संघ की संस्कृति के विरुद्ध बोले सुदर्शन

अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाने वाले गोविन्दाचार्य से हमने पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन द्वारा की गयी टिप्पणियों के सम्बंध में बातचीत की ,गोविन्दाचार्य का स्पष्ट मानना है कि ऐसी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं था, मगर कांग्रेस के मौजूदा चरित्र को लेकर उनकी अपनी आपत्तियां हैं ,एक राजनीतिज्ञ से ज्यादा विचारक और विश्लेषक के रूप में विख्यात गोविन्दाचार्य से हमने बातचीत की |आइये पूरी बातचीत सुनते हैं |

आवेश – गोविन्द जी ,आप पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन के बयान को किस तरह से देखते हैं ,और आपको क्या लगता है उनके बयान से संघ मजबूत हुआ है या उसको आम जनमानस के बीच कमजोर होना पड़ा है ?

गोविन्दाचार्य -सार्वजानिक जीवन वाले व्यक्ति को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए जैसी सुदर्शन जी ने कही |सोनिया गाँधी के सन्दर्भ में दिया गया बयान सुदर्शन जी के व्यक्तित्व और कद से मेल नहीं खाता और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्कृति से |सुदर्शन जी की टिप्पणी का नतीजा ये हुआ कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों ने हिन्दू आतंकवाद जैसी विचित्र परिभाषाओं से जुड़े जिन मुद्दों पर पूरे देश में धरना दिया था वो सारे मुद्दे कपूर की तरह उड़ गए |जहाँ तक कांग्रेस का सवाल है जब १९६९ में कांग्रेस का विभाजन हुआ था तब से ही कांग्रेस का चरित्र ख़त्म हो गया था ,अब की कांग्रेस और अब के कांग्रेसियों से आप गरिमा और शालीनता की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं |

आवेश -अभी कुछ दिनों पहले राहुल गाँधी का बयान था ,जिसमे उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी संगठन करार दिया था | समकालीन भारतीय राजनीति में आप राहुल गाँधी को कहाँ देखते हैं ?और उनके ऐसे बयानों को कितना प्रासंगिक मानते हैं ?

गोविन्दाचार्य -मै न तो राहुल को और न ही उनके बयानों को महत्त्व देता हूँ |वो अभी अपरिपक्व हैं पहले उन्हें हिंदुस्तान को समझना पड़ेगा ,तब वो किसी पर कुछ टिपण्णी करने के योग्य होंगेभगवा रंग और आतंकवाद के बीच जबरिया गठजोड़ बिठाने की कोशिश शर्मनाक और हास्यास्पद है |शायद राहुल उस वक्त बच्चे रहे होंगे जब भोलानाथ पांडे और देवेन्द्र पांडे ने इन्डियन एरलाईन्स के जहाज को अगवा कर लिया था ,उन लोगों उस वक्त जहाज में सवार १३२ लोगों को जान से मारने की धमकी भी थी ,शायद कांग्रेस की नजर में ये आतंक नहीं था सो दोनों भाइयों को बाद में विधानसभा का टिकट भी दे दिया गया और दोनों जीत कर विधान सभा में पहुँच भी गए |आतंकवाद आर एस एस का चरित्र नहीं है राष्ट्र निर्माण और व्यक्तित्व निर्माण हमारा लक्ष्य है और ये जहाँ ये दोनों चीजें हैं ,वहां आतंकवाद नहीं हो सकता |

आवेश -यूपीए सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं ,आपको क्या लगता है कि कांग्रेस की उपलब्धियों के ग्राफ को ये दाग किस हद तक प्रभावित कर रहे हैं ?

गोविन्दाचार्य -कांग्रेस की उपलब्धियां! आप बताइये मुझे आप उपलब्धियां किन्हें कह रहे हैं ?

आवेश – जैसे नरेगा के रूप में ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया ………

गोविन्दाचार्य -(बात बीच में कांटते हुए )मनरेगा जैसी योजनायें समूचे देश में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी ,गरीब अपनी मजदूरी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं वहीँ योजना में शामिल एजेंसियों के अधिकारी चांदी काट रहे हैं |देखिये कांग्रेस भ्रष्टाचार की वजह से ही जीवित है ,और ये भ्रष्टाचार उस सामूहिक कुंठा का नतीजा है जो किसी भी राजनैतिक दल में परिवारवाद के बोलबाले की वजह से आता है , सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह के पास भ्रष्टाचार की इस मजबूत होती फसल को काटने की नका तो कोई युक्ति है न कोई नियत ,अगर नियत होती तो राजा के मामले में निर्णय लेने में इतना विलम्ब नहीं किया जाता ,जहाँ सत्ता प्रेम है वहां सरोकार ख़त्म हो जाते हैं ,जवाबदेही ख़त्म हो जाती है |

आवेश – सोनिया गाँधी पर पूर्व मे कई लोगों ने के जी बी के साथ सम्बंध होने के आरोप लगाये हैं ,क्वात्रोची को लेकर भी सोनिया तमाम तरह के आरोपों से जूझती रही है क्या कहेंगे आप इस बारे मे?

गोविन्दाचार्य -देखिये ,आरोप ऐसे नहीं लगाये जाते ,अगर आरोप हैं तो जिनके ऊपर आरोप हैं उन्हें जवाब देना चाहिए ,सवालों और जवाबों के दौर को इमानदार व्यक्ति स्वीकार करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा और कम से कम सोनिया जी को ऐसे सवालों का जवाब देने से नहीं भागना चाहिए |देश अब भी बोफोर्स क्वात्रोची और सोनिया कनेक्शन को जानना चाहता है ,अफ़सोस ये है कि न त यूपीए और न ही एनडीए ने इस मामले को परिणामों तक पहुँचाना चाह ,भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांग्रेस के कई अनदेखे और छुपे हुए पन्ने हैं ,अब वक्त आ गया है कि वो सबके सामने आयें |

8 thoughts on “संघ की संस्कृति के विरुद्ध बोले सुदर्शन

  1. प्रणाम देखिये श्रीराम तिवारी जी सच तो सच होता है वो भी राष्ट्र के प्रति तो और मै व्यक्तिगत संबंधो की बात ही नहीं करता लेकिन राष्ट्र के प्रति व्यक्ति का संबंध का तो आकलन होना ही चाहिए व्यक्ति से बढ़ा दल दल से बढ़ा देश होता है और व्यक्ति से बढ़ा से बढ़ा संगठन और संगठन से बढ़ा समाज होता है देश में १२ बारह राज्यों के प्रभारी इसाई है इसाई होना कोई पाप नहीं लेकिन जिस तरीको से वो काम कर रहे है वो ठीक नहीं है ये देश का दुर्भाग्य है की भाजपा ने सोनिया और राजीव गांधी के भ्रष्टाचार की जाँच नहीं कराइ हम लोगो से जादा प्रेम है इनलोगों में अपनी आखो से देखा हु देश को मुर्ख बनाते है ये सब राजनीती में कल बल छल तीनो का प्रयोग हो रहा है एस बार तो ओटिगमशीन से ही काम चल गया इसको मोदी ने दोहरा दिया गुजरती काग्रेस हल्ला मचने लगी फिर सोनिया ने जिले स्तर के कार्यकर्ता को दिल्ली तलब कर लिया कहा चुप रहो पहले से ही यह आरोप हमपर भाजपा लगा रही है जाच हुई तो पहले हम फसेगे आखिर हमारे आपके पैसे का हिसाब कौन लेगा जनता इतनी समझ दार होती तो देश बर्बाद नहीं होता हमें आपको आगे तो आना ही पढ़ेगा जहा जो भी अच्छा है उसे सिखते हुए

