2018 में माघ पूर्णिमा के लिए स्नान और शुभ मुहूर्त—

हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा को बहुत ख़ास माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन गंगा या किसी अन्य पवित्र में स्नान करना बहुत ही शुभ और लाभकारी माना जाता है। इतना ही नहीं मान्यता ये भी है की माघ के माह का प्रत्येक दिन खास और विशेष होता है इसीलिए इस महीने में सबसे अधिक दान-पुण्य के कार्य किये जाते है।

माघ पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है जो इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन लोग गंगा यमुना और सरस्वती के संगम पर जाकर स्नान करते है, गायों का दान करते है और हवन आदि पुण्य कर्म करते है।

बहुत से लोग माघ के पुरे महीने प्रातःकाल जागकर गंगा और यमुना नदी में स्नान करते है। इस स्नान का प्रारंभ पौष पूर्णिमा से होता है और समाप्ति माघ पूर्णिमा पर होती है। इसके अलावा माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाती है।

 

वर्ष 2018 में माघ पूर्णिमा 31 जनवरी 2018, बुधवार के दिन मनाई जाएगी।

 

माघ पूर्णिमा का समय

 

पूर्णिमा तिथि आरंभ = 30 जनवरी 2018, मंगलवार 22:22 बजे।
पूर्णिमा तिथि समाप्त = 31 जनवरी 2018, बुधवार 18:56 बजे।

 

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जानिए 2018 में माघ पूर्णिमा के लिए स्नान और शुभ मुहूर्त—

 

प्रिय मित्रों/पाठकों/दर्शकों,  हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा का कार्तिक पूर्णिमा जैसा महत्व है। वर्ष 2018 का माघ पूर्णिमा (बुधवार) 31 जनवरी 2018 को मनाई जाएगी। धार्मिक पंडित कहते है कि वैसे तो वर्ष के प्रत्येक माह की पूर्णिमा का महत्व है परन्तु माघ पूर्णिमा की बात भिन्न है। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों तथा सरोवरों या संभव हो तो संगम में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के सारे पाप कट जाते है तथा व्यक्ति की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।  हिंदू धर्म में माघ महीने का बहुत ही खास महत्व होता है।

इस मास का वैसे तो हर दिन पवित्र माना जाता है लेकिन पूर्णिमा का माहात्मय तो सभी दिनों से बढ़कर माना जाता है। माघ मास की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है। हिंदू पंचाग के अनुसार पूर्णिमा चंद्र मास का अंतिम दिन होता है। मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण ही इस मास को माघ मास कहा जाता है
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माघ पूर्णिमा की कथा —

 

प्राचीन समय में एक बार कान्तिका नगरी में धनेश्वर नामक एक ब्राह्मण रहता था। ब्राह्मण हमेशा दुखी रहता था क्योकि वह निः संतान था। ब्राह्मण धनेश्वर ने बहुत जतन किया परन्तु उनकी पत्नी रूपमती से कोई संतान की उत्पति नही हुई। ब्राह्मण प्रतिदिन भिक्षा के लिए दूसरे गाँव जाया करता था।
एक दिन जब भिक्षा के लिए एक यजमान के घर पधारे तो यजमान ने भिक्षा देने से इनकार कर दिया। यजमान ने कहा की क्षमा करे, ब्राह्मण देव पर मैं आपको भिक्षा नही दे सकता हूँ क्योकि आपकी कोई संतान नही है तथा मैं निः संतान को दान या भिक्षा प्रदान नही कर सकता हूँ। क्षमा करे, ब्राह्मण देव। परन्तु मैं आपको संतान प्राप्ति के लिए एक माध्यम देता हूँ।

 

माँ चन्द्रिका देवी अर्थात माँ काली की पूजा तथा उपवास करे। आपको अवश्य पुत्र की प्राप्ति होगी। धनेश्वर ब्राह्मण तथा उसकी पत्नी रूपमती ने माँ काली की श्रद्धा और निष्ठा से भक्ति किया जिससे माँ काली प्रसन्न हो दोनों को दर्शन देकर वर दिया की निकट भविष्य में तुम्हे संतान प्राप्ति होगी। कुछ समय के पश्चात ब्राह्मण धनेश्वर को संतान की प्राप्ति हुई।
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माघ पूर्णिमा पूजन विधि —-

 

माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है जिसे सत्यनारायण पूजा भी कहते है। भगवान विष्णु व्रती के विधि-विधान से सम्पन्न किये गए पूजा को स्वीकार करते है। पूजन समाप्ति के समय भगवान विष्णु से परिवार के सुख, शांति और मंगल की कामना करे। भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से व्रती का सदैव मंगल होता है।  इस दिन उपासक को भगवान विष्णु की पूजा के लिये सामग्री के तौर पर केले के पत्ते, फल, पंचामृत, पान-सुपारी, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा तथा प्रसाद में चूरमा आदि का उपयोग किया जाता है। किसी विद्वान ब्राह्मण से भगवान सत्यनारायण की कथा करवाना भी इस दिन शुभ रहता है।
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माघ पूर्णिमा का महत्व —-

 

मान्यता है कि सभी देवता माघ मास में गंगा स्नान के लिये पृथ्वी पर आते हैं। मानव रूप में वे पूरे मास भजन-कीर्तन करते हैं और यह देवताओं के स्नान का अंतिम दिन होता है।  एक मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में दानवीर कर्ण को माता कुंती ने माघी पूर्णिमा के दिन ही जन्म दिया था। इसी दिन कुंती ने उन्हें नदी में प्रवाहित किया था।

इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से दैहिक, दैविक, भौतिक आदि सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। वैसे तो धार्मिक ग्रंथों में पूरे महीने स्नान करने का महत्व बताया गया है लेकिन यदि कोई पूरे मास स्नान नहीं भी कर पाता है तो माघी पूर्णिमा से लेकर फाल्गुनी दूज तक स्नान करने से पूरे माघ मास स्नान करने के समान ही पुण्य की प्राप्ति की जा सकती है।

माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करना चाहिए। इस दिन गंगा, यमुना तथा पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पाप का नाश होता है और अमोघ फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रो में उल्लेख है की जो मनुष्य स्वर्ग की अभिलाषा करते है तथा स्वर्ग में अत्यधिक समय तक सुख का आनंद पाना चाहते है। उन्हें माघ पूर्णिमा के दिन (जब सूर्य मकर राशि में होते है) पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इससे मनुष्य की आकांक्षा पूरी होती है। इस तरह माघ पूर्णिमा कीकथा सम्पन्न हुआ।
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जानिए माघ पूर्णिमा पर दान का महत्व —-

 

इस दिन किए गए यज्ञ, तप तथा दान का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न आदि का दान करना पुण्यदायक माना जाता है। माघ पूर्णिमा में प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करके भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए। माघ मास में काले तिलों से हवन और पितरों का तर्पण करना चाहिए। तिल के दान का भी विशेष महत्व है।

 

पूजन विधि —-
माघ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसमें केले के पत्ते व फल, पंचामृत, सुपारी, पान, तिल, मौली, रोली, कुमकुम, दुर्वा का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही साथ आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर चूरमे का प्रसाद बनाया जाता है और इसका भोग लगता है। सत्यनारायण की कथा के बाद उनका पूजन होता है। इसके बाद देवी लक्ष्मी, महादेव और ब्रह्मा जी की भी आरती की जाती है।

 

विष्णु की कृपा —
माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु स्नान, दान, पूजा-पाठ, यज्ञ आदि करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने वाले पर भगवान विष्णु कि असीम कृपा रहती है। सुख-सौभाग्य, धन-संतान कि प्राप्ति होती है और माघ स्नान पुण्यशाली होता है।

 

कल्पवास होगा समाप्त —
पूरे माघ के महीने में कल्पवास के बाद माघ का अंतिम स्नान पूर्णिमा के दिन ही किया जाता है। इस दिन उपासक हवन आदि कर अपना कल्पवास पूरा करते हैं। इसके बाद वे अपनी साधना का पवित्र प्रसाद लेकर अपने घरों या आश्रमों की ओर प्रस्थान करते हैं। माघ मास को अत्यन्त पवित्र मास माना गया है।

 

प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरी विष्णु जी की जय।

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