ये कहा आ गये हम…..लडते लडते………

शादाब ज़फ़र शादाब

यह कैसा देश और समाज बना दिया है हमने,जहाँ हम हिंदू हैं या मुसलमान!या तो देशभक्त हैं या देशद्रोही!हमारी पीड़ाएँ तक बाँट दी गई हैं।आठ साल की लड़की से एक देवस्थान में बलात्कार होता है,तो मरी हुई बच्ची के साथ बलात्कार करनेवाला पुलिस का आदमी नहीं रह जाता, तुरंत हिंदू बना दिया जाता है,हमें शर्म नहीं आती कि ऐसा जघन्य काम एक पुलिस वाला कर रहा है और वह भी मंदिर में? दलित या औरत के प्रवेश से तो मंदिर कई बार अपवित्र हो जाते हैं मगर बलात्कार से नहीं।हमें मंदिर की पवित्रता याद नहीं आती,बलात्कारियों का धर्म याद रहता है।सारे बलात्कारियों की पहचान अचानक हिंदू के रूप में की जाने लगती है और आठ साल की बच्ची -जिसे बलात्कार के बाद मार डाला गया- आठ साल की बच्ची नहीं रहती,मुसलमान बना दी जाती है।और बलात्कारियों के पक्ष में तिरंगा

यात्रा निकलने लगती है और वकील बिरादरी आरोप पत्र दाखिल नहीं करने देती।एक विधायक चूँकि भाजपा का है तो पड़ोसी लड़की के साथ उसके द्वारा किया गया बलात्कार, बलात्कार नहीं रह जाता।उसके पिता को पीट पीटकर मारा जाना बड़ी मुश्किल से अपराध की श्रेणी में आ पाता है।कितनी आवाजें उठती हैं उस विधायक के खिलाफ ,हाहाकार मचता है,लड़की बिलख बिलखकर रोती है मगर पुलिस तथा प्रशासन उसका बाल बांका नहीं कर पाता।एक गरीब बंगाल से दो पैसे कमाने राजस्थान आता है।उसकी हत्या एक विकृत दिमाग का ए्क आदमी कर देता है तो उस हत्यारे की झाँकी निकलती है? और एक डाक्टर आक्सीजन सिलेंडर की अस्पताल में दिक्कत हो जाने पर पूरे गोरखपुर घूमकर गैस सिलेंडर लाता है तो वह मुसलमान होने के कारण इस मानवीयता के लिए दंडित किया जाता है।एक ड्राइवर वैष्णो देवी के दर्शन कर लौट रहे तीर्थयात्रियों की जान बस को तेज चलाकर और अपनी जान खतरे में डालकर बचाता है तो वह ड्राइवर और इनसान नहीं रहता, बल्कि मुसलमान बन जाता है और उस पर तरह- तरह की तोहमतें लगाई जाती हैं।और एक मौलवी अपने चौदह साल के बच्चे को सांप्रदायिक हिंसा में गंवाकर भी मुसलमानों से कहता है खबरदार जो किसी को हाथ भी लगाया तो और हमारा दिल हिंदू हो जाता है,जड़ हो जाता है? उस शहर में उस राज्य का राज्यपाल जाता है और वह न उस मौलवी से मिलने जाता है,न उसे शाबाशी देने,उसे हौसला और सांत्वना देने जाता है।वह भी राज्यपाल नहीं रहता,ऐसा हिंदू हो जाता है,जो किसी हिंदू या मुसलमान को होना नहीं चाहिए। हम हिंदू और मुसलमान तो जल्दी हो जाते हैं,वह साधारण इनसान पता नहीं कब फिर से होंगे,जो हम कमोबेश हुआ करते थे। विष्णु नागर तूने क्या इसी हिंदुस्तान में जन्म लिया था? बोल मुर्दे तू ,बोलता क्यों नहीं? माफ करें अगर यह कोरी भावुकता हो तो लेकिन इससे मैं अपने को रोक नहीं सकता। एक और बात।जिनकी दिलचस्पी कांग्रेस -भाजपा या हिंदू मुसलमान करने में हो,वो करे मुझे देश और स्वच्छ समाज की चिन्ता है…भारत की एकता अखडता से प्रेम ,देश के जर्र जर्र से प्यार है….

1 thought on “ये कहा आ गये हम…..लडते लडते………

  1. लेखक ने सही रोग पर अंगुलि निर्देश किया है. एक विचारोत्तेजक आलेख जो सही समय पर चेतावनी दे रहा है.
    हर्षित हूँ कि ऐसी मौलिक सोच के लेखक ही हमें आगे बढा सकते हैं.
    *यह मीडिया ही इस प्रकार की आग में घी डालकर उसे भडकाता है.* और फिर अज्ञानी पाठक बिना गहराई में सोचे, उस पर उथली टिप्पणियाँ भी करते हैं. कुछ तो अश्लील टिप्पणियाँ होती है.
    लॆखक को सादर प्रणाम. (नमन) और धन्यवाद.

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