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    Homeसाहित्‍यकवितादिल की धड़कन सुनो

    दिल की धड़कन सुनो


    किसी ने किसी को दिल की धड़कन है माना,
    किसी ने किसी को पैरो की अचकन है माना।
    जिसकी जैसी होती है भावना अपने मन में,
    प्रभु की मूरत को उसने उसे वैसा ही है माना।।

    किसी ने पत्थर की मूरत को ईश्वर है माना,
    किसी ने ईश्वर की मूरत को पत्थर है माना।
    ये केवल अपनी अपनी समझ का फेर है भैया,
    जिसने जिसको जैसा समझा वैसा ही है माना।।

    किसी ने अपनो को भी बैगाना है माना,
    किसी ने बैगानो को भी अपना है माना।
    ये अपने अपने संस्कारों की बात है भैया,
    किसी ने सगे भाई को भी शत्रु है माना।।

    आकर दिल की दहलीज पर धड़कन को सुनो,
    सुनकर धड़कन को प्यार का ताना बाना बुनो,
    अगर कर नही सकते ये सब कुछ तुम मेरे लिए,
    आकर मेरी दिल की धड़कन को कदापि न सुनो।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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