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उच्चतम न्यायालय को निर्णय करना है कि तीन तलाक असंवैधानिक है अथवा नहीं : अटार्नी जनरल

उच्चतम न्यायालय को निर्णय करना है कि तीन तलाक असंवैधानिक है अथवा नहीं : अटार्नी जनरल

तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है लेकिन ‘‘गंेद अब उच्चतम न्यायालय के पाले’’ में है। अटॉर्नी जनरल :एजी: मुकुल रोहतगी ने कहा है कि अब न्यायालय को इस प्रथा की संवैधानिक वैधता पर निर्णय करना है।

रोहतगी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड :एआईएमपीएलबी: के हालिया हलफनामे को ‘‘छलावा’’ बताया। एमआईएमपीएलबी ने हलफनामे में कहा था कि जो लोग तीन तलाक की प्रथा को अमल में लाएंगे उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले संसद ऐसे कानून ला चुकी है जिसमें छुआछूत और सती जैसी असंवैधानिक प्रथाओं से छुटकारा पाया गया है।

रोहतगी ने पीटीआई से कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और पहले भी वह ऐसा कर चुकी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस प्रथा को अवैध करार देने के लिये न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करे। उन्होंने कहा कि गेंद अब न्यायालय के पाले में है और उसे ही निर्णय करना है।

अटॉर्नी जनरल का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने छह दिनों तक सुनवाई के बाद तीन तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रोहतगी ने कहा कि हलफनामा ‘‘अदालत का ध्यान बंटाने के लिए एक हताशा भरा प्रयास है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि ‘काजियों’ को सलाह जारी कर बताया जाएगा कि दूल्हों से कहें कि वे तलाक की इस प्रथा को नहीं अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मुस्लिम संस्था का प्रयास अपने समुदाय में इसके लिये एक कानूनी शुचिता प्राप्त करने का प्रयास है।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष इस मामले में सुनवाई के दौरान रोहतगी ने कहा था कि यदि तीन तलाक सहित सभी तरह के विवाह विच्छेद के तरीकों को निरस्त किया जाता है तो मुस्लिम समुदाय में विवाह और विवाह विच्छेद के मामलों को नियंत्रित करने के लिये एक नया कानून लाया जायेगा।

( Source – PTI )

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