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पटना उच्च न्यायालय के हिदीतर भाषी मुख्य न्यायाधीश ने हिंदी में की हिंदी के पक्ष की बात।

दिनांक २/२/2026 को एडवोकेटस एसोसिएशन पटना उच्च न्यायालय के तत्वाधान में माननीय उच्च न्यायालय पटना के माननीय मुख्य न्यायमूर्ति  श्री संगम कुमार साहू का स्वागत समारोह का आयोजन पटना उच्च न्यायालय के प्रांगण में ही हुआ ,जिसमें पटना उच्च न्यायालय  में  पदस्थापित सभी न्यायमूर्ति सहित पटना उच्च न्यायालय के तीनों अधिवक्ता संघ (1) एडवोकेटस एसोसिएशन (2)लॉयर्स एसोसिएशन एवं (3) बैरिस्टर एसोसिएशन के सभी सदस्य आमंत्रित थे। परंपरागत ढंग से हिंदीभाषी अधिवक्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी में हो रहा था। बिहार की जनभाषा, राजभाषा और अधिवक्ताओं की स्वभाषा में कार्यक्रम के संचालन में शायद लोगों को आत्मसम्मान अनुभव नहीं होता। ऐसे में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू से हिंदी में उद्बोधन की अपेक्षा कैसे की जा सकती थी, जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं, जो हिंदी जानते नहींं, हिंदी में काम किया नहीं। लेकिन इसके ठीक प्रतिकूल सभी न्यायाधीशों एवं अधिकांश अधिवक्ताओं की उपस्थिति में माननीय मुख्य न्यायाधीश 

श्री संगम कुमार साहू जी ने जनभावनाओँ और राज्य की भाषा को सम्मान देते हुए अपना उद्बोधन भारत संघ की राजभाषा हिंदी में दिया, जिससे लोगों को आजादी के आनंद की अनुभूति हुई।


    उन्होंने अपने उद्बोधन में बहुत सारी बातों के अतिरिक्त यह भी बोलना उचित समझा कि- “जब मैं पटना उच्च न्यायालय आया, तब हमारे कुछ न्यायाधीश मित्र हमसे बोले कि यहां कुछ ऐसे भी अधिवक्ता हैं ,जो सिर्फ हिंदी में आवेदन दाखिल करते हैं और हिंदी में ही बहस करते हैं !यदि आप हिंदी ठीक से नहीं समझ पाते हैं, तब आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए मैंने हिंदी सीखने एवं बोलने की कोशिश की और एक महीने के भीतर ही  हिंदी सीख ली। अभी तक मुझे किसी हिंदी आवेदन को या हिंदी अनुलग्नक को समझने में कोई परेशानी नहीं हुई है। यदि मैं हिंदी का कोई शब्द ठीक से नहीं समझ पाता हूं, तब मैं  अपने न्यायाधीश मित्र के सहयोग से उसे शब्द को समझने की कोशिश करता हूं और उसे भी समझ लेता हूं।”


        उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी कहा की संविधान के दायरे में रहकर, अधिवक्ता को संघर्ष करना चाहिए, लेकिन संघर्ष का उद्देश्य संविधान और सत्य की जीत को सुनिश्चित करवाना होना चाहिए। अधिवक्ता को कभी भी न्यायालय में झूठा सबमिशन नहीं करना चाहिए। यदि कोई अधिवक्ता न्यायालय में झूठा सबमिशन करता है, तो उसकी जानकारी किसी न किसी रूप में न्यायाधीश को हो ही जाती है और जैसे ही किसी न्यायाधीश को मालूम होता है कि मेरे न्यायालय में फलां अधिवक्ता झूठा सबमिशन किया था, वैसे ही उनकी दृष्टि में उस अधिवक्ता का सम्मान घट जाता है। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से अनुरोध किया कि जब आप  न्यायालय में वकालत करने आते हैं, तो आपको  अनर्गल चर्चाएं नहीं करनी चाहिए ! यदि आप अदालत में अनर्गल चर्चा करते हैं तो आपकी वह बातें भी किसी न किसी रूप में न्यायाधीश तक पहुंचती है।

      निश्चय ही पटना उच्च न्यायालय के मा. मुख्य न्यायाधीश ने न्याय की अपेक्षा में आनेवाले लोगों की आशाओं को और उनकी भाषा को सम्मान दे कर न्याय के मूल आधार और हिंदी में याचिका लगाने वाले और बहस करने वाले अधिवक्ताओं को सम्मानित किया है। उन्होंने देशवासियों के मन में जनभाषा में न्याय की आशा जगाई है।

(इंद्रदेव प्रसाद )           

                            अधिवक्ता ,पटना उच्च न्यायालय,
                            सदस्य -एडवोकेटस एसोसिएशन   
                            चलभाष:-938644 2093