के लिए तैयार हो जाती है कल अगर आर्इएएस ऐसोसियेशन वाले अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध दर्ज करे या फिर कोर्इ ऐसी ही घटना की पुनरावृत्ति हो जाये तब सरकार क्या करेगी? इससे तो यही लगता है कि जो भी विरोध दर्ज कराये या दबाब बनाये उसे ही प्राथमिकता दी जाये ना कि ऐसे कदम उठाये जाये, जिससे इस तरह की घटनायें या गतिरोध उत्पन्न ही ना हो सके।

नौकरशाही व्यवस्था जो वैसे ही राजनीतिक उपयोग के लिए चर्चित रहती है अगर एक दूसरे से ऐसा ही रवैया या वैमनस्यता को पालेंगे तो आंतरिक सुधार या सही शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से कैसे लागू कर पायेगें ? आर्इएएस, आर्इपीएस जो शिक्षा की सर्वश्रेष्ठ प्रणाली को लेकर अपने अपने कार्यक्षेत्र मे आते है उनके बीच इस तरह का विवाद कहीं से भी अल्पज्ञ होने के संकेत तो नही देता है, फिर इस तरह की घटनाओं का इतने विकसित दिमाग के द्वारा होना कहीं ना कहीं ” अहं ब्रहासिम” को चरित्रार्थ करता है।

आज जरूरत आन पडी है कि सरकार द्वारा सशक्त एवं सुदृढ व्यवस्था लागू होनी चाहिए तथा राजनीतिक एवं प्रशासिनक स्तर पर ऐसे कड़े कदम उठाये जाये ताकि भविष्य मे कहीं भी इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना होने पाये ओर वर्चस्व की ये लड़ार्इ फिर से कोर्इ नया तमाशा ना खड़ा कर दे।

 

 

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