आखिर कितनी लड़ाईयां और लड़नी पडे़ंगीं जन्मभूमि के लिए ?

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विनोद बंसल हमारे ऋषियों मनीषियों ने माता व मातृभूमि को स्वर्ग के समान संज्ञा देते हुए सर्वोच्च माना है। ’’जननी जन्म भूमिश्च, स्वर्गादपि गरीयसी‘‘ इस वाक्य के आधार पर अनगिनत लोग बिना किसी कष्ट या अवरोधों की परवाह किये, मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योक्षावर कर गये। मातृभूमि का अर्थ उस भू भाग से लगाया… Read more »

अयोध्या पर संतों का निर्णय और हमारा उत्तरदायित्व

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– विनोद बंसल गत 6 अप्रेल को हरिद्वार पूर्ण कुंभ के अवसर पर गंगा तट पर देश भर के वरिष्ठ पूज्य संतों ने जब श्री राम की जन्म भूमि पर बनने वाले भव्य मंदिर हेतु हनूमान चालीसाओं का पाठ करने का निर्णय दिया तो पता नहीं क्यों मेरे मन में एक अनपेक्षित शंका ने जन्म… Read more »

रामजन्मभूमि विवाद, राजनीति के बांझपन का नतीजा ?

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-भरतचंद्र नायक राजनीति को लोकनीति बनाना श्रेष्ठ स्थिति मानी गयी है, लेकिन आजादी के बाद सियासत सकरे दायरे में कैद हुई है, उससे वह बांझ बनकर रह गयी है। राम जन्म भूमि विवाद को पाल पोसकर रखा जाना फिरंगी शासन की बांटो और राज करो की कुशल रणनीति का हिस्सा माना जा सकता था। लेकिन… Read more »

यह आस्था बनाम कानून नहीं, यह कानून द्वारा आस्था का अनुमोदन है

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-लालकृष्‍ण आडवाणी मैंने अपने जीवन के शुरु के बीस वर्ष कराची में बिताए। इस दौरान मैं दो ही भाषाओं को जानता था एक मेरी मातृभाषा सिंधी और दूसरी अंग्रेजी, जिसमें मेरी पढ़ाई हुई। फिल्मों के प्रति मेरे शौक के चलते मैं हिंदी कुछ-कुछ समझ लेता था और टूटी-फूटी बोल भी लेता था लेकिन मैं हिन्दी… Read more »

‘हम राम मंदिर बनाने के बहाने फंडामेंटलिज्म के मार्ग पर चल पड़े हैं’

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बैंच का जब से फैसला आया है। रामभक्त अब लखनऊ बैंच के भक्त हो गए हैं। मैं उन्हें लखनऊभक्त के रूप में ही चिह्नित करूँगा। वे लखनऊ बैंच के जजमेंट को यूनीवर्सल बनाने में लगे हैं। आस्था के सिद्धांत को कानून का सिद्धांत बनाना चाहते हैं। यह लखनवी… Read more »

अयोध्या फैसले के निहितार्थ

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-पवन कुमार अरविंद बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो कतरा ए खून न निकला। ठीक इसी प्रकार 24 सितम्बर को श्रीराम जन्मभूमि के स्वामित्व विवाद मामले में अदालती फैसले के मद्देनजर कई प्रकार की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। इन आशंकाओं में देश भर में हिंसा भड़कना भी शामिल… Read more »

एकर का भरोसा, चोला माटी के राम

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– पंकज झा हालांकि अपने रोजी-रोटी में मशगूल देश को शायद ही 24 सितम्बर के बारे में कोई खास जिज्ञासा हो. ऐसा कोई माहौल दिख भी नहीं रहा है कि आम जन आतुर हों राम जन्मभूमि पर आने वाले फैसले के लिए. राजनीतिक दल भी शायद इस मामले पर फूंक-फूंक कर ही कदम रखना पसंद… Read more »

श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मन्दिर

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समय की मांग है कि संसद कानून बनाए – हृदयनारायण दीक्षित श्रीराम जन्मभूमि के विषय में उच्च न्यायालय के आदेश का देश को बेसब्री से इंतजार है। केन्द्र व राज्य की सरकार ने अतिरिक्त पुलिस बल की चर्चा व अतिरिक्त सावधानी की बातें करके आम जनता में दहशत पैदा की है। भूमि का स्वामित्व विवाद… Read more »

मंदिर-मस्जिद विवाद का अंतिम अध्‍याय

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-धाराराम यादव लगभग 6 दशकों से न्यायपालिका के समक्ष लंबित राम मन्दिर -बाबरी मस्जिद विवाद के सम्बन्ध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय आगामी सितम्बर, 2010 में सम्भावित है। निर्णय की सम्भावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस और गुप्तचर… Read more »

राम कथा युग युग अटल

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-डॉ0 कुलदीप चन्द अग्निहोत्री राम कथा युग युग से अटल चली आ रही है, इसमें कोई संदेह नहीं है। और यह राम कथा केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे ऐशिया में शताब्दियों से लोगों के आदर्श का केन्द्र है। पिछले 5 से 6 दशकों से इस कथा ने युरोप, अमेरिका और आस्ट्र्लिया तक के… Read more »