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ताज़ा समाचार (Latest News)

गंगा की सफाई का गडकरी ने बनाया प्लान, 18,000 करोड़ होंगे खर्च

नई दिल्लीः गंगा को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाने के प्रयासों के तहत सरकार की बड़ी प्राथमिकता सात राज्यों में सीवरेज ढांचा तैयार करने की है।...

मायावती से झटका खाने के बावजूद कांग्रेस के जोश में कोई कमी नहीं

नई दिल्लीः सत्ताधारी बीजेपी छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को बेअसर करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। वहीं,...

मालदीव चुनाव में अब्दुल्ला यामीन की हुई हार, इब्राहिम सोलिह जीते

नई दिल्लीः मालदीव राष्ट्रपति चुनाव परिणाम की सोमवार तड़के हुई घोषणा में विपक्ष के उम्मीदवार इब्राहीम मोहम्मद सोलिह को जीत मिली है। सोलिह को मिली...

त्रिपुरा में मलेरिया से 20 बच्चे और अर्द्धसैनिक बलों के कई जवान अस्पताल में भर्ती

नई दिल्लीः त्रिपुरा में धलाई जिले के गंडाचर्रा उपमंडल में मलेरिया के कारण कम से कम 20 बच्चे और अर्द्धसैनिक बलों के कई जवान अस्पताल...

‘दोस्ती के प्रस्ताव’ को उसकी कमजोरी न समझ , भारतीय नेतृत्व को ‘अहंकार’ त्याग कर करनी चाहिए शांति वार्ता : इमरान

नई दिल्लीः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को कहा कि भारत के साथ इस्लामाबाद के 'दोस्ती के प्रस्ताव' को उसकी कमजोरी नहीं समझा...

कियारा आडवाणी और मुकेश अंबानी की बेटी है बचपन की दोस्त कुछ इस अंदाज़ में ईशा को दी सगाई की बधाई

नई दिल्लीः 21 सितंबर को इटली के लेक कोमो में मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी और आनंद पीरामल की सगाई काफी धूमधाम से हुई।...



साहित्य

एक दिन तो मुस्कुरा ले

राकेश कुमार पटेल एक दिन तो मुस्कुरा ले कब तक याद रखेगा। इस गम को, कभी तो भुला ले एक दिन तो मुस्कुरा ले। देखी...

जिन्दगी की कुछ सच्चाईयां

तू कल की फिकर में ऐ बन्दे ! आज की हंसी बर्बाद न कर हंस मरते हुए भी गाता है मोर नाचते हुए भी रोता...

कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे

कब तक तुम भारत माँ के सपूतो के सिर कटवाते जाओगे कब तक तुम दुल्हनो की मांग के सिन्दूर पुछ्वाते जाओगे उठो जवानो अब तुमको...

अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा

बंद कर दिया है सांपों को सपेरे ने यह कह कर अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आयेगा पल्ला झाड़ लेती है पुलिस...

एक गजल कशिश ए मोहब्बत पर

आर के रस्तोगी कशिश ए मोहब्बत में हर एक चोट खाई हमने हुए जो तुमसे दूर तो सब दूरियां मिटाई हमने करीब थे इतने कि...

अखिलता की विकल उड़ानों में !

रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ अखिलता की विकल उड़ानों में, तटस्थित होने की तरन्नुम में; उपस्थित सृष्टा सामने होता, दृष्टि आ जाता कभी ना आता !...