‘‘यूपी से बाहर के मेडिकल विद्यार्थियों के साथ भेदभाव के आरोपों की जांच करे राज्य सरकार’’
‘‘यूपी से बाहर के मेडिकल विद्यार्थियों के साथ भेदभाव के आरोपों की जांच करे राज्य सरकार’’

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूसरे राज्यों के मेडिकल विद्यार्थियों को काउंसिलिंग सत्रों में शामिल होने से कथित तौर पर रोके जाने की जांच कराई जाए ।

यह आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति अरण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा जिन्होंने इस तरह का ‘निर्देश’ जारी किया था। यह भारतीय चिकित्सा परिषद् के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

यह आदेश राम दिवाकर एवं अन्य के द्वारा दायर एक याचिका पर कल पारित किया गया। मुख्य सचिव को सुनवाई की अगली तारीख 23 मई को इस मामले पर की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के महानिदेशक :चिकित्सा स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण: ने 10 मार्च 2017 की तिथि को जारी एक सरकारी आदेश के आधार पर 31 मार्च को एक सकरुलर जारी किया था जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इन याचिकाकर्ताओं का यह भी आरोप है कि नीट परीक्षा में बीएचयू और एएमयू के विद्यार्थियों को तरजीह दी जा रही है और अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

( Source – PTI )

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