समय के दो पाट: कहां ये और कहां वो

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समय के दो पाटों में से एक पाट पर हैं शास्‍त्रीय संगीत की पुरोधा गिरिजा देवी की प्रस्‍तुतियां और दूसरे पाट  पर हैं ढिंचक पूजा जैसी रैपर की अतुकबंदी वाली रैपर-शो’ज (जिसे प्रस्‍तुति नहीं कहा जा सकता)। समय बदला है, नई पीढ़ी हमारे सामने नए नए प्रयोग कर रही है, अच्‍छे भी और वाहियात भी,… Read more »

गोलमाल अगेन

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फिल्म ‘गोलमाल अगेन” की समीक्षा —   मेरी रेटिंग–3/5 डायरेकटर : रोहित शेट्टी संगीत : अमाल मलिक, डीजे चेतस, एस. थमान अवधि       :       2 घंटा  31 मिनट कलाकार : अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े, कुणाल खेमू, परिणीति चोपड़ा, तब्बू, संजय मिश्रा, जॉनी लीवर, प्रकाश राज, अश्वनी कालसेकर, मुरली… Read more »

कभी न बुझने वाली लौ हैं अमिताभ बच्चन…

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अमिताभ बच्चन हिन्दी फिल्मों के अभिनेता हैं। हिन्दी सिनेमा में चार दशकों से ज्यादा का वक्त बिता चुके अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त है। वे हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली अभिनेता माने जाते हैं। उन्हें लोग ‘सदी के महानायक’ के तौर पर भी जानते हैं… Read more »

“रागदेश” जिसे अनसुना कर दिया गया

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जावेद अनीस उग्र राष्ट्रवाद के इस कानफाडू दौर में राज्यसभा टेलीविजन ने “राग देश” फिल्म बनायी है जो पिछले 28 जुलाई को रिलीज हुई और जल्दी ही परदे से उतर भी गयी. वैसे तो यह एक इतिहास की फिल्म है लेकिन अपने विषयवस्तु और ट्रीटमेंट की वजह से यह मौजूदा समय को भी संबोधित करती… Read more »

 राष्ट्रीय खेल दिवस: खेलों में राजनीति का घालमेल

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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस पर 29 अगस्त को आयोजित किया जाने वाला राष्ट्रीय खेल दिवस हमें यह आत्मावलोकन करने का अवसर देता है कि खेलों को पाठ्यक्रम,कैरियर और इनसे भी बढ़कर जीवन का एक हिस्सा बनाने हेतु हमारे प्रयास किस हद तक गंभीर रहे हैं। गतिविधियों के नाम पर इस दिन राष्ट्रपति… Read more »

खेलों में देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन कर रही बेटियां

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(29 अगस्त 2017, खेल दिवस पर विशेष ) खेल कई नियम, कायदों द्वारा संचालित ऐसी गतिविधि है जो हमारे शरीर को फिट रखने में मदद करती है। आज इस भागदौड भरी जिन्दगी में अक्सर हम खेल के महत्व को दरकिनार कर देते हैं। आज के समय में जितना पढना-लिखना जरूरी है, उतना ही खेल-कूद भी… Read more »

हदों को तोड़ती “लिपस्टिक अंडर माई बुर्का”

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जावेद अनीस बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्में दर्शकों से अपना दिमाग सिनेमा हाल से बाहर छोड़ देने की मांग करती हैं लेकिन “लिपस्टिक अंडर माई बुर्का” साल भर में रिलीज हुई उन चुनिन्दा फिल्मों में से हैं जो आपसे मनोरंजन के साथ–साथ सोचने की भी मांग करती है. हमारे समाज में मर्द ही हैं जो जीवन… Read more »

स्पर्धा में खेल भावना हर हाल में बनी रहने दें

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भारत में क्रिकेट की दीवानगी का अंदाजा अनेक उदाहरणों को देखकर लगाया जा सकता है । इसी प्रकार के उदाहरणों में सामाजिक मीडिया में घूम रहे एक वीडियो ने पूरे भारत का ध्यान अपनी ओर खींचा जिसमें 18 जून को लंदन में में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गये चैम्पियन्स ट्राॅफी के फाईनल मुकाबले में भारत का पलडा हल्का होते देख एक मासूम बच्चे की आॅंखों से गिरते आॅंसू और उस पर उसकी माॅं द्वारा किस तरह उसका उलाहना-मिश्रित मजाक उडाया गया । ऐसा इसलिये कि भारत में क्रिकेट को एक पर्व की तरह मनाया जाता है । जनता इन मुकाबलों को देखने के लिये अपनी दिनचर्या के अनेक महत्वपूर्ण कामकाज का त्याग और बलिदान भी करती है । यदि मुकाबला चित-परिचित टीमों के साथ हो तो उसका रोमांच कई गुना बढ जाता है ।

सब कुछ अपने आप मिलता गया : असीमा भट्ट

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बिहार के छोटे से शहर नवादा की असीमा भट्ट ने अपनी हिम्मत और जुनून के दम पर रंगमंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। धारावाहिक ‘मोहे रंग दे’ और ‘बैरी पिया’ में उन्होंने सशक्त अभिनय कर दर्शकों की वाहवाही भी बटोरी। वह इन दिनों फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं भी निभा रही हैं… इन दिनों आप… Read more »

हमेशा अपने दमदार अभिनय से मां  के किरदार को जीवंत किया रीमा लागू ने (स्मृति-शेष)

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रीमा लागू का जन्म 1958 में हुआ था। रीमा के बचपन का नाम गुरिंदर भादभाड़े था। रीमा लागू जानीमानी मराठी एक्ट्रेस मंदाकनी भादभाड़े की बेटी हैं। रीमा लागू की अभिनय क्षमता का पता जब चला जब वह पुणे में हुजुरपागा एचएचसीपी हाई स्कूल में छात्रा थीं। हाई स्कूल पूरा करने के तुरंत बाद उनके अभिनय… Read more »