साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता के एक सूर्य का अस्त होना 

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मनोज कुमार मन आज व्याकुल है। ऐसा लग रहा है कि एक बुर्जुग का साया मेरे सिर से उठ गया है। मेरे जीवन में दो लोग हैं। एक दादा बैरागी और एक मेरे घर से जिनका नाम इस वक्त नहीं लेना चाहूंगा। दोनों की विशेषता यह है कि उनसे मेरा संवाद नहीं होता है लेकिन… Read more »

जूते के प्रयोग की संभावनाएं

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यों तो जूता ऐसी चीज है, जिसके बिना काम नहीं चलता। चप्पल, सैंडल, खड़ाऊं आदि इसके ही बिरादर भाई और बहिन हैं। जूते के कई उपयोग हैं। घर के अंदर एक, बाहर दूसरा तो नहाने-धोने के लिए तीसरा। आजकल तो सब गडमगड हो गया है; पर 25-30 साल पहले तक क्या मजाल कोई बिना जूते-चप्पल… Read more »

‘फिर जुल्फ लहराए’

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‘फिर जुल्फ लहराए’ फिजा ठंडी हैं कुछ पल बाद ये माहौल गरमाए। कहीं चालाकियाँ ये इश्क में भारी न पड़ जाए। ज़रा सी गुफ्तगू कर लें, बड़े दिन बाद लौटे हो, नज़ाकत हुस्न वालों के ज़रा हालात फरमाए। अहा! क्या खूबसूरत आपने यह रंग पाया हैं, निशा का चाँद गर देखे तो खुद में ही… Read more »

कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं,

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कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं, नई कलियाँ मसलते हैं, कई किरदार ऐसे हैं। नहीं जलते वहाँ चूल्हे, यहाँ पकवान हैं ताजा, हमारी भी सियासत के नए हथियार ऐसे हैं। हकीकत जान पाए ना, वहम से ही शिला तोड़ी, यहाँ अच्छे भले से लोग कुछ बीमार ऐसे हैं। सिसक होगी ज़रा सी बस… Read more »

आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए

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कुलदीप विद्यार्थी आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए। बन्द सभी आशा वाले दरबार हुए। जिसको इज्ज़त बख्सी सिर का ताज कहा उनसे ही हम जिल्लत के हकदार हुए। मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारों में उलझे हम वो  शातिर  सत्ता   के  पहरेदार  हुए। जिस-जिसने बस्ती में आग लगाई थी देखा  है  वो  ही  अगली सरकार हुए। आसान … Read more »

आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ,

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कुलदीप विद्यार्थी 4.गज़ल आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ, मुल्क मेरा हो चला जैसे कि, अपराधी कुँआ, जाति के झगड़े कहीं तो हैं कहीं दंगे यहाँ, मुस्कुराते देश को जैसे लगी हो बददुआ, दूर से सब देखने वालों सभी से प्रार्थना, मौत के नजदीक है यह मुल्क सब कीजे दुआ, दंश जिसको… Read more »

संन्यासी लेखक

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  गंगानन्द झा वह शाम खास थी। राजशेखर अपने शिक्षक और गुरु रामकृष्ण महाराज के साथ हमारे घर पर आया था। वे रामकृष्ण मिशन के संन्यासी हैं और रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर में वे राजशेखर के प्रिंसिपल रह चुके थे। राजशेखर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एडवोकेट हैं.। पर अपने विद्यालय के महाराजजी से… Read more »

कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में 

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कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में इसलिए सब पार्टी कर रही है,नाटक इस चुनाव में बीजेपी हो या कांग्रेस, कर रही नाटक चुनाव में इसलिए हर वोटर कर रहा है,नाटक इस चुनाव में रंग मंच बना हुआ है, कर्नाटक,इस चुनाव मे सारे नेता नाटक के पात्र बने हुए है,चनाव में सी.एम.पद के लिए… Read more »

कर्नाटक का चुनाव जिता दो 

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वोटर भैया,अबकी बार कर्नाटक का चुनाव जिता दो अबकी बार,अपनी मैया बुला ली,उसकी लाज रखा दो मै तो धर्म निर्पेक्ष हूँ,मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा भी जाता मै तो कभी पंडित,कभी मौलवी कभी पादरी बन जाता कभी जनेऊ धारण करता ,कभी टोपी पहन कर आता कभी तिलक लगा कर,मंदिरों में पूजा करने भी जाता देखो ये कर्नाटक… Read more »

क्यों आते हैं तूफ़ान जिन्दगी में

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आये हो जब से तुम मेरी जिन्दगी में एक तूफ़ान आ गया मेरी जिन्दगी में लगता है ये मौसम बेईमान हो गया शायद ये दिल मेरा परेशान हो गया लगता है ये तूफ़ान आगे बढ़ने लगा मेरी रातो की नींद को ये चुराने लगा न दिन में है चैन,न रात को है चैन कयू करता… Read more »