धूम कोहरा (धुहासा)

अदरक और लहसुन दोनों ही अस्थमा के इलाज में फायदेमंद होते हैं। अस्थमा की शुरुआती अवस्था में 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबाल कर इस मिश्रण का रोजाना सेवन करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा अदरक की गर्म चाय में लहसुन की दो कलियां मिलाकर सुबह-शाम पीकर भी अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।

pollutionडा. राधेश्याम द्विवेदी
भारतीय साहित्य में कवियों ने इन्द्रधनुष, मेघ, जल ,वायु, वरूण तथा अग्नि आदि विविध प्रकार के वाणों का अति मार्मिक वर्णन व चित्रण किया है। मेघों के जलकणों पर जब सूर्य छितराता हो, तो इंद्रधनुष बन जाता है-
‘सूर्यस्य विविधा वर्णा पवनेन विघट्टीतकरःसाभ्रे
वियति धनुःसंस्थानः ये दृश्यन्ते तदिन्द्र धनुः।’
कालिदास का मेघदूत इसका मूल लक्षणग्रंथ रहा है। उज्जयिनी शहर का विविध प्रकार से वर्णन मिलता है। उड़ते-उमड़ते मेघ केवल ‘मेघदूत’ में पढ़ने को मिलेंगे. उज्जयनी के आसमान पर केवल धूल और धुए का ही राज रहा है. कालिदास के यक्ष ने विकल होकर पूछा था –
‘धूम्रज्योति: सलिलमरुतां सन्निपात: क्व मेघ:’
(धुएं, पानी, धूप और हवा का जमघट बादल कहां.)
कालिदास के मेघों में यही चार अवयव थे. धुआं, पानी, धूप और कुछ हवा. बादल जिनको दूत बनाकर उसने अपनी प्रिया को बिरह-संदेश भेजा था. आसमान धुंध में खो गया है. मेघों से पानी धूप और हवा तिरोहित हो गए. धूल बची है. आसमान काला पड़ गया है. यह अपारदर्शिता जो धूल और धुएं के रूप में उज्जयनी के नभ को घेरे हुए है. धुएं और धुंध की यह अपारदर्शिता ही मेघों की घटक है. पानी, हवा और धूप तो पुराने पड़ गए. यह धुंध हम सबने मिलकर बनाई है. इसमें सबका योगदान है. चूल्हों और चिमनियों का भी. इस प्रभूत धुंध में जो घनीभूत ही हुई जा रही है, एक और बड़ी खोज अपरिहार्य है.
धुहासा का अर्थ:-अत्यधिक धुँए से भरा कुहरा, जो सामान्य रूप से औद्योगिक तथा घने बसे नगरीय क्षेत्रों में पाया जाता है। अंग्रेजी के इस शब्द की रचना दो शब्दों ‘स्तोक’ तथा फॉण को मिला कर की गई है। धुहासा (स्मॉग) शब्द की गहराई में जाकर देखते है तो यह उतनी मुश्किल नहीं है जितना अंदाजा हम इसका अर्थ लेने में रखते है. यह शब्द दो शब्दों Smoke+Fog = स्मॉग (SMOG) के कॉम्बिनेशन से बना है जो है। स्मॉग को धुआंसा या धूम कोहरा कहते हैं। यह वायु प्रदूषण की एक अवस्था है। स्मोक और फॉग को मिलाकर इसे स्मॉग कहा गया। धूल, धुआं और कुहासा का मिश्रित शब्द ही धुआंसा कहलाता है। गाड़ियों और औद्योगिक कारखानों से निकले धुएं में उपस्थित राख, गंधक व अन्य हानिकारक रसायन जब कुहरे के संपर्क में आते हैं, तब धुआंसे के रूप में वायु प्रदूषण जनित अनेक बीमारियों का कारण बन जाते हैं। स्मॉग असल में पानी के कणों और धुंए में उपस्थित कार्बन के कणों के मिश्रित होने से बनता है और यह सर्दी के मौसम में अधिक होता है क्योंकि उस समय कोहरे में पानी के कण हवा में होते है और कार्बन के कण उनमे मिश्रित हो जाते है | जिसकी वजह से पारदर्शी और भी कम हो जाती है. स्मॉग की समस्या उन क्षेत्रो में अधिक होती है जन्हा औद्योगिक काम अधिक होता है और उनकी वजह से जनसंख्या अधिक होता है. शहरो में यह समस्या इसलिए अधिक होती है क्योंकि वंहा पर एक तो फैक्ट्रीज अधिक होती है और वंहा पर पेड़ भी कम संख्या में होते है जो होने वाले प्रदुषण के प्रभाव को कम कर सकते हो. यह पर्यावरण के साथ साथ हम मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है. क्योंकि वंहा प्रदुषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगो को साँस लेने में भी प्रॉब्लम होती है. धुंध को बहुत से लोग दीवाली पर छोड़े गए पटाखों के धुएं का कारण मानने लगे हैं । इसमें ईंट भट्ठे, वाहन व पराली का धुआं भी है, जो कि पटाखों का धुआं मिलने के बाद भारी हो गया। कोहरे के दबाव की वजह से वायुमंडल में घुल नहीं पाया। इससे यह जहरीली धुंध छा गई है। यह स्मॉग इतना घना था कि सूर्य देव आसमान से ही झांकते रहे। इस धुंध या स्मॉग से बच्चों व वृद्धों को परेशानी हो सकती है। सांस लेने में परेशानी होगी। जो फेफड़े संबंधित रोग से पीड़ित हैं, उनकी परेशानी बढ़ सकती है। सिर्फ इंसानों ही नहीं, पशुओं को भी इस धुंध से परेशानी हो सकती है। यह या तो तेज हवा चलने से हटेगा या फिर बारिश हो ।
उत्तरी चीन में भी धुंध:-उत्तरी चीन के अधिकांश हिस्सों में रविवार को भी धुंध रही, हालांकि दृश्यता में कुछ सुधार हुआ है. देश में वायु प्रदूषण के मद्देनजर जारी नारंगी अलर्ट को बरकरार रखा गया है, लेकिन ठंडी हवाएं चलने की वजह से धुंध की चादर धीरे-धीरे हटना शुरू हो जाएगी.राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (एनएमसी) के मुताबिक, बीजिंग-तिआनजिन-हेबेई क्षेत्र और हेनान, शांक्सी, जिलिन, हेलोंगजियांग, लियाओनिंग प्रांतों में शनिवार सुबह सामान्य से भारी धुंध रही . यहां दृश्यता 200 मीटर से कम रही. कम दृश्यता की वजह से बीजिंग अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उड़ान सेवाओं में देरी हुई, जबकि कुछ उड़ान सेवाएं रद्द भी हो गईं. देश में चार रंगस्तरीय मौसम प्रणाली है, जिसमें सर्वाधिक खराब मौसम के लिए लाल, उससे बेहतर के लिए नारंगी फिर पीली और अंत में नीले रंग की चेतावनी प्रणाली है. उत्तर भारत में खतरनाक प्रदूषण:-उत्तरी भारत और विशेषकर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है जिसकी वजह से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कम दृश्यता की वजह से दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उड़ान सेवाओं में देरी हुई, जबकि कुछ उड़ान सेवाएं रद्द भी हो गईं. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात भी की है. नासा अर्थ ऑबज़रवेट्री ने भी उत्तरी भारत की एक तस्वीर जारी की है, जिसमें पंजाब में खरीफ फसल के जलाए जा रहे ठूंठ से उठने वाले धुएं को साफ देखा जा सकता है.नासा ने अपनी वेबसाइट www.earthobservatory.nasa.gov पर इस धुएं के बारे में जानकारी देते हुए लिखा है कि पंजाब से अभी भी जो फसल जल रही है, उसकी वजह से उठने वाला धुआं दक्षिणपूर्व तक पहुंच रहा है जो सैटेलाइट द्वारा दिल्ली की साफ तस्वीर लेने में बाधा बन रहा है. ठूंठ के जलाए जाने के अलावा अन्य शहरी और औद्योगिक तत्वों का भी इस धुंध को बढ़ाने में हाथ है. यह धुआं इंसानों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और यह दिल और फेफड़ों की बीमारी को बढ़ा सकता है. खासतौर पर बुजु़र्ग, बच्चे और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इसके चलते कई दुकानों पर फेसमास्क बड़ी तादाद में खरीदे जा रहे हैं.
दिल्ली के प्रदूषण के प्लान:-दिल्ली के मुख्य्मंत्री ने पिछले कई दिनों से राजधानी में फैले हुए खतरनाक प्रदूषण पर लगाम के लिए अब एक प्लान बनाया है. जिसके तहत कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. रविवार को बुलाई गई आपात बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल ने इस बाबत निर्देश जारी किए. धुंध की वजह से घातक वायु की मोटी परत में लिपटी दिल्ली में सांस लेने में दिक्कत, दमा और एलर्जी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली पिछले 17 सालों में प्रदूषण के सर्वाधिक भयानक दौर से गुजर रही है और इसी के कारण दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह में मास्क की बिक्री बढ़ गयी है. हालात यहां तक हो गए हैं कि मांग के अनुसार मास्क की आपूर्ति कम पड़ रही है.
मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड में जनवरी में आग लगी थी :-मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड में लगी आग का धुंआ अब पूरे दक्षिण मुंबई और पूर्वी उपनगर को अपनी चेपट में ले लिया था । काला धुंआ धीरे धीरे लगातार तीसरे दिन देश की आर्थिक राजधानी पर अपना असर छोड़ लिया था। 27 से 29 जनवरी के बीच की यह तस्वीरें नासा सैटेलाइट से लिया गया था । इन तस्वीरों में यह साफ है कि मुंबई के पूर्वी छोर पर स्थित इस देवनार डंपिंग ग्राउंड (कूड़े के मैदान) में लगी आग न सिर्फ पूरे शहर में बल्कि अरब सागर तक भी पहुंच गई थी । यह आग महाराष्ट्र के राजगढ़ जिले के तटीय इलाकों को भी अपने चपेट में ले चुकी थी । महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी नगर निगम को तुरंत कार्यवाही करने के आदेश दिए। रिपोर्ट के मुताबिक देवनार के रहने वालों पर इस आग का सबसे बुरा असर पड़ा था ।
अस्थमा रोगियों की मुसीबतें:-ठंड का मौसम शुरू होते ही अस्थमा रोगियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं, लेकिन ठंड में प्रदूषण का परिणाम यानी स्मॉग जानलेवा हो सकता है ।ठंड का मौसम शुरू होते ही दमा के रोगियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। लेकिन वर्तमान में दमा रोगियों की मुसीबतें न केवल बढ़ी हैं बल्कि यह जानलेवा भी हो रही हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण ठंड के मौसम में स्मॉग हावी हो जाता है इससे दमा और सांस के मरीजों को सांस लेना दूभर हो जाता है। स्मॉग स्वस्थ आदमी को बीमार कर रहा है तो अस्थाम के रोगी इससे कैसे बच सकते हैं। स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ट्यूब में रुकावट, सूजन, रूखापन या कफ आदि के कारण भी समस्या होती है। आइए इसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं। अस्थमा का अटैक पड़ने से श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को आक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है। वैसे तो अस्थमा का उपचार डॉक्टरी परामर्श से ही करवाना बेहतर होता है, लेकिन अस्थमा को नियंत्रित करने के लिये कुछ कारगर घरेलू उपचार भी हैं। ये उपाय काफी लाभदायक होते हैं।
अदरक और लहसुन:-अदरक और लहसुन दोनों ही अस्थमा के इलाज में फायदेमंद होते हैं। अस्थमा की शुरुआती अवस्था में 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबाल कर इस मिश्रण का रोजाना सेवन करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा अदरक की गर्म चाय में लहसुन की दो कलियां मिलाकर सुबह-शाम पीकर भी अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।
अजवाइन:-आधा कप अजवाइन का रस और इसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर सुबह और शाम भोजन के बाद लेने से अस्थमा नष्ट हो जाता है। अस्थमा से बचाव के लिए अजवाइन के पानी से भाप लेना भी फायदेमंद होता है। इसके लिए पानी में अजवाइन डालकर इसे उबालें और पानी से उठती हुई भाप को लें। इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: