उच्चतम न्यायालय ने संघ लोक सेवा आयोग की 2017 की प्रारंभिक परीक्षा में कथित गलत प्रश्नों को हटाने या कृपांक देने के लिये दायर याचिका आज खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति अमिताव राय और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुये कहा कि उसे इसमे कोई मेरिट नजर नहीं आती है।

पीठ ने याचिका खारिज करते हुये इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि इस परीक्षा में शामिल याचिकाकर्ता ने एक प्रश्न के कई सही जवाब होने का दावा करते हुये आयोग को कोई प्रतिवेदन नहीं दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विज ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे घोषित किये जा चुके हैं परंतु आयोग इनके जवाब समूची प्रक्रिया (मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार) पूरी होने के बाद प्रकाशित करेगा। उन्होंने कहा कि एक प्रश्न के कई सही जवाब थे।

पीठ ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग की अखिल भारतीय सिविल सेवाओं की उच्चतम स्तर की परीक्षा होती है और इसमें शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शोधार्थियों के दृष्टिकोण की बजाये पुस्तकों पर भरोसा करें।

आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने कहा कि हालांकि 35 अभ्यर्थियों ने आयोग को प्रतिवेदन दिया है लेकिन याचिकाकर्ता अभ्यर्थी ने ऐसा कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आयोग को प्रश्न पत्र में ऐसी कोई अस्पष्टता नहीं मिली है और इसलिए उन प्रतिवेदनों को अस्वीकार कर दिया गया है।

( Source – PTI )

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