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    रामरतन चूड़ीवाला जिनके लिए समाजसेवा एक जज्बा है

    कुमार कृष्णन

    रामरतन चूड़ीवाला पूर्व बिहार के ऐसे समाजसेवी हैं जिनकी पहचान पूरे इलाके में है। समाज के लिए काम एक परिवर्तन और वदलाव के लिए करते हैं।समाजसेवा का भाव इनके पारिवारिक विरासत में मिला। इनके पिता शुभकरण चूड़ीवाला बिहार के ख्यााति प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी थे। महात्मा गांधी जब भागलपुर आए थे तो उनके आह्वान पर उन्होंने देशसेवा का व्रत लिया और आजीवन उस पथ पर अडिग रहे। अपने पारिवारिक विरासत के कदम को वे आज भी आगे बढ़ा रहे हैं। समाज के लिए काम करना दिखावा नहीं बल्कि सेवा,दान और प्रेम जिस पर मानवता की बुनियाद टिकी है, उसी मकसद से  काम कर रहे हैं।अपने जन्म काल से ही उन्होंने समाजसेवा के असली स्वरूप को देखा है।

    उनका जन्म 1 सितम्बर 1947 में भागलपुर में हुआ।माता का देहांत वाल्यावस्था में ही हो गया था।दादी ने भरण पोषण में मदद की। आरंभिक शिक्षा मारबाड़ी पाठशाला में मिड्ल क्लास तक हुई। विरासत में व्यवसाय तो था। लेकिन पिता जी के सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण घर में देश जानेमाने नेता से लेकर भागलपुर शहर के अग्रणी पंक्ति् के राजनेताओं और समाजसेवकों का तांता लगा रहता था।भागलपुर को ऐसा कोई भी सामाजिक संस्था ऐसा न होगा, जिसके वे पदाधिकारी और सदस्य न थे।इस कारण उन्होंने सेवा की राह चुनी। गांधी, लोहिया, जयप्रकाश के विचारधारा  से  काफी प्रभावित रहे।राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली के गीत इनके लिए प्रेरणा बने। जब भी भागलपुर में गोपाल सिंह नेपाली का कार्यक्रम होता तो उसमें अवश्य जाते थे।

    सन् 1962 में निर्माणाधीन हनुमाना डैम टूटने के कारण दक्षिण भागलपुर प्रमंडल में भयंकर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न् हो गयी थी तो अपने पिता शुभकरण चूड़ीवाला, जागेश्वर मंडल, डॉ सदानंद सिंह, काशी विश्वनाथ सेवा समिति कोलकता, मारबाड़ी रिलिफ सोसाइटी,कोलकाता के साथ बाढ़पीड़ितों के सहायतार्थ काम किया, क्योंकि बाढ़ के कारण स्थिति काफी  विषम हो गयी थी। यही से उन्होंने सेवा के क्षेत्र  में अपना कदम रखा। जब 1966—67 में भयंकर अकाल के कारण सूबे को अकालग्रस्त क्षेत्र धोषित किया गया। उस दौर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अध्यक्षता में गठित बिहार अकाल रिलिफ कमेटी बनायी गयी। भागलपुर जिला के संयोजक सुप्रसिद्ध गांधीवादी डॉ रामजी सिंह एवं बिहार प्रदेश मारबाड़ी सम्मेलन के साथ छह महीने तक सहयोग में लगे रहे।

    दुर्योग ही कहा जाय कि 17 अप्रैल 1963 को भागलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नं दो पर गोपाल सिंह नेपाली की मौत हुई,उनके शव को भागलपुर के मारबाड़ी पाठशाला के प्रांगण में दर्शनार्थ रखा गया। रात भर आनंद शास्त्री के साथ वहां रहे और फिर उस महाकवि के अंतिम यात्रा के भी सहभागी बने।

    1968 में नगर प्रजा सोसलिस्ट पार्टी के संगठन सचिव बनाए गए। इस सिलसिले में तात्कालीन विधान परिषद सदस्य, प्रदेश प्रजा सोसलिस्ट पार्टी के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास संगठन के कार्य से जब भागलपुर आते थे तो इन्हीं के यहां ठहरते थे। उनके सिफारिश पर बिहार प्रदेश अध्यक्ष सूर्यनारायण सिंह ने जिला उप संयोजक का भार उन्हें सौंपा। पार्टी के एक बैठक के सिलसिले में जब सूरज बाबू का भागलपुर स्टेशन पर स्वागत हुआ ,उसमें पीरपैतीं के गोपाल सिंह, नाथनगर के रामपुर के रामफल मंडल, सूर्यनारायण मिश्र, रुद्रदत्त आर्य, लखन भारती की उपस्थिति में कहा कि नेतृत्व दिया नहीं लिया जाता दौर है। उस दौर में कहा गया कि राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में अब नई पीढ़ी को आगे आना चाहिए।1970 में  प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेशनल राष्ट्रीय समिति में बिहार के प्रतिनिधि के रूप में भागलपुर जिला से चुने गए।

