सफीदों में लडकियों की शिक्षा का स्तर दयनीय

बेटी बचाओ आंदोलन की शुरूआत हरियाणा के पानीपत जिले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी और उस समय कहा गया था कि लडकियों को इस राज्य में सारी सुविधायें मिलनी चाहिये। वहां मौजूद भाजपा के चहेते व संघ से आये नये सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पूरे मन से इस कार्यक्रम को सफल बनाने का बीडा उठाया था लेकिन सभी दावे उस समय बेमानी हो गये जब इसी घटनास्थल से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित सफीदो कस्बा में यह बयार न पहुंच सकी। वहां की लडकियां पढना चाहती है। इंजीनियर व डाक्टर बनना चाहती है लेकिन उनके पास उच्च शिक्षा के नाम पर बीए व बीकाम के सिवा कुछ नही है।
प्राप्त सूचना के अनुसार इस कस्बे का अपना बडा एतिहासिक महत्व है और कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां सर्पो को जलाने के लिये एक यज्ञ किया गया था जिसके कारण यहां अब तक सर्प नही दिखे । सर्प को मारने व उसके विष से बचाने की विधि इस गांव की परम्पराओं में शुमार रही है। इसी जगह एक इंटर कालेज है जिसके कुछ कमरों में उच्च शिक्षा के नाम पर बीए व बीकाम की कुछ कक्षायें चलती है। जिसे चार स्थायी अध्यापक चलाते है और कुछ अस्थायी अध्यापकों ने अपने ही गांव की लडकियों को पढाने का जिम्मा ले रखा है। वह कभी कभी स्वयं सेवा भी कर देेते है। ताकि गांव की लडकियां अशिक्षित न रह जाये।
इस जगह की दिक्कतों की बात करें तो कोई मुख्य मंत्री इस कस्बा में जाने की इच्छा नही रखता , विधायक के चुनाव में इसलिये इस बार निर्दलीय प्रत्याशी जगदीश देशवाल को यहां के लोगों ने जिताया और उन्होने भाजपा की सरकार को समर्थन दे दिया। लेकिन इस कस्बे तक वह ंशिक्षा , पानी , यातायात व बिजली जैसे सुविधायें नही दिला पाये । यहां तक कि मुख्य बाजार से जोड भी नही पाये। शिक्षा की हालत इतनी खराब है कि सरकार ने एक मात्र डिग्री कालेज खोल रखा है जो कि इंटर कालेज प्रांगण में संयुक्त रूप् से 2011 से चल रहा है। बिल्डिग जर्जर है किसी भी समय गिर सकती है और कुछ भी हो सकता है लेकिन नयी बिल्डिग होने के बाबजूद उसे स्थानान्तिरित किया जा रहा है । कहा जा रहा है कि बिजली नही है इसलिये अभी उसे स्थानान्तिरित नही किया जा सकता।
क्या यही व्यवस्था है सफीदों मे लडकियों के शिक्षा की , इस पर न तो इंडियन नेशनल लोकदल बोल रहा है और न ही कांग्रेस के आका जो कि इसके जिम्मेदार है। खट्टर सरकार को आक्षेप इसलिये अभी नही लगाया जा सकता कि हो सकता है उन्हें गुमराह किया जा रहा हो । बहुत से शासन में बैठे अधिकारी इस मामले को सरकार तक नही पहुंचने देना चाहते , किन्तु लोगों का कहना है कि किसी बडी घटना के इन्तजार में है इसलिये मामला दबा है। लोगों का कहना है कि इस कालेज में लगभग एक हजार से ज्यादा लडकियां पढती है किन्तु सरकार का ध्यान उनकी ओर नही है। विकास शून्य है आखिर कैसी नीति है जो कहती तो बहुत कुछ है परंतु करती कुछ नही ।
क्षेत्रीय नागरिको ने तत्काल राजकीय महिला डिग्री कालेज को इंटर कालेज के पुराने खंडहर से निकाल कर नये बिल्डिंग में स्थानान्तिरित करने व बीए, बीकाम के अलावा और भी विषय जैसे बीएससी , बीसीए , बीबीए आदि भी चालू करने की मांग की है ताकि सफीदों की लडकियां भी देश के तरक्की में अपना अंशदान दे सके। DSC_1050

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