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    Homeसाहित्‍यकवितासच व झूठ में अन्तर

    सच व झूठ में अन्तर


    सच सच ही रहेगा,एक दिन अवश्य आयेगा।
    झूठ झूठ ही रहेगा,वह कभी भी न आयेगा।।
    झूठ के पैर होते नहीं,वह कभी न चल पायेगा

    लगता हैं समय सच को साबित करने के लिए।
    झूठ लेता है झूठ का सहारा कदम चलने के लिए।
    बोलने पड़ते हैं सौ झूठ,एक झूठ छिपाने के लिए।।

    सच को साक्ष्य की जरूरत नहीं खुद ही एक साक्ष्य है।
    झूठ ढूंढ़ता फिरता है झूठे साक्ष्य जो झूठे साक्ष्य है।
    सच की जीत व झूठ की हार,यह एक सत्य साक्ष्य है।।

    होता है सच में कड़वापन,झूठ में सदा मिठासपन।
    होता है सच में अपनापन,झूठ में न होता अपनापन।
    इसलिए झूठ को ग्रहण करते है, होता है मीठासपन।।

    झूठ बोलना पहली बार,होता है बहुत आसान
    पर झूठ बोलकर इंसान हो जाता हैं परेशान।
    बोलते रहो सच,यही है जिंदगी का फरमान।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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