जैव विविधता भारत की धरोहर है

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प्रमोद भार्गव जिस तरह से आज पूरी दुनिया वैश्विक प्रदूषण से जूझ रही है और कृषि  क्षेत्र में उत्पादन का संकट बढ़ रहा है, उस परिप्रेक्ष्य में जैव विविधता का महत्व बढ़ गया है। लिहाजा हमें जहां जैव कृषि  सरंक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है, वहीं जो प्रजातियां बची हुई हैं, उनके भी सरंक्षण… Read more »

पानी समाप्त होने के कारण और भी हैं

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वैद्य राजेश कपूर जिस प्रकार पृथ्वी पर लगभग 68 से 70  प्रतिशत जल है, ठीक उसी प्रकार हमारे शरीर में भी 68 % से 70% तक जल है। पानी और स्वास्थ्य पानी की गुणवत्ता पर बहुत अधिक यह निर्भर करता है कि हमारा स्वास्थ्य कैसा होगा। हम जैसा पानी पीयेंगे वैसा हमारा स्वास्थ्य होगा। उसका… Read more »

वाह कोलकाता. आह कोलकाता .!!

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तारकेश कुमार ओझा देश की संस्कारधानी कोलकाता पर गर्व करने लायक चीजों में शामिल है फुटपाथ पर मिलने वाला इसका बेहद सस्ता खाना। बचपन से यह आश्चर्यजनक अनुभव हासिल करने का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है । देश के दूसरे महानगरों के विपरीत यहां आप चाय – पानी लायक पैसों में खिचड़ी से लेकर… Read more »

*प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान*

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*डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’* पुस्तक सर्वदा बहुत अच्छी मित्र होती है, इसके पीछे एक कारण यह है कि पुस्तक ही किसी सृजक के उपलब्ध ज्ञान का निष्कर्ष होती है। जब तक लेखक किसी विषय को गहनता से अध्ययन नहीं कर लेता उस पर लेखन उसके लिए संभव नहीं है और गहराई से ग्रहण किए ज्ञान का… Read more »

हिंदी के नाम पर पाखंड

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक ताजा खबर यह है कि विश्व हिंदी सम्मेलन का 11 वां अधिवेशन अब मोरिशस में होगा। मोरिशस की शिक्षा मंत्री लीलादेवी दोखुन ने सम्मेलन की वेबसाइट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘आज हिंदी की हालत पानी में जूझते हुए जहाज की तरह हो गई है।’ अच्छा हुआ कि… Read more »

मैं ककहरा सीख रहा था, वो प्रिंसीपल थे..

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मनोज कुमार मैं उन दिनों पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. और कहना ना होगा कि रमेशजी इस स्कूल के प्रिंसीपल हो चले थे. यह बात आजकल की नहीं बल्कि 30 बरस पुरानी है. बात है साल 87 की. मई के आखिरी हफ्ते के दिन थे. मैं रायपुर से भोपाल पीटीआई एवं देशबन्धु के संयुक्त… Read more »

अप्रासंगिक शिक्षक

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सुमनजी का फोन आया था । हमलोग डीएवी कॉलेज, सीवान के वनस्पति शास्त्र विभाग में सहकर्मी थे। मुझे सेवानिवृत्त हुए तेइस साल बीत गए हैं। सुमनजी भी प्रायः दस साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। सुमनजी ने बताया कि अपने विभाग के सभी सहकर्मी सेवानिवृत्त हो गए हैं और नई नियुक्ति नहीं हुई है। नतीजा है… Read more »

किशोरी अमोनकर के शास्त्रीय संगीत में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती थी

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(86वें जन्मदिवस 10 अप्रैल 2018 पर विशेष आलेख) किशोरी अमोनकर एक भारतीय शास्त्रीय गायक थीं। जिन्होंने अपने शास्त्रीय संगीत के बल पर दशकों तक हिन्दुस्तान के संगीत प्रेमियों के दिल में अपनी जगह बनाये रखी। किशोरी अमोनकर का जन्म 10 अप्रैल 1932 को मुंबई में हुआ था। किशोरी अमोनकर को हिंदुस्तानी परंपरा के अग्रणी गायकों… Read more »

बदकिस्मती से आज भी प्रासंगिक है चंपारण सत्याग्रह

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यह हमारा दुर्भाग्य है कि चंपारण सत्याग्रह  एक शताब्दी बाद भी अपनी प्रत्येक वर्षगाँठ पर पहले से अधिक प्रासंगिक होता जा रहा है। चंपारण सत्याग्रह नील की खेती करने वाले किसानों के अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष के रूप में विख्यात है। इसके एक सदी बाद भी देश का किसान आज बदहाल है। 2010-11 के… Read more »

आखिर कब तक यूँ ही बंद होता रहेगा भारत ?

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस.सी.-एसटी एक्ट में बदलाब के विरोध मंे जनता का एक वर्ग आक्रोशित हो रहा है। दलितों के सवाल पर राजनीतिक दल रोटियाँ सेकनें में जुट गये हैं। वर्ग विशेष उग्र आंदोलन कर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम में नया दिशा-निर्देश जारी किया है। दलितों के उत्पीड़न… Read more »