शंकर बाबा बोले बाबा,तुम देवो के देवा
बेलपत्र धतूरा चढाये और चढ़ाये  मेवा
गंगा से जल लाये है,तुम्हे नहलाने देवा
सब भक्त मिलकर,करते तुम्हारी  सेवा

रावण को लंका दीनि,पार्वती को गणेश देवा
जिसकी पूजा पहले होती,फिर भी  महादेवा
जटाओ से गंगा निकाली,नंदी वाहन करे सेवा
पार्वती आपकी पत्नि है,जो निरन्तर करे सेवा 

हम तो भोले भक्त तेरे,हर साल करेगे सेवा
कृपा द्रष्टि हम पर रखना,चाहते नहीं मेवा
डमरू आपके हाथ में,कहलाते है त्रिशूल धारी
तुम्ही भक्तो की रक्षा करते,जब भीड़ पड़े भारी

सावन का तुम्हारा महीना,चौदस पर जल चढ़ता
मंदिरों में भीड़ होने पर,सब भक्तो का जल चढ़ता
भोले भाले बाबा हो,तुम्हारे दर से खाली नहीं जाता
सभी की मनोकामना पूरी होती,जो जल तुम्हे चढ़ाता

एक प्रार्थना प्रभु तुमसे,जो गन्दी भावना लेकर आते
उनको तुम दंड देना,जो केवल मौज-मस्ती करने आते
तुमने तो विष पान किया था केवल संसार के वास्ते
उन बन्दों को माफ़ मत करना,जो जहर घोलने जाते

आर के रस्तोगी  

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