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    Homeसाहित्‍यकवितासड़कें हैं , सवार नहीं ….!!

    सड़कें हैं , सवार नहीं ….!!

    तारकेश कुमार ओझा

    बड़ी मारक है , वक्त की मार
    हिंद में मचा यूं हाहाकार
    सड़कें हैं , सवार नहीं
    हरियाली है , गुलज़ार नहीं
    बाजार है , खरीदार नहीं
    गुस्सा है , इजहार नहीं
    सोने वाले सो रहे
    खटने वाले रो रहे
    खुशनसीबों पर सिस्टम मेहरबान
    बाकी भूखों को तो बस ज्ञान पर ज्ञान
    जाने कब खत्म होगा नई सुबह का इंतजार
    बड़ी मारक है वक्त की मार

    तारकेश कुमार ओझा
    तारकेश कुमार ओझाhttps://www.pravakta.com/author/tarkeshkumarojha
    पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ हिंदी पत्रकारों में तारकेश कुमार ओझा का जन्म 25.09.1968 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। हालांकि पहले नाना और बाद में पिता की रेलवे की नौकरी के सिलसिले में शुरू से वे पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर मे स्थायी रूप से बसे रहे। साप्ताहिक संडे मेल समेत अन्य समाचार पत्रों में शौकिया लेखन के बाद 1995 में उन्होंने दैनिक विश्वमित्र से पेशेवर पत्रकारिता की शुरूआत की। कोलकाता से प्रकाशित सांध्य हिंदी दैनिक महानगर तथा जमशदेपुर से प्रकाशित चमकता अाईना व प्रभात खबर को अपनी सेवाएं देने के बाद ओझा पिछले 9 सालों से दैनिक जागरण में उप संपादक के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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