मार्क्‍सवाद

अशोक वाजपेयी का मार्क्सवाद पर हमला, मार्क्सवादी चुप्‍प !

जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी आलोचना में नव्यउदार पूंजीवादी चारणों के बारे में जब भी सोचता हूँ

भारतीय वामपंथ के पुनर्गठन की एक प्रस्तावना / अरुण माहेश्‍वरी

(”आत्मालोचना क्रियात्मक और निर्मम होनी चाहिए क्योंकि उसकी प्रभावकारिता परिशुद्ध रूप में उसके दयाहीन होने