Homeदिल्लीदलित चिंतन - एक सकारात्मक पहल

दलित चिंतन – एक सकारात्मक पहल

(राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता की दृष्टि से )

प्रेरक संवाद
17 अगस्त, 2019 ( शनिवार )

इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली प्रांत द्वारा दलित चिंतन – एक सकारात्मक पहल ( राष्ट्रीय एवं
सामाजिक एकता की दृष्टि से ) विषय पर प्रेरक संवाद का आयोजन नई दिल्ली में किया गया ।
प्रेरक संवाद का शुभारंभ भारत माता एवं माँ सरस्वती की मंगल वंदना के द्वारा किया गया ।
अतिथि परिचय के पश्चात श्री विनोद शर्मा ‘विवेक’ ( संयोजक, ई.अ.केन्द्र) के द्वारा इन्द्रप्रस्थ
अध्ययन केन्द्र द्वारा किए जाने वाले कार्यों एवं प्रस्तुत पुस्तक ‘अनुसूचित जाति ‘दलित’ – एक
ओर वार्ता’ की मूल भावना के विषय में बताया गया। प्रस्तुत पुस्तक का विमोचन प्रेरक संवाद के
अध्यक्ष श्री अमर शंकर साबले ( संसद सदस्य, राज्यसभा), मुख्य वक्ता श्री भिकू रामजी इदाते
‘दादा’ (अध्यक्ष, विमुक्त, घुमन्तु, एवं अर्धघुमन्तु समुदाय विकास एवं कल्याण बोर्ड) व श्री अजेय
कुमार जी (शि. बौ. प्र., उत्तर क्षेत्र, RSS) के कर कमलों द्वारा किया गया ।

प्रेरक संवाद के अध्यक्ष श्री अमर शंकर साबले ( संसद सदस्य, राज्यसभा) ने इन्द्रप्रस्थ
अध्ययन केन्द्र द्वारा समाज में निरन्तर किए जाने वाले प्रबोधन की सराहना करते हुए कहा कि
अध्ययन मानव जीवन व समाज का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र अध्ययन
को लक्ष्य बनाकर समाज में जागृति लाने का कार्य कर रहा है। उन्होने ‘दलित चिंतन एवं
राजनीति’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज को तोडने वाले षडयन्त्रकारियों के
संभ्रम में फ़ंसकर ‘दलित’ राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं । समरस समाज बनाने के लिए
उन्होने कहा कि समाज के सभी वर्गों को अपनी मानसिकता भी बदलनी होगी तभी समरस
समाज का निर्माण होगा ।
तदनन्तर प्रेरक संवाद के मुख्य वक्ता श्री भिकू रामजी इदाते ‘दादा’ (अध्यक्ष, विमुक्त, घुमन्तु,
एवं अर्धघुमन्तु समुदाय विकास एवं कल्याण बोर्ड) ने ‘दलित चिंतन – राष्ट्रीय एवं सामाजिक
एकता की दृष्टि से’ विषय पर अपने विचार बुद्धिजीवियों समक्ष रखे । उन्होने बताया कि भारत
में एक ही जाति है, एक ही वर्ण है- वह है हिन्दू । सभी हिन्दू एक हैं और समान हैं ।

हिन्दवः सोदराः सर्वे न हिन्दू पतितो भवेत्
मम दीक्षा हिन्दू रक्षा मम मन्त्र समानता ॥

उन्होने अपने वक्तव्य में बाबा साहेब अम्बेडकर और डॉ. हेडगेवार की शिक्षाओं पर सभी
का ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा कि समरस समाज तभी होगा जब समाज में सभी के प्रति
समत्व और ममत्व की भावना विकसित होगी । हमें बाबा साहेब और डॉ. हेडगेवार जी के
विचारों का अनुसरण करते हुए ही समरस समाज का निर्मांण करना होगा। दादा इदाते ने
समाज में चल रहे समरसता के सकारात्मक परिवर्तनों से भी सभी को अवगत कराया ।
मुख्यवक्ता उद्बोधन के पश्चात प्रश्नोत्तर एवं जिज्ञासा समाधान का भी सत्र रहा । प्रेरक
संवाद का धन्यवाद ज्ञापन श्री विकास शर्मा ( सदस्य, ई.अ.के.) द्वारा दिया गया । अंत में राम
(छात्र, श्री वेंकटेश्वर महाविद्यालय) द्वारा वंदे मातरम् किया गया । प्रेरक संवाद का मंच
संचालन डॉ. मनीषा तनेजा ( सहायक प्राध्यापिका, DIET ) द्वारा किया गया । प्रेरक संवाद में
श्री रोशन जी, श्री इन्द्रजीत जी (प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, दिल्ली प्रांत), विभिन्न
विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी, शिक्षक सहित अन्य समाज से लगभग 155 प्रबुद्ध जन
उपस्थित रहे ।

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