बिजली आपूर्ति: ज़ोर का झटका जो धीरे से लगे?

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निर्मल रानी भारतवर्ष में बिजली की शुरुआत का इतिहास वैसे तो 24 जुलाई 1879 में कोलकता से संबंधित बताया जाता है जबकि बिजली से होने वाले चमत्कारों अथवा उपयोगों का प्रदर्शन मुंबई में 1882 में हुआ। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भारत में बिजली का विस्तार कितनी गति से हुआ इसका अंदाज़ा केवल इसी बात से… Read more »

भारत में, मिशनरियों की खॊखली आक्रामकता का इतिहास

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डॉ. मधुसूदन सूचना: संदर्भ के लिए इसके पूर्व के प्रोटो इण्डो युरोपीयन भाषा पर लिखे आलेख का पठन आवश्यक है. (एक) हीन् ग्रंथि साहेबों का आक्रामक पैंतरा कभी आप बार बार ऊंची टांग रखनेवाले लोगों के मन में प्रवेश करें तो आपको हीन ग्रंथि के दर्शन होने की संभावना है. ऐसा आक्रामक पैतरा, हीन ग्रंथि… Read more »

निराशा का अंधेरा: आशा का उजाला  

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ललित गर्ग सफल एवं सार्थक जीवन जीने के लिये हमें ऐसी तैयारी करनी होगी जहां हमारा हर कर्म एवं सोच हमें नया आयाम दे, नया वेग दे और नया क्षितिज दे। यूं कहा जा सकता है कि जहां जीवन में बदलाव का ऐसा प्राणवान और जीवंत पल हमारे हाथ में होगा, जिससे हम एक दिव्य,… Read more »

न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥ वृद्ध जनों का योगदान भा. (१) 

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डॉ. मधुसूदन सूचना: इसआलेख को *वे न दुखडा गाएंगे, न तुम अनुमान कर पाओगे* आलेख के बाद पढें. सारांश: * कोई प्रेम से चाय पिलाता है, तो चाय से अधिक पिलानेवाले का प्रेम व्यक्त होता है. मनुष्य जितना प्रेम का भूखा है; उतना उस चाय का नहीं.* *इस प्रेम की अनुभूति ही सुख का रहस्य… Read more »

चक दे इंडिया की ओर ले जातीं यशोधरा राजे सिंधिया

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विवेक कुमार पाठक स्वतंत्र पत्रकार खिलाड़ियों की पौध खड़ा करने वाला मंत्री अगर खेलकूद का प्रशंसक हो तो खेल के लिए इससे बेहतर बात नहीं हो सकती है। मप्र में इस वक्त यह बात साकार होते दिख रही है। प्रदेश की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधराराजे सिंधिया खिलाड़ियों की तरह खेल भावना रखने वाली… Read more »

प्रोटो इण्डो युरोपीयन भाषा की कपोल कल्पना: डॉ. मधुसूदन

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डॉ. मधुसूदन प्रवेश: आज आक्रामक पैतरा ले रहा हूँ. जैसे बालक बिन्दू बिन्दू क्रमवार जोडकर चित्र बना देता है, कुछ उसी प्रकार मैं वास्तविक घटनाओं के पीछे की मानसिकता उजागर करने का प्रयास कर रहा हूँ. आज अंग्रेज़ी शासन के साथ साथ भारत आए मिशनरियॊ की मानसिकता में दृष्टिपात करते हैं. आलेख कुछ इतिहास का… Read more »

 अहम सवाल- जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों हैं

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गंगानन्द झा रचना (यहाँ टाइप या पेस्ट करें): एक किताब मिली। The Vital Question. Why life is the way it is. लेखक हैं Nick Lane । (अहम सवाल, जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों है। ) मैं जीव-विज्ञान का छात्र रहा हूँ।मैंने सीखा कि प्रोटोप्लाज्म जीवन का भौतिक आधार है। मैंने सीखा कि पदार्थ के एक विशेष… Read more »

सेवा कार्य ही ईश्वरीय कार्य : प्रो. संजय द्विवेदी

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सेवा भारती द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह आयोजित, 250 विद्यार्थियों को किया गया पुरुस्कृत प्रो. संजय द्विवेदी भोपाल, 29 जुलाई। सेवा कार्य ही ईश्वरीय कार्य है। जब हम समाज को शिक्षित, संस्कारित, स्वावलंबी और समरस बनाने के लिए सेवा कार्य करते हैं तो उसी आनंद की अनुभूति करते हैं,जो ईश्वर की आराधना में प्राप्त होता है। यह विचार माखनलाल… Read more »

लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना

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डॉ. मधुसूदन (एक) भाषाएँ क्यों बदलती हैं? संसार की सभी भाषाओं का व्याकरण धीरे धीरे बदलता रहा है. उनके उच्चारण भी बदलते रहते हैं. वर्णाक्षरों की संख्या भी बदलते रहती है. व्याकरण, वर्णाक्षर, और उच्चारण ऐसे तीन बदलाव आप संसार की सभी भाषाओं में देख पाएँगे. इस प्रक्रिया के निरीक्षण के कारण एक सूत्र ही… Read more »

लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना

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डॉ. मधुसूदन (एक) भाषाएँ क्यों बदलती हैं? संसार की सभी भाषाओं का व्याकरण धीरे धीरे बदलता रहा है. उनके उच्चारण भी बदलते रहते हैं. वर्णाक्षरों की संख्या भी बदलते रहती है. व्याकरण, वर्णाक्षर, और उच्चारण ऐसे तीन बदलाव आप संसार की सभी भाषाओं में देख पाएँगे. इस प्रक्रिया के निरीक्षण के कारण एक सूत्र ही… Read more »