वाड्रा को जमीन खरीदने के लिए कर्ज देने वाली कंपनी को टैक्स में मिली भारी छूट

नई दिल्लीःकारोबारी रॉबर्ट वाड्रा की जमीन खरीदने वाली कंपनी को जिस फर्म ने लोन दिया उसे टैक्स पैनल ने बड़ी राहत दी है। बताया जा रहा है कि ये राहत करीब 500 करोड़ रुपये की आय पर दी गई है।

बीकानेर में विवादास्पद भूमि लेनदेन के एक मामले की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने आयकर निपटान आयोग से भूषण पावर लिमिटेड एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) से जुड़े सभी विवरण मांगे हैं। यह वही कंपनी है जिसने रॉबर्ड वाड्रा की कंपनी को लागत से सात गुना ज्यादा दाम पर जमीन खरीदने के लिए कर्ज दिया था।

दो महीने पहले उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक रहे करनाल सिंह ने आयोग को पत्र लिखकर उस फाइल के ब्योरे के बारे में पूछा था जिसमें बीपीएसएल मामले पर विचार-विमर्श किया गया था और उस आदेश को सुरक्षित रख लिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निदेशक ने बीएसपीएल को राहत प्रदान करने के आदेश को कमजोर करने के आरोप में पुनर्निर्मित खंडपीठ का ब्योरा देने के लिए भी कहा था।

सूत्रों का कहना है कि यह फॉलो-अप पत्र ईडी के पूर्व पत्र को लेकर किया गया था जिसके जवाब में आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड आग लगने की वजह से नष्ट हो गए हैं। 2011-12 में बीपीएसएल ने दिल्ली बेस्ड एलेजेनी फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड को 5.64 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। रिकॉर्ड्स के अनुसार इस पैसे का इस्तेमाल वाड्रा के स्वामित्व वाली स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने बीकानेर में जमीन खरीदने के लिए किया।

संयोग से इसी अवधि के दौरान दिसंबर 2011 में निपटान आयोग ने एक आदेश जारी किया था। जिसमें उसने इस बात को स्वीकार किया था कि उसने आयकर विभाग के खिलाफ बीपीएसएल के आवेदन को स्वीकार किया था। आयकर विभाग ने बीपीसीएल के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उससे कहा था कि वह 2004-05 से लेकर 2011-12 तक कंपनी के जिन खातों में 800 करोड़ से ज्यादा की राशि हैं उन्हें जोड़े।

अपने फाइनल आदेश में निपटान आयोग ने न केवल बीपीएसएल की आय वृद्धि को 317 करोड़ रुपये करके उसे 500 करोड़ रुपये की राहत पहुंचाई बल्कि उसे अभियोजन पक्ष और दंड से सुरक्षा भी प्रदान की। जब इस बारे में निपटान आयोग के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, ‘इस आदेश को पास हुए पांच साल हो चुके हैं। यह बहुत समय पहले की बात है और मुझे इसके बारे में कुछ याद नहीं है।’ वह उस आयोग के सदस्य थे जिन्होंने फाइनल आदेश पास किया था।

आगे पढ़ें

%d bloggers like this: