45 वीं पुण्यतिथि पर मोहम्मद रफी साहेब को श्रद्धा सुमन अर्पित किए, सुरों के बेताज बादशाह थे स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहबः शिक्षाविद् दयानंद वत्स
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नेशनल मीडिया नेटवर्क फिल्म एंड टीवी फाउंडेशन नई दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री शिक्षाविद् दयानन्द वत्स ने आज संघ के मुख्यालय बरवाला में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहेब की 45 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें उनके करोड़ों प्रशंसकों की और से अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।वत्स ने कहा कि रफी साहेब सुरों के बेताज बादशाह थे, हैं, और हमेशा रहेंगे। रफी साहेब अपनी सुरमयी आवाज के रुप में हमेशा अमर रहेंगे। संगीतकार नौशाद के संगीत निर्देशन में 1946 में फिल्म अनमोल घडी में रफी साहेब का गाए गये गीत तेरा खिलौना टूटा के बाद उन्होनें कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। उसके बाद रफी ने शहीद, मेला, दुलारी, बैजू बावरा फिल्मों में अपनी आवाज का जादू जगा दिया। संगीतकार नौशाद के साथ ही रफी साहेब ने एस.डी. बर्मन, ओ.पी नैयर, रवि, मदनमोहन, गुलाम हैदर, जयदेव, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल, कल्याण जी- आनंद जी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ एक लंबी पारी खेली ओर हजारों सुपर डुपर गीत गाए। उनकी सुरीली आवाज को अपनी फिल्मों में इस्तेमाल करने वाले फिल्म अभिनेताओं में भारत के पहले सुपर स्टार अशोककुमार, उनके भाई किशोरकुमार जो खुद भी एक विलक्षण गायक थे, ट्रैजेडी किंग दिलीपकमार, रोमांटिक हीरो देवानंद, भारतभूषण, शम्मीकपूर, शशिकपूर, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, जीतेंद्र, जॉय मुखर्जी जैसी हस्तियां शामिल रहीं। जिस भी फिल्म में रफी के गाए गये गीत होते थे उस फिल्म की सफलता की गारंटी पक्की होती थीं। संगीतकार रवि के संगीत निर्देशन में सजी गुरुदत्त की चौदहवीं का चांद के गीत चौहदवीं का चांद हो या आफताब हो के गीत के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला। उसके बाद रवि के साथ ही रफी साहेब ने घराना, काजल, नीलकमल, दो बदन में सुपर हिट गीत गाए।
शिक्षाविद् दयानंद वत्स