प्रवक्‍ता सम्‍मान-2014 की घोषणा

प्रवक्‍ता डॉट कॉम के 6 साल पूरे होने पर गत वर्ष की भांति इस बार भी हम 10 प्रतिष्ठित लेखकों का सम्‍मान करने जा रहे हैं।

16 अक्‍टूबर  2014 को नई दिल्‍ली में आयोजित प्रवक्‍ता संवाद एवं सम्‍मान कार्यक्रम में सर्वश्री पंडित सुरेश नीरव, श्री अशोक गौतम, श्री विजय कुमार, श्रीमती बीनू भटनागर, श्री गौतम चौधरी, श्री शादाब जाफर ‘शादाब’, डॉ. सौरभ मालवीय, सुश्री सारदा बनर्जी, श्री हिमांशु शेखर एवं श्री शिवानंद द्विवेदी ‘सहर’ को प्रवक्‍ता सम्‍मान-2014 से सम्‍मानित किया जाएगा।

सम्‍मानित होने वाले लेखकों की सूची तैयार करते समय यह ध्‍यान रखा गया है कि जिनकी लेखनी का अपना विशिष्‍ट अंदाज हो, जो दबाव व प्रभाव से मुक्‍त होकर सहज व बेबाक लेखन करते हों और जो प्रवक्‍ता से आत्‍मीयतापूर्ण जुड़े हुए हों। इस सूची में समाज के विविध वर्ग और विभिन्‍न प्रदेशों के वरिष्‍ठ और युवा लेखकों को सम्‍मानपूर्वक स्‍थान दिया गया है।

हम चाहते हैं कि प्रवक्‍ता संवाद एवं सम्‍मान कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित करने की एक परंपरा बने और देश के यशस्‍वी लेखकों को सम्‍मानित करने का सौभाग्‍य हमें मिलता रहे।

प्रवक्‍ता सम्‍मान-2014 से सम्‍मानित होनेवाले सभी लेखकों को प्रवक्‍ता डॉट कॉम की ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!

नीचे प्रस्‍तुत इमेज पर क्लिक करके इसे साफ-साफ पढ़ा जा सकता है –

pravakta-samman

7 thoughts on “प्रवक्‍ता सम्‍मान-2014 की घोषणा

  1. प्रवक्ता.कॉम पर सम्मानित सभी लेखकों को पहले विभिन्न विषयों पर उनके लेखों में भांति भांति के विचार प्रस्तुत कर मेरे सामाजिक व राजनीतिक दृष्टिकोण में संतुलन लाने में मैं उनका धन्यवाद करता हूँ और उन्हें स्वतन्त्र अभिव्यक्ति के इस विशिष्ट मंच पर मिले सम्मान के लिए सह्रदय बधाई देते हुए उन्हें हिंदी भाषा में शब्दावली की गुणवत्ता की ओर विशेष ध्यान देने का अनुरोध करता हूँ। यदि चिरकाल से अधिकतर भारतवासी झौपड़ पट्टी अथवा अव्यवस्थित गाँव व कस्बों में रह रहे हैं और जब शहरों के चौराहों पर कूड़े के ढ़ेर हमें विचलित नहीं करते तो हम स्वछता और सुंदरता से नाता तोड़ लेते हैं। उसी प्रकार हिंदी भाषा में शब्दावली की गुणवत्ता के अभाव के कारण हम अपनी सोच विचारने की शक्ति ही खो देते हैं। उदाहरणार्थ, किशोरावस्था तक पंजाब के छोटे से गाँव में रहते मेरे लिए सौ दो सौ पंजाबी शब्दों के प्रयोग से सामान्य वार्तालाप संभव था। तत्पश्चात शहर में उच्च विद्यालय में शिक्षा पाने पर कई एक सौ व्यवहारिक हिंदी अंग्रेजी शब्दों का अतिरिक्त ज्ञान मेरे व्यावसायिक प्रशिक्षण व कार्य का अटूट अंग बन कर रह गया। दैनिक जीवन में मेरे संपर्क में आए दुकानदार, वाहनचालक, सहायक कर्मचारी, सहकर्मी, इत्यादि किसी प्रकार से मेरे हिंदी शब्दावली ज्ञान में कोई वृद्धि न कर पाए। और तो और, राष्ट्रीय हिंदी समाचारपत्र अधिकतर व्यवहारिक शब्दों का प्रयोग करते किसी विषय पर भी विस्तारपूर्वक विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे हैं। ऐसी ही परिस्थितियों व कारणों वश हिंदी भाषियों में शब्दावली की गुणवत्ता का अभाव उनके जीवन में और फिर समाज में मध्यमता एवं अयोग्यता को पनपता रहा है। स्वयं मेरे लिए पूर्व शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी द्वारा साहित्यिक हिंदी में प्रवचन सुनते हिंदी भाषा में मेरी रूचि बड़ी है। शैक्षिक विद्या के साथ संवाद-विषयक हिंदी भाषा में प्रवीणता हमें गंभीर रूप से सोचने को बाध्य कर हमारे विचारों में परिपक्वता उत्पन्न करती है। अतएव सभ्य पाश्चात्य देशों की भांति अपनी हिंदी भाषा में शब्दावली की गुणवत्ता हमारे भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  2. इस वर्ष प्रवक्ता 2014 सम्मान पाकर खुश हॅू साथ् ही आभारी हॅू कि प्रवक्ता.कॉम ने मुझे और मेरी लेखनी को सम्मान के योग्य समझा प्रवक्ता.कॉम और संजीव जी का हार्दिक धन्यवाद.सम्मानित होने वाले सभी लेखकों को हार्दिक बधाई.मैं खुद को धन्य समझता हूँ कि मैं प्रवक्ता से जुड़ा हुआ हूँ।

  3. संजीव सिन्हा जी और उनकी प्रवक्ता टीम को बधाई।
    सभी सम्मानित होने वाले लेखक और लेखिकाओं को भी दिली मुबारकबाद।
    प्रवक्ता ने एक बीआर फिर साबित किया है कि न केवल लिखने के लिए ये एक खुला मंच है बल्कि सम्मान देने में भी इस बात का पूरा ख़याल रखा गया है कि सभी तरह की सोच वर्ग और क्षत्रों को प्रतिनिधित्व दिया जाय। यही अभिव्यक्ति की आज़ादी और निष्पक्षता की पहचान है।
    एक बार फिर सभी को बधाई।
    मैं खुद को धन्य समझता हूँ कि मैं प्रवक्ता से जुड़ा हुआ हूँ।

  4. सभी को अग्रिम बधाई।


    सादर,
    शिवेंद्र मोहन सिंह

  5. सम्मानित होने वाले सभी लेखकों को हार्दिक बधाई.

  6. सबसे पहले सभी सम्मानित लेखकों और लेखिकाओं कोहार्दिक बधाई.
    फिर दो शब्द प्रवक्ता के बारे में..
    गागर में सागर भर दिया है इस युवा वृन्द ने प्रवक्ता में और मात्र छः वर्षों में अपने अथक परिश्रम से उसे इस ऊंचाई पर ले आये हैं. संपादक संजीव जी और उनके सहयोगियों को बहुत बहुत शुभ कामनाएं.
    मैं तो प्रवक्ता के दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति की शतत कामना करता हूँ.

  7. सम्मानित होने वाले सभी लेखकों को हार्दिक शुभकामनाएं।

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