    1971 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की ओर से स्टेशन परिसर के बाहर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं को वहाल कराने यथा यात्री शेड,शौचालय, पेयजल आदि के लिए पार्टी के साथियों के साथ 72 घंटे का सामूहिक अनशन किया। संयोगवश उस समय विधान परिषद् का सत्र चालू था,रामसुंदर दास ने सदन में जोरदार शब्दों में वस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं केा वहाल करने की मांग उठायी। उस समय के पथ परिवहन मंत्री ने आश्वस्त किया कि भागलपुर के साथ—साथ पूरे बिहार में पथ परिवहन के स्टैंडों पर यात्री सुविधा शौचालय,पेयजल तथा यात्री शेड की सुविधा वहाल होगी। मंत्री के आदेश पर पथ परिवहन निगम के महाप्रवंघक ने अनशन तुड़बाया। इस आंदोलन की चर्चा बिहार विधान परिषद की कार्रवाई में भी है।70 के दशक में बैलगाडी गाड़ीवान संघ के सचिव रह चुके हैं।

    समय बीतता गया।  1974 में छात्र आंदोलन के सिलसिले में समाजवादी नेता कपूर्री ठाकुर, छात्र नेता रधुनाथ गुप्ता के साथ भागलपुर आए थे। उस समय उनके साथ एक बैठक में जाने का  मौका मिला। इसी दौरान उन्होंने कहा कि इस आंदोलन से बहुत बड़ी उपलव्घि मिलनेवाली है।आजादी के बाद कोई आंदोलन हुआ नहीं। हमलोग 1942 की आंदोलन की उपज हैं। श्री बाबू , पंडित जबाहर लाल नेहरू 1932 के आंदोलन के हैं। इस आंदोलन से सामाजिक चिंतक, राजनीतिक नेता नई पीढ़ी के निकलेंगे। शेष लोग नौकरी, पेशा और गृहस्थी में चले जाएंगे।

    1974 के आंदोलन में तीन दिन तक बिहार बंद के आह्वान पर सुधा श्रीवास्तव, हरिवंश मणि सिंह, वीणा घोष, बलराम घोष,कृष्णा मित्रा, मीणा मोदी के साथ कोर्ट, बैंक बंद कराते हुए संयुक्त भवन के गेट तक आंदोलनकारियों के साथ रहे। इन सभी लोगों ने अपनी गिरफ्तारी दी और ये वहां से भाग निकले। सुधा श्रीवास्तव जब जेल से बाहर आयी तो उन्होंने टिपण्णी की कि कुछ लोगों को बाहर रहना चाहिए। वे जेपी के तरुण शांति सेना के सदस्य भी रहे। 1974 के   आंदोलन के दौरान वे भूमिगत तौर कार्यरत रहे। बिहार में डॉ जगन्नाथ मिश्र  के मुख्यमंत्रित्व काल में जब काला प्रेस विल लाया गया तो उसके विरोध में डॉ रामजी सिंह, जागेश्वर मंडल, रामशरण, प्रो. बिजय और पारसकुंज के साथ आंदोलन में सक्रिय भूमिका अदा की। बिल  के  विरोध में बिहार बंद के दौरान समाचारपत्र विक्रेताओं को संगठित किया गया और समाचार पत्र विक्रेताओं उनके तथा पारसकुंज के नेतृत्व में  एक वैनर स्टेशन चौक पर लगाया गया था जिसमें लिखा था—’ जनता की आवाज प्रकाश में आने दो।’ इसकी तस्बीर दिनमान में भी  प्रकाशित हुई थी।

    सन् 1980 में उत्तर प्रदेश के बागपत में जब पुलिस द्वारा योगमाया को नंगा घुमाया गया तो समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ने इस घटना के विरोध का आह्वान किया। युवा सचिव और वर्तमान में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन  सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ मिलकर रामरतन चूड़ीवाला ने वातावरण निर्माण किया तथा टमटम स्टैंड पर भागलपुर में 12 घंटे का अनशन किया। पूरे क्षेत्र में दोदिवसीय प्रतिरोध आंदोलन हुआ।

    1992 से 1994 तक ईस्टर्न बिहार चेम्बर आफ कामर्स के प्रतिनिधि के रूप में दानापुर रेलमंडल में रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य रहे।ईस्टर्न बिहार चेम्बर आफ कामर्स के 45 वर्षो से क्रियाशील सदस्य रहते हुए चेम्बर के उपाध्यक्ष  पद को भी सुशोभित कर चुके हैं।श्रीश्री 108 कालीपूजा विसर्जन महासमिति जिसमें प्रसिद्ध समाजसेवी बनारसी प्रसाद गुप्ता, तात्कालीन विधान परिषद् सदस्य तथा जानेमाने पत्रकार सहदेव झा के साथ अध्यक्ष अक्षय मिश्रा थे। इसमें सक्रिय होकर शांति और सद्भावना के लिए काम करते रहे।

    बिहार कृषि महाविघालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने लिए आवाज वुलंद की। सर्वप्रथम जब इस सवाल पर पाल कमीशन की बैठक 1966 में विहार विधान सभा के उपाध्यक्ष सत्येन्द्र नारायण अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई तो विश्वविधालय का दर्जा देने की आवाज वुलंद की। बाद में भागलपुर प्रमंडल विकास अभियान समिति के संघर्ष समिति के संयोजक की हैसियत से विश्वविद्यालय बनाने के आंदोलन को अभियान का रूप दिया।

    गंगा पुल, रेलवे दोहरीकरण और भागलपुर— मंदारहिल रेलवे लाइन को दुमका होते हुए मेन लाइन में मिलाने के लिए धरना, प्रदर्शन,भागलपुर बंद जैसे आंदोलन में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि इसके समर्थन में एक बड़ा जनमत तैयार किया, जिसके फलस्वरूप राजनीतिक इसकी आवाज उठाने में मजबूर हुए। स्थाीनय सांसद सुबोध राय, चुनचुन यादव, राज्यसभा सदस्य नरेश यादव के द्वारा आवाज उठायी गयी और क्षेत्रीय विकास के लिए पहल की। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति से जुड़कर बिजली के सवाल पर आंदोलन किया।

    वे शहर की विभिन्न संस्थाओं रामनंदी देवी हिंदू अनाथालय, नवकष्ठ आश्रम, गांधी शांति प्रतिष्ठान, तरूण शांति सेना,अंग मदद फाउंडेशन, बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति, भागलपुर सदर अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति सहित शहर की विभिन्न् संस्थाओं से जुड़े हैं।भागलपुर में जबाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अस्तित्व में आने के बाद सदर अस्पताल जब उपेक्षा का दंश झेल रहा था तो स्व. अशोक घोष के नेतृत्व में फारूक अली, रामशरण, प्रकाश गुप्ता के साथ लगातार आंदोलन में सक्रिय रहे। इस आंदोलन की मांग थी कि सदर अस्पताल को प्रमंडलीय अस्पताल का दर्जा मिले।वहीं भागलपुर स्टेट बैक  जोनल आफिस बचाओं संघर्ष समिति के आह्वान पर अशोक घोष के नेतृत्व में धरना, प्रदर्शन एवं भागलपुर बंद के आंदोलन में सक्रिय भूमिका अदा की तथा इसमें कामयावी भी मिली।

    1989 का भागलपुर दंगा भागलपुर के इतिहास का काला अध्याय। इंसानियत तार—तार हो गयी। इससे वे काफी विचलित हुए। ऐसे समय में लोगों की भावनाएं धर्म के आधार पर बंट जाती है, लेकिन इससे वेपरवाह पीड़ितों की मदद के लिए लगे रहे। भागलपुर गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र के मिलकर दंगाग्रस्त इलाके में जाकर पीड़ितों के लिए काम किया और अमन का संदेश दिया। उसी दौर में भागलपुर के दंगे की खबर सुनकर सुप्रसिद्ध गांधीवादी एसएन सुब्बा राव भागलपुर पहुंचे, उनके साथ उन्होंने शांति मार्च की तथा पदयात्रा में शरीक हुए।

    इसके अलावा उनके सामाजिक कार्यो का एक विस्तृत दायरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंवन  के क्षेत्र में विना दिखावे के काम कर रहे हैं। उनके कार्यो के लिए राजा राममोहन राय स्मृति मंच, गांधी दर्शन एवं स्मृति समिति नई दिल्ली की ओर से तिलकामांझी सम्मान से तात्कालीन कुलपति डॉ रमाशंकर दुबे द्वारा तिलकामांझी सम्मान और मुंगेर में पद्मभूषण परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान से  सम्मानित किया जा चुका है। वे “रामानन्दी देवी हिन्दू अनाथालय नाथनगर, भागलपुर” के संरक्षक भी हैं

    कुमार कृष्णन
    विगत तीस वर्षो से स्वतंत्र प​त्रकारिता, देश विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित संपर्क न. 09304706646

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