साडी रसोई १०/- और सादी रसोई ५/- में …….

पंजाब दे कैप्टन उर्फ़ महाराजा साहेब अर्थात सदर ऐ रियासत ने पंजाब के गरीबों को भरपेट भोजन देने का वायदा किया था और वह भी महज़ ५ रुप्प्या में ….. जब सदर ने रियासत की जेब टटोली तो राजकुमार की जेब की मानिंद ‘फटी ‘ हुई निकली …… एक जद्दी एडवाइज़र को बुलाया …. हल पूछा !
…जनाब आप भी क्या बेकार के कामों में पड़ गए ….. ये डी सीज़ किस मर्ज़ की दवा हैं ….. उन पर छोड़ दो ! विदेशी मेहमान बाहर धूप में खड़े हैं ……
अब बेचारे …… अपने ज़िल्ले का काम छोड़ छाड़ कर १०/- में हेल्दी साडी रसोई और ५/- में सादी रसोई ….. राईस ,रोटी ,दाल -सब्जी और साथ में आचार ! का जुगाड़ जुटाने में व्यस्त हैं …..
रियासती रजवाड़ाशाही के दिन भी क्या दिन थे ? रियासत के पहले कालेज ‘महेंद्रा कालेज में छात्र फ्री में पढ़ते थे यही नहीं ! सुबह के नाश्ते में पिस्ता -बादाम युक्त दूध मिलता था।
महाराजा ऐ राजगान महाराजाधिराज राजेश्वर महाराजा भूपेंद्र सिंह महेंद्र बहादुर महाराजा पटिआला के समक्ष जब छात्रों पर मामूली सी फीस लगाने का प्रस्ताव आया तो उन्होंने बहुत मुश्किल से इस पर अपनी सहमति दी ….
अब १०/- वाला हेल्दी खाना किन भाग्यशाली गरीबों को मिलेगा और साथ में ‘आचार ‘वाले ५/- वाली थाली का लुत्फ़ कौन खुशनसीब उड़ाएंगे का फैसला तो सदर ऐ रियासत की काबीना ही कर पाएगी।
ग़ालिब का एक शेयर याद आ गया ……
वाह रे ग़ालिब तेरी फाका मस्तियाँ
वो खाना सूखे टुकड़े भिगो कर शराब में

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