असफलता पर निराशा नही

अनिल अनूप

 देशभर में 10वीं और 12वींकी परीक्षाएं शुरू होने से पहले दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में करीब 2000 बच्चों तथा अध्यापकों और अभिभावकों से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रश्न और उत्तर की शैली में हुए कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भूल जाइए कि आप किसी प्रधानमंत्री के साथ बात कर रहे हैं। मैं आपके परिवार का ही एक सदस्य हूं। उन्होंने नीरज की मशहूर कविता के जरिये छात्रों को असफल होने पर निराश नहीं होने की नसीहत भी दी। इस दौरान उन्होंने बच्चों से जीवन और सपनों पर भी बात की। अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों की प्रेरणा व प्रोत्साहन के वाहक बनें। हर बच्चे की अपनी क्षमता व ताकत होती है। 60 प्रतिशत अंक लाने वाले को प्रोत्साहित करेंगे तो वह 70 या 80 प्रतिशत की ओर बढ़ेगा। 90 प्रतिशत अंक न लाने पर डांटेंगे तो वह हतोत्साहित होगा। उसका ग्रेड 40 प्रतिशत पर आ जाएगा। एक छात्र ने अपेक्षाओं से जुड़ा सवाल किया, तो उन्होंने लोस चुनाव परीक्षा को लेकर भी जवाब दिया कि लोगों को विश्वास है मोदी उम्मीदों को पूरा करेंगे। अपेक्षाओं के बोझ से दबना नहीं चाहिए, उसे पूरा करने के लिए तैयार होना चाहिए। सबसे रोचक सवाल एक मां ने पूछा कि बच्चा ऑनलाइन गेम की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहा है। चाहकर भी इससे दूर नहीं हो पा रहा है। मोदी ने चुटीले अंदाज में कहा, पबजी वाला तो नहीं है। इस पर खूब ठहाके लगे। मोदी ने सलाह दी बच्चों को तकनीक से जुड़ी जानकारियां दें ताकि रुझान तकनीक के सही पहलू की ओर जाए। खेल के मैदान से जोडऩे के लिए कविता सुनाई और कहा, कुछ खिलौनों के टूटने से बचपन नहीं मरा करता।
प्रधानमंत्री मोदी ने जहां बच्चो को तनावमुक्त होकर परीक्षाएं देने के लिए कहा वहीं समय के प्रबंध का जीवन में कितना महत्त्व है उस बारे भी चर्चा की। मुख्य तौर पर मोदी ने बच्चों को यह सुझाव दिए- • बच्चे की तुलना दूसरे से न करें वह निराश होंगे। बच्चे को प्रोत्साहन दें। • शिक्षा प्रणाली ‘रैंक  आधारित नहीं बल्कि उसके पीछे भागने वाली बन गई है। रैंक पर फोकस की बजाए फ्री रहें। • परिजन व शिक्षक बच्चों को आसपास की चीजों से सीखने पर जोर दें। • शिक्षा परीक्षा तक सीमित न रहे। जीवन के विभिन्न आयामों व चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम बने। • चुनौतियां निखरती हैं। चुनौती नहीं होगी तो लापरवाह बन जाएंगे। • अपने पुराने रिकॉर्ड से अपनी तुलना कीजिए, अपना प्रतिस्पर्धी खुद बनिए। • यदि आप अपने खुद के रिकॉर्ड तोड़ेंगे तो कभी असफल नहीं रहेंगे। • परीक्षाएं जीवन में अहम हैं, लेकिन इनसे तनाव में नहीं आना चाहिए। • खुद से पूछें, किसी खास कक्षा की परीक्षा जीवन की परीक्षा है? उत्तर मिलते ही तनाव घटेगा। • जीवन के लक्ष्य ऊंचे रखें, उन्हें हासिल करने को बोझ मत मानिए। • लक्ष्यों को चरणबद्ध ढंग से हासिल करें। छोटी पायदान से बड़ी पर चढि़ए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवाओं को दिए सुझाव जिन्दगी से सीधे-सीधे जुड़े हैं। विद्यार्थी का वर्तमान और भविष्य संवारने में शिक्षक व मां-बाप दोनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन जब मां-बाप व शिक्षक बच्चों को कुछ वह करने के लिए दबाव डालते हैं जिसमें बच्चे की रुचि नहीं होती तब बच्चे का वर्तमान और भविष्य दोनों धूमिल होने लगता है। दबाव का सिलसिला जब लम्बा हो जाता है तब बच्चा निराशा के भंवर में फंस जाता है और तब परिवार, समाज दोनों को परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
बच्चे तो फूल की तरह होते हैं और बाग में हर फूल की अपनी पहचान और महक होती है। लेकिन जब हम गंदे से गुलाब की महक और गुलाब की महक का किसी और से मुकाबला करने लगते हैं तो फिर हम किसी भी फूल की महक का आनंद नहीं ले सकते। अपने बच्चे की किसी दूसरे बच्चे से तुलना चाहे वह भाई ही क्यों न हो करने लगते हैं तो टकराव व तनाव की स्थिति बनने लगती है। जिसका असर परिवार व समाज दोनों पर पड़ता है। समय की मांग यही है कि भविष्य को लेकर बच्चों में तनाव व टकराव की स्थिति अभिभावक व शिक्षक न बनाएं। बच्चे के विकास के लिए वह तनावमुक्त वातावरण, परिवार और स्कूल में बनाएं जिससे उसको अपने आप को विकसित करने का पूरा-पूरा अवसर मिल सके।
बच्चे हमारे आने वाले कल की नींव है और नींव जितनी मजबूत होगी उतना ही हमारा आने वाला कल मजबूत होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए सुझावों को बच्चों सहित शिक्षकों व अभिभावकों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

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