विकसित भारत @2047 की नींव मजबूत करने में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की निर्णायक भूमिका
लखनऊ | 28 जनवरी 2026
विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णायक स्तंभ के रूप में उभर रही है। यह सशक्त संदेश बुधवार को लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उभरकर सामने आया।
यह सम्मेलन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई), भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में चौधरी चरण सिंह सभागार, सहकारिता भवन, लखनऊ में आयोजित किया गया। सम्मेलन का विषय था —“एकता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका: विकसित भारत @2047”।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि 2047 तक भारत को एक विकसित, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए सरकार, नियामक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और समुदाय के बीच बहु-हितधारक साझेदारी अत्यंत आवश्यक है। चर्चाएँ नीतिगत सुधारों, सर्वोत्तम शैक्षणिक प्रथाओं और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु ठोस कार्ययोजनाओं पर केंद्रित रहीं।
शिक्षा ही विकसित भारत की आधारशिला : दानिश आज़ाद अंसारी
इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, जनाब दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया ‘विकसित भारत’ का संकल्प दीर्घकालिक प्रयासों से ही पूरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 20 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यकों की है, जो एक बड़ी संभावनाशील शक्ति है। यदि इस समुदाय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो विकसित भारत के सपने को साकार किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विकसित भारत की मजबूत और सुंदर इमारत की नींव शिक्षा ही है, और इसमें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नीति और संस्थानों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है एनसीएमईआई : प्रो. नईमा खातून
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने कहा कि एनसीएमईआई केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। इससे नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिल रही है और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मजबूती प्राप्त हो रही है।
भारत की ताकत उसकी एकता में है : इंद्रेश कुमार
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक जनाब इंद्रेश कुमार ने कहा कि ईश्वर एक है, नाम अनेक हो सकते हैं। मजहब के नाम पर टकराव का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी एकता, शिक्षा, नैतिकता और मानवता में निहित है। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य एक ही है — एक जिम्मेदार, ईमानदार और सशक्त नागरिक बनकर भारत को मजबूत करना।
अल्पसंख्यक संस्थान बन सकते हैं सामाजिक समरसता के रोल मॉडल : शाहिद अख्तर
एनसीएमईआई के कार्यकारी अध्यक्ष जनाब शाहिद अख्तर साहिब ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान ‘विकसित भारत’ मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच समन्वय से नफरत को समाप्त कर एकता को मजबूत किया जा सकता है, और इस दिशा में शैक्षणिक संस्थान रोल मॉडल बन सकते हैं।
विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है : अंकित अग्रवाल, आईएएस
आईएएस अधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारत की विविधता कोई कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। शिक्षा सामाजिक गतिशीलता बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करती है।
कार्यक्रम का सफल संचालन जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार कर्नल ताहिर मुस्तफा द्वारा किया गया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को विकसित भारत @2047 की सामूहिक यात्रा के सक्रिय और अभिन्न सहभागी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ।