सारे नेता इमरान से सबक लें

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तौर पर इमरान खान कितने सफल होंगे, यह तो समय बताएगा लेकिन शपथ लेते ही उन्होंने जो काम किया है, वह भारत के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के लिए भी एक मिसाल है। उनके अनुकरण करने लायक है। भारत ही नहीं, लगभग सभी हमारे पड़ौसी देशों के नेताओं को इमरान से सबक सीखना चाहिए। भारत के सभी पड़ौसी देशों के बादशाहों, राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से पिछले 50 साल में मैं कई बार मिला हूं। अत्यंत पिछड़े और गरीब देश के नेताओं को भी मैंने शाही ठाठ-बाट में रहते हुए पाया है। लेकिन इमरान खान ऐसे पहले नेता हैं, जो प्रधानमंत्री निवास के लंबे-चौड़े बंगले को छोड़कर सिर्फ तीन बेडरुम के एक सादे से मकान में रहेंगे। उस मकान में अब तक प्रधानमंत्री के सैनिक-सचिव रहा करते थे। वे अपने बनीगला के मकान में रहना ही पसंद करतें लेकिन उनकी सुरक्षा एजेंसी ने उस स्थान को निरापद नहीं पाया। जिस प्रधानमंत्री निवास को इमरान ने दूर से नमस्कार किया है, उसमें 524 कर्मचारी हैं लेकिन वे सिर्फ दो सहायकों को अपने पास रखेंगे। वहां 80 कारे हैं। वे इस प्रधानमंत्री निवास को एक शोध-विश्वविद्यालय बना देना चाहते हैं। मैं अपने देश के कई राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से इस तरह की सादगी के लिए कह चुका हूं लेकिन उन्होंने अंग्रेजों की नकल पर जनता के सेवकों के निवासों को शाही महलों में बदल लिया है। 7, रेसकोर्स बंगला 50 साल पहले जैसा था, अब वह तीन मूर्ति हाउस से भी ज्यादा फैल गया है। लालबहादुर शास्त्रीजी ने 10, जनपथ की परंपरा डाली थी लेकिन उसे सब भूल गए। सारे विरोधी नेता सत्तारुढ़ नेताओं पर हमला करते रहते हैं, छोटी-छोटी बातों को लेकर लेकिन उनके शाही ठाठ-बाट और अनाप-शनाप खर्चों पर कोई उंगली नहीं उठाता, क्योंकि वे खुद भी इस माले-मुफ्त का मजा लेने के लिए ललचाए रहते हैं। मैं आशा करता हूं कि इमरान अपने इस साहसिक और त्यागमय कदम को सिर्फ एक नौटंकी बनाकर नहीं छोड़ देंगे, जैसे कि आजकल नेता लोग कर रहे हैं बल्कि वे ऐसा आचरण करेंगे कि उनकी यह सादगी पाकिस्तान के संपन्न और सबल वर्गों में एक संक्रामक बीमारी की तरह फैल जाए। यदि पाकिस्तान के ऊंचे फौजी अफसर और मालदार लोग इमरान को अपना आदर्श बना लें तो फिर भ्रष्टाचार पर काबू पाना कठिन नहीं होगा।

2 thoughts on “सारे नेता इमरान से सबक लें

  1. मैं भी यूँ तो आप के विचारों से सहमत हूँ , लेकिन यह भी अभी देखना होगा कि वे इस मिसाल को कब तक कहाँ तक कायम रख सकते हैं। हमारे यहाँ भी एक त्याग पुरुष एक सूबे के मुख्य मंत्री पदासीन हुए थे , उन्होंने भी खुद को आदर्शों के पुतले के रूप में पेश किया था , धीरे धीरे सत्ता के नशे ने उनको ऐसा बना दिया कि वे अब जरा भी भिन्न नजर नहीं आते , हालाँकि उन्होंने वोटों की कमाई इन्हीं आदर्शो के नाम पर की थी
    महा ठगिनी सत्ता का नशा बड़ा अजब है

  2. उसकी महानता के किस्से सुनने हों तो उसकी दो भूतपूर्व बेग़मों से पूछ लें!

Leave a Reply

%d bloggers like this: