सम्मानित नारी का सम्मान करने से पहले हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने घर में सबसे पहले अपनी मां का आदर और सम्मान करे :- मनोज अलीगढ़ी
अलीगढ़। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च 2026) के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय परिसर के सभागार में स्वतंत्र जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी के तत्वावधान में “नारी शक्ति वंदन-अभिनंदन सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी, चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 72 महिलाओं को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती राममूर्ति देवी ने की। उन्होंने कहा कि जब भी कोई रोगी पीड़ा या दुर्घटना से व्यथित होकर अस्पताल परिसर में आता है, तो यहां की महिला स्टाफ केवल दवाओं से ही नहीं, बल्कि मां-बहन के स्नेह और ममता से उसका उपचार करती हैं। उनके सेवा भाव, समर्पण और प्रेम का ही परिणाम है कि कई रोगी मुस्कुराते हुए स्वस्थ होकर अपने घर लौटते हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के इसी समर्पण को सम्मानित करने और प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आरएएफ-104 से दर्शना कुमारी ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महिलाएं समुद्र की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। जल, थल और वायु सेना सहित सुरक्षा बलों में वर्दी पहनकर महिलाएं देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा, इंजीनियरिंग, समाजसेवा और विभिन्न पेशों में भी महिलाएं अपनी योग्यता से नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार सुविधा पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखा गया है। घर की पहली पाठशाला मां ही होती है और सभी धर्मों में यह बताया गया है कि मां के चरणों में ही चारों धाम का वास होता है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई महान महिलाओं ने अपने संघर्ष और त्याग से समाज को नई दिशा दी है।
मालती अंबेडकर रामपुर ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब महिलाओं को बराबरी का अधिकार और शिक्षा का अवसर नहीं मिलता था, लेकिन संघर्ष और बलिदानों के परिणामस्वरूप आज महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। चाहे अंतरिक्ष हो, पर्वतारोहण हो, समुद्री सुरक्षा हो, सरहदों की रक्षा हो या अंतरराष्ट्रीय खेल मैदान—महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
डॉ. महेंद्र माथुर (सीएमएस, पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय) इतिहास और वर्तमान की कई प्रेरणादायक महिला हस्तियों का उल्लेख किया गया, जिनमें सावित्रीबाई फुले, महारानी लक्ष्मीबाई, महादेवी वर्मा, कल्पना चावला, पी.टी. उषा, मैरी कॉम, इंदिरा गांधी, मीरा कुमार और किरण बेदी जैसी महान महिलाओं के योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम आयोजक मनोज अलीगढ़ी ने कहा कि किसी भी