इंटरनेट से जुड़ेगा गाँव, केंद्र 70,000 करोड़ करेगी खर्च

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नई दिल्ली,। देशभर के गांवों को उच्च गति के इंटरनेट ग्रिड से जोडने के लिये परिव्यय को दोगुना कर 70,000 करोड़ रूपये खर्च करने पर विचार कर रही है। केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्येगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी।उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने इस परियोजना के लिये एक समिति का गठन किया था जिसने अपनी सिफारिश में परियोजना में बदलाव करके नेशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क के लिये आबंटन को बढ़ाने की सिफारिश की थी। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र इसके बजट आबंटन में वृद्धि करने के प्रस्ताव का मंजूरी दे देगें । इस परियोजना को महत्वाकांक्षी बताते हुये प्रसाद ने कहा, हमने 30 साल के भीतर 10 लाख किलोमीटर फाइबर बिछाया था और अब हम तीन साल में 70 लाख किलोमीटर में फाइबर को बिछायेंगें । उन्होंने कहा कि परिव्यय में वृद्धि से ब्राडबैंड नेटवर्क को रोल आउट करने में मदद मिलेगी जिससे ढ़ाई लाख गांव इंटरनेट की सुविधा से जुड़ जायेगें और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र के 18 अरब डालर के डिजिटल इंडिया पहल का केन्द्र है। अधिक परिव्यय से स्टरलाइट टेक्नॉलाजी लिमिटेड और अक्ष ऑप्टिफाइबर लिमिटेड सहित अन्य प्रमुख कंपनियों के अलावा स्थानीय आॅप्टिकल फाइबर आपूर्तिकत्र्ताओं को अपनी क्षमताओं का विस्तार करने का मौका मिलेगा ।इससे पहले सरकार ने ब्राडबैंड ग्रिड के लिये 36,000 करोड़ रूपये का बजटीय आबंटन किया था और यह अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रहा है और इस परियोजना को 2013 तक पूरा किया जाना था। 70,000 करोड़ रूपये में वह राशि भी शामिल है जो परियोजना पर पहले ही व्यय हो चुकी हैं। दूरसंचार विभाग के सचिव राकेश गर्ग ने पिछले महीने कहा था कि भारत ब्राडबैंड नेटवर्क का निर्माण करने में निजी कंपनियों को भी अनुमति देने पर विचार कर रहा है। प्रसाद ने उन कंपनियों का नाम नहीं बताया जिन्हे परियोजना में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। विश्व में इंटरनेट का इस्तेमाल न करने वाली सबसे अधिक आबादी करीब एक करोड 10 लाख भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। मैकिंसे एण्ड कंपनी ने अपनी पिछले साल यह अनुमान लगाया था।

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