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bjp-national-vice-president-and-prabhari-in-108821असम में भाजपा अपना जमीन तलाश रही
गुवाहाटी,। भारतीय जनता पार्टी मुस्लिम विरोधी छवि को दूर करने के प्रयास में जुटी हुई है। असम प्रदेश भाजपा 2016 के विधानसभा चुनाव में एक दर्जन से अधिक सीटों पर मुसलमान उम्मीदवारों को उतारने की योजना पर काम कर रही है।असम की सत्ता पर काबिज होन के लिए पार्टी के रणनीतिकारों की सोच है कि एआईयूडीएफ के बढ़ते जनाधार को अगर रोकना है तो ऐसी 18 से 20 सीटों पर मुसलमान उम्मीदवारों को उतारना होगा, जो सीटें एआईयूडीएफ के कब्जे में हैं। भाजपा यहां पर स्थानीय मुसलमान बनाम बंगाली मुसलमान के मुद्द को आगे बढ़ाना चाहती है। पार्टी के नेताओं के अनुसार विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा ताकि इस वर्ग के मतदाताओं के वोट को पार्टी की ओर मोड़ा जा सके। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने चुनाव के लिए जो खासा तैयार किया है उसमें छह से 12 सीटों को चिह्नित कर यह दिखाया गा है कि इन सीटों पर मुसलमन उम्मीदवारों को उतारने से विरोधी दलों को नुकसान होगा।आगामी 14 जुलाई को राज्य के दौरे पर आ रहे पार्टी के प्रमुख अमित शाह के सामने इस रणनीति को पेश किया जाएगा कि किन सीटों पर एआईयूडीएफ मजबूत है और इस पार्टी को रोकने के लिए किस तरह की रणनीति की जरूरत है। दरअसल पार्टी को इस बात का डर है कि एआईयूडीएफ 25 से अधिक सीट पर जीतने में कामयाम हो जाता है तो फिर कांग्रेस और एआईयूडीएफ भाजपा को रोकने के लिए दूर नहीं बैठेंगे। ऐसे में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती सत्ताधारी दल कांग्रेस नहीं, बल्कि एआईयूडीएफ है।
पार्टी संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मतदाताओं में नाराजगी चल रही है। लेकिन मुसलमान मतदाताओं के बीच एआईयूडीएफ का पैठ बना हुआ है और यदि यह पार्टी 25 से 30 सीट लाने में कामयाब हो जाती है तो भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी स्थानीय मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने की कवायद शुरू कर चुकी है। सदस्यता अभियान के दौरान पार्टी ने तीन लाख से अधिक अल्पसंख्यकों को सदस्य बनाया है और स्थानीय मुसलमानों के संगठनों से लगातार बातचीत की जा रही है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों राज्य के दौरे पर आए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अब्दुल रसीद अंसारी ने राज्य के सात संगठनों से बातचीत की थी और सभी संगटनों के नेताओं ने स्थानीय मुसलमानों को सुरक्षित बनाए रखने की गारंटी देते हुए भाजपा का साथ देने का भरोसा दिया था।

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