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ताज़ा समाचार (Latest News)

बांग्लादेश के कप्तान ने टीम इंडिया को लेकर दिया ये बयान

  नई दिल्ली : पाकिस्तान को रौंदने के बाद टीम इंडिया शुक्रवार को सुपर चार के अपने पहले मैच में बांग्लादेश से भिड़ेगा जो किसी...

सर्जिकल स्ट्राइक दिवस मनाना राजनीतिकरण करना हमारा मकसद नहीं : प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली : देश के विश्वविद्यालयों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाये जाने को लेकर उठे विवाद के बीच मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने...

मायावती को नहीं पसंद है कांग्रेस का हाथ

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को टक्कर देने के लिए प्रस्तावित महागठबंधन को झटके पे झटके...

डीडीएलजे को लेकर काजोल ने कही यह बात

मुंबई: अभिनेत्री काजोल का कहना है कि भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की सफलता का श्रेय...

करीना कपूर खान के जन्मदिन पर जाने उनसे अनसुने किस्से

नई दिल्ली: करीना कपूर खान करीना कपूर खान आज पूरे 38 साल की हो गई हैं और आज अपना जन्‍मदिन मना रही हैं. फिल्‍म 'रेफ्यूजी'...

युवक की गोली मारकर हत्या, एक गंभीर रूप से घायल

नई दिल्ली : बिहार के वैशाली जिले के नगर थानाक्षेत्र में शुक्रवार को एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई जबकि एक अन्य...



साहित्य

कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे

कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे कब तक तुम दुल्हनो की मांग के सिन्दूर पुछ्वाते जाओगे उठो जवानो अब तुमको...

अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा

बंद कर दिया है सांपों को सपेरे ने यह कह कर अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा पल्ला झाड़ लेती है पुलिस...

एक गजल कशिश ए मोहब्बत पर

आर के रस्तोगी कशिश ए मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने हुए जो तुमसे दूर तो सब दूरियां मिटाई हमने करीब थे इतने कि...

अखिलता की विकल उड़ानों में !

रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ अखिलता की विकल उड़ानों में, तटस्थित होने की तरन्नुम में; उपस्थित सृष्टा सामने होता, दृष्टि आ जाता कभी ना आता !...

न रख इतना नाजुक दिल

डॉ. रूपेश जैन 'राहत' इश्क़ किया तो फिर न रख इतना नाज़ुक दिल माशूक़ से मिलना नहीं आसां ये राहे मुस्तक़िल तैयार मुसीबत को न कर सकूंगा दिल मुंतकिल क़ुर्बान इस ग़म को तिरि ख़्वाहिश मिरि मंज़िल   मुक़द्दर यूँ सही महबूब तिरि उल्फ़त में बिस्मिल तसव्वुर में तिरा छूना हक़ीक़त में हुआ दाख़िल कोई हद नहीं बेसब्र दिल जो कभी था मुतहम्मिल गले जो लगे अब हिजाब कैसा हो रहा मैं ग़ाफ़िल   तिरे आने से हैं अरमान जवाँ हसरतें हुई कामिल हो रहा बेहाल सँभालो मुझे मिरे हमदम फ़ाज़िल नाशाद न देखूं तुझे कभी तिरे होने से है महफ़िल कैसे जा सकोगे दूर रखता हूँ यादों को मुत्तसिल  

जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां

आर के रस्तोगी   जो चाहा कभी पाया नहीं जो पाया कभी चाहा नहीं जो सोचा कभी मिला नहीं जो मिला कभी पाया नहीं जो...