21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर पीजीडीएवी (सांध्य) महाविद्यालय मी अंतर महाविद्यालय मातृभाषा कविता प्रतियोगिता का अनूठा आयोजन किया गया। इस कविता प्रतियोगिता में विभिन्न महाविद्यालयों से उपस्थित सहभागियों ने पहले अपनी कविताएं सुनाई और बाद में उसका हिंदी अथवा अंग्रेजी में अनुवाद भी प्रस्तुत किया।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह देखने में आए की प्रतिभागियों में उत्तर पूर्व के प्रतिभागियों की अच्छी खासी संख्या रही। इस प्रतियोगिता में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम सभी राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लिया और यह सिद्ध किया कि देश के सभी भाषा- भाषी, भले ही प्रचलित व्यवस्था के कारण अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहे हों, लेकिन इन सभी को अपनी मातृभाषा से बहुत लगाव है।
राजभाषा विभाग के पूर्व क्षेत्रीय उपनिदेशक, मुख्य अतिथि डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ ने अपने वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा कितनी भी वैज्ञानिक या अवैज्ञानिक क्यों न हो, मातृभाषा से बढ़कर दुनिया में कोई भाषा नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सभी भाषाएं विश्व की श्रेष्ठतम भाषाएं हैं क्योंकि इनका मूल स्रोत विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा संस्कृत है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने मोबाइल में भले ही हुए अंग्रेजी की रोमन लिपि भी रखें लेकिन इसके साथ उन्हें अपनी मातृभाषा या देश की भाषा हिंदी की लिपि को भी रखना चाहिए और जहां तक संभव हो वे सोशल मीडिया पर संवाद के लिए भारतीय भाषाओं का प्रयोग करें।
इस प्रकार की अनूठी प्रतियोगिता के आयोजन का विचार महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रविंद्र गुप्ता का था। अपने देश की भाषा और संस्कृति के लिए प्रो. गुप्ता अनूठी पहल करते रहे हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. गुप्ता ने प्रतियोगी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया।
प्रतियोगिता में उत्तर पूर्व की ( मणिपुर ) की मूल निवासी और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापक श्रीमती अचिन्ल्यू कामिनी तथा श्रीमती कामिनी रावत ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम का आयोजन उत्तर पूर्व की असमिया-भाषी प्राध्यापक सुश्री पल्लवी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अतिरिक्त विभिन्न संकायों के प्राध्यापक भी उपस्थित रहे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय ( सांध्य ) में मातृभाषा दिवस पर अंतरमहाविद्यालय मातृभाषा कविता प्रतियोगिता।