  2. कौनसा सच ?कैसा सच ?सभी पुरषों और सभी महिलाओं केअपने सच होते हैं आप किस -किस के सच में दिलचस्पी लेना चाहेंगे ? बंद करो ये गन्दा डर्टी राजनेतिक स्व्र्थान्धता का घटिया खेल .
    यदि सुदर्शन सही भी है और सोनिया जी फिर से लोकतंत्रात्मक तरीके से भरी बहुमत प्राप्त करती हैं तो उन पर आरोप लगाने वालों को चुल्लू भर पानी डूब मरने के लिए नसीब नहीं होगा ……

  3. अच्छा लगा गोविन्दाचार्य जी को सुन कर. धन्यवाद आवेश जी.
    वैसे भारत की जनता के सामने सत्य लाना चाइये. जो सच्चा इतिहास जानते है आने वाले संघर्षो का मुकाबला अच्छे से कर सकते है.

  4. गोविन्दाचार्य कहते हैं:-“देखिये ,आरोप ऐसे नहीं लगाये जाते ,अगर आरोप हैं तो जिनके ऊपर आरोप हैं उन्हें जवाब देना चाहिए ,सवालों और जवाबों के दौर को इमानदार व्यक्ति स्वीकार करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा और कम से कम सोनिया जी को ऐसे सवालों का जवाब देने से नहीं भागना चाहिए |देश अब भी बोफोर्स क्वात्रोची और सोनिया कनेक्शन को जानना चाहता है ,अफ़सोस ये है कि न त यूपीए और न ही एनडीए ने इस मामले को परिणामों तक पहुँचाना चाहिए ,भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांग्रेस के कई अनदेखे और छुपे हुए पन्ने हैं ,अब वक्त आ गया है कि वो सबके सामने आयें |”================================
    सोनिया का छुपाया गया हिस्सा बडा घृणित है। और इटालीका ओर्बासानो का मेयर कहता है, कि इटाली में कोई परदेशी व्यक्ति को ऐसा ऊंचा पद सपने में भी सोचा नहीं जा सकता, जो भारतनें सोनिया को दिया है। सारा वेब साईटों पर उपलब्ध है। “वैजू नरवणे” ने इटाली जा कर छान बिन की थी। सोनिया के गांव जाकर जनतासे साक्षात्कार किए थे। उसक लेख भी है।

  5. आवेश जी;
    आप भी जानते हैं ओर गोविन्दच्र्य जी भी जानते हैं,कि सुदर्शन जी ने अपने जीवन में किसी पर भी निराधार आरोप नहीं लगाये.सुदर्शन जी ने जो आरोप लगाये हैं वे किन्ही सबूतों के आधार पर ही लगाये गए होंगे.

  6. “संघ की संस्कृति के विरुद्ध बोले सुदर्शन” – by – आवेश तिवारी

    गोविन्दाचार्य : “सवालों और जवाबों के दौर को इमानदार व्यक्ति स्वीकार करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा और कम से कम सोनिया जी को ऐसे सवालों का जवाब देने से नहीं भागना चाहिए ”

    सोनिया जी जवाब नहीं देतें हैं.
    जनता को सोनिया जी के सच को जानने में रूचि है, विवेश रूप में सुदर्शन जी के बयाँ के बाद.

    गोविन्दाचार्य जी,

    आप public interest में आगे आयें. जनता को सच जानने में सहायता करें.

    – अनिल सहगल –

  7. आवेश जी ने जो आलेख में नहीं उघडा वो हरपाल ने उघड दिया ….आखिर आप लोग सिर्फ सोनिया के बारे में ही क्यों इतने रूचि ले रहे हैं ?

  8. dekhiye aavesh jee govind jee ne hi soniya gandhee ko pradhan mantri banane se roka tha sare praman kalam ko diya tha 2004 me tab kalam ne soniya se puchha tha
    esaka uttar jigiye soniya chupchap chali aae uske bad govind jee ne dr subramaniyan ko ye kam saupa tha aakhir es satya se parda kab uthayege govind jee puchhane par kahte hai mamala suprem court me hai aap ka lekh achchha laga likhate rahe

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