राहुल गांधी-कांग्रेस मुक्त भारत के ‘अनथक योद्धा’

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब कांग्रेस मुक्त भारत का संकल्प मंच पर बार-बार दोहराते हैं, तब व्यक्तिगत रूप से मुझे ऐसा कई बार लगता है कि यह एक नकारात्मक विचार है। भाजपा स्वयं को सर्वव्यापी बनाने की बात करे, किसी को मिटाने की नहीं। एक लोकतांत्रिक देश में पक्ष के साथ विपक्ष की भी आवश्यकता है। पर आज फिर लग रहा है कि वास्तव में देश को कांग्रेस से मुक्त होने की आवश्यकता ही है। कारण आज जो कांग्रेस है वह  1947 के  पूर्व की कांग्रेस नहीं है, वह 2017 की कांग्रेस हैं। जिसके युवराज महिलाओं को शॉर्ट्स में देखने की इच्छा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में करते हैं।

यूं तो राहुल गांधी भारतीय राजनीति में एक मनोरंजन का विषय हैं। आज जो कांग्रेस की देशव्यापी दुर्गति है, बेशक इसमें उनके पूर्वजों की नाकामियां हैं पर कांग्रेस को तेजी से समाप्त करने का श्रेय इतिहास में किसी को भविष्य में दिया जाएगा तो निर्विवाद रूप से श्री राहुल गांधी का नाम  सर्वोच्च होगा। राहुल गांधी का यह दुर्भाग्य है या यह उनकी वास्तविक योग्यता का बारम्बार प्रगटीकरण कि वह जब भी सक्रिय होते हैं अपनी ही पार्टी को डुबाने का काम करते हैं। हाल ही में वह देश से औपचारिक रूप से बताकर  बाहर गए (सामान्यत: श्री गांधी की विदेश यात्राएं उनके अपने ‘अध्ययन’ के चलते गोपनीय रहती हैं) तो अपने वंशवाद के बयान को लेकर सुर्खियों में आए। देश के प्रधानमंत्री पद देश के बाहर वह अपनी दावेदारी बताकर यह कह गए कि सदी के महानायक अमिताभ का बेटा अभिषेक फिल्म में नायक बन सकता है तो वह क्यों नहीं, उनके पिता भी देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। इन दिनों वे गुजरात में कीर्तन कर रहे हैं, भजन मंडली में नाच भी रहे हैं। देश में चल पड़ी राष्ट्रीयता की लहर नेताओं को किस कदर शीर्षासन करा रही है इस पर चर्चा फिर कभी। बहरहाल अभी इन दिनों राहुल गांधी गुजरात में अपनी खोई हुई पार्टी की राजनीतिक जमीन को पाने का असफल प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में वे बड़ोदरा के विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम में कुर्ते की बाहें चढ़ाकर इधर से उधर चहल कदमी करते हुए बतिया रहे थे। अब ये पता नहीं कि यह पटकथा उनके विद्वान सलाहकारों की है (कारण उनमें से एक तो नर्मदा मां की परिक्रमा कर अपने राजनीतिक पुनर्वास की संभावना तलाश रहे हैं) या स्वयं उनके दिमाग की उपज। राहुल गांधी बोले भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महिला विरोधी है।  अब उन्हें कौन समझाए कि भाजपा के साथ संघ को भी लपेट कर उनके पूर्ववर्ती भी मुंह की खा चुके हैं। वे यही नहीं रुके, आगे बोले कि संघ की शाखाओं में महिलाएं नहीं हैं। वे सवाल करते हैं क्यों नहीं है महिलाएं? क्या आपने संघ की शाखाओं में शॉर्ट्स पहने महिलाओं को देखा है? किराए की भीड़ से जुटाए गए छात्रों की शक्ल में नेता ताली बजाते हैं। राहुल आगे कहते हैं, मैंने तो नहीं देखा। अब इस बेहूदा बयान का क्या अर्थ है? यूं तो अब संघ की शाखाओं में भी वेश अब नेकर की जगह पैंट है, पर महिलाओं का शॉर्ट्स  में देखा क्या मैंने तो नहीं देखा कह कर राहुल कह क्या रहे हैं? क्या कांग्रेस अब विचारों के स्तर पर, इतिहास के ज्ञान के स्तर पर, तथ्यों की सत्यता के स्तर पर इतनी दरिद्र, दीवालिया हो गई है?

क्या राहुल गांधी नहीं जानते कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना काल 1925 से पुरुषों का संगठन है। पर संघ कार्य के विस्तार में महिलाओं की भूमिका परोक्ष रूप से उतनी ही वंदनीय है। क्या वे यह नहीं जानते कि महिलाओं के लिए एक स्वतंत्र संगठन राष्ट्र सेविका समिति है? और आज यह संगठन 8 दशक पूर्ण कर चुका है। क्या वे अपनी निर्मल आंखों से (जो संभवत: अब बची ही नहीं) देखना चाहेंगे कि देश भर में सेविका समिति की 2784 शाखाएं चल रही हैं और यहां मातृशक्ति शॉर्ट्स में नहीं बल्कि भारतीय परिधान में स्वयं की रक्षा के साथ-साथ राष्ट्र रक्षा के लिए नित्य साधना से सज्ज हो रही है। यद्यपि राहुल गांधी की रुचि पढ़ने लिखने की प्रारंभ से ही नहीं है। पर उनकी जानकारी के लिए 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, 1956 से 1961 तक गोवा मुक्ति आंदोलन, 1962 से चीन 65 और 71 में पाकिस्तान के आक्रमण के समय आंतरिक सुरक्षा को लेकर राष्ट्र सेविका समिति की  बहनों की उल्लेखनीय भूमिका रही है।

यही नहीं देश में जब भी कहीं भी आपात स्थिति आई देश  के इस अभिनव संगठन ने अपनी भूमिका से समाज में एक स्थान बनाया है। राष्ट्र सेविका समिति के आज देश भर में 370 प्रत्यक्ष सेवा कार्य, 24 छात्रावास चल रहे हैं। यही नहीं समिति अब देश की सीमाओं से बाहर भी 22 देशों में भारतीय संस्कृति का नाद कर रही है। यही नहीं रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन हो या जम्मू-कश्मीर बचाओ अभियान हो, कारगिल युद्ध हो या देश के अर्थ तंत्र की सुरक्षा के लिए स्वदेशी पखवाड़ा राष्ट्र सेविका समिति का देश के विकास में क्या योगदान है, यह राहुल गांधी को स्वयं के बौद्धिक ज्ञान के लिए पढ़ना चाहिए। रानी लक्ष्मीबाई, जीजामाता एवं अहिल्या देवी को अपना आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत मानने वाली राष्ट्र सेविका समिति की बहनों को शॉर्ट्स में देखने की चाह रखने वाले युवराज अपने घर की मातृशक्ति को किस स्वरूप में देखने की कल्पना करते हैं, यह वे ही बता सकते हैं और यह उन्हें बताने की आवश्यकता भी नहीं है। कारण नागपुर में युवा कांग्रेस ने महिलाओं के साथ क्या किया ये देश आज नहीं भूला है। नैना साहनी को तंदूर में जलाने वाले कौन थे, सबको पता है। अपनी ही पार्टी की युवा सांसद को टंच माल कहलाने वाले इस पार्टी के महासचिव हैं। अपनी पत्नी दो दिन बाद बोर करती है, यह कहने वाले इसी पार्टी के पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं। अत: राहुल गांधी के लिए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने ठीक सलाह दी कि वे संघ की चिंता न करें। क्योंकि संघ का दर्शन, उसकी कार्यपद्धति समझने के लिए राहुल गांधी को खूब परिश्रम मानसिक स्तर पर करना होगा, जो उनके बस में नहीं है। वे अपनी पार्टी की चिंता करें पर ऐसी चिंता करेंगे तो प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को पूर्ण करने में उनके योगदान को देश याद रखेगा।

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