फेसबुक ने की निजी डाटा में सेंधमारी

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प्रमोद भार्गव करीब 5 करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं का डेटा चुराकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दुरुपयोग के खुलासे के बाद अमेरिकी राजनीति में उठा भूचाल भारत भी आ धमका है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस चोरी को गंभीरता से लेते हुए फेसबुक को चेतावनी दी है कि यदि गलत तरीके से भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया… Read more »

एक विलक्षण संपादकः जगदीश उपासने

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 माखनलाल विश्वविद्यालय के नए कुलपति का है हिंदी पत्रकारिता में खास योगदान -संजय द्विवेदी    मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल के कुलपति के रूप में जब ख्यातिनाम पत्रकार श्री जगदीश उपासने का चयन हो चुका है, तब यह जानना जरूरी… Read more »

नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

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अरुण तिवारी इण्डिया हैबिटेट सेंटर, लोदी रोड, नई दिल्ली में एक त्रिदिवसीय आयोजन (07-09 फरवरी, 2018) हुआ। इस त्रिदिवसीय ‘इवेलफेस्ट – 2018’ के दूसरे दिन के अंतिम सत्र की चर्चा का विषय था : प्रमाण आधारित नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका। आमंत्रण पाने पर मेरे मन में उठा सबसे पहला सवाल यही था कि… Read more »

जब संत व्यापारी हो जाए तो सवाल उठेंगे ही

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( पुण्य प्रसून बाजपेयी और बाबा रामदेव विवाद ) #योग गुरू बाबा रामदेव जी पर मेरी गहरी आस्था है इसलिए नही कि वे हिन्दु—संत हैं, गोयाकि देश—दुनिया में भारतीय योग और स्वदेशी का ब्राण्ड बन चुके हैं. बाजार पतंजलि के उत्पादों से इस कदर भर गया है कि हिंदुस्तान लिवर जैसी कंपनियों के छकके छूट… Read more »

मीडिया का बदलता रूप एवं प्रभाव

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हिन्दी शब्द ‘माध्यम’ से अंग्रेजी में ‘मीडियम’ और मीडिया बना। एक जगह की बात या घटना को दूसरी जगह पहुंचाने में जो व्यक्ति या उपकरण माध्यम बनता है, वही मीडिया है। सृष्टि के जन्मकाल से ही किसी न किसी रूप में मीडिया का अस्तित्व रहा है और आगे भी रहेगा। इस सृष्टि में नारद जी… Read more »

न्यूज वल्र्ड  के सोमालिया – यूथोपिया … !!

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तारकेश कुमार ओझा सच पूछा जाए तो देश – दुनिया को खबरों की खिड़की से झांक कर देखने की शुरूआत 80 के दशक में दूरदर्शन के जमाने से हुआ था। महज 20 मिनट के समाचार बुलेटिन में दुनिया समेट दी जाती थी। अंतर राष्ट्रीय खबरों में ईरान – इराक का जिक्र केवल युद्ध और बमबारी… Read more »

टीआरपी की ख़बरों का मिडिया’

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मनोज कुमार जब समाज की तरफ से आवाज आती है कि मीडिया से विश्वास कम हो रहा है या कि मीडिया अविश्वसनीय हो चली है तो सच मानिए ऐसा लगता कि किसी ने नश्चत चुभो दिया है. एक प्रतिबद्ध पत्रकार के नाते मीडिया की विश्वसनीयता पर ऐसे सवाल मुझ जैसे हजारों लोगों को परेशान करते… Read more »

 आधार की सुरक्षा और सदुपयोग हम सब का उत्तरदायित्व

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आधार से जुड़ी दो खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। एक खबर है कि आधार लिंकिंग के कारण देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में मौजूद 80 हजार फर्जी शिक्षकों का पता चला है। दूसरी खबर एक अंग्रेजी समाचार पत्र के हवाले से आई है जिसके अनुसार ऐसे हैकर्स मौजूद हैं जो नाम मात्र की रकम… Read more »

साहित्य प्रकाशन बनाम सोशल मीडिया का प्रभाव

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डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’   एक दौर था, जब साहित्य प्रकाशन के लिए रचनाकार प्रकाशकों के दर पर अपने सृजन के साथ जाते थे या फिर प्रकाशक प्रतिभाओं को ढूँढने के लिए हिन्दुस्तान की सड़के नापते थे, परंतु विगत एक दशक से भाषा की उन्नति और प्रतिभा की खोज का सरलीकरण सोशल मीडिया के माध्यम से… Read more »

सोशल मीडिया : जगत सा अराजक या अराजकता का जगत

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क्या सोशल मीडिया अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्वक निर्मित किसी ऐसे मानव रचित चक्रवात या भूकम्प की तरह है जिसके केंद्र का पता लगाना संभव नहीं है? पता नहीं क्यों सोशल मीडिया को देखकर एडम स्मिथ के प्राकृतिक न्याय पर आदर्श बाजारवादी अर्थव्यवस्था के मॉडल की याद आती है जो आत्मनियंत्रण के द्वारा संचालित होने का दावा करता… Read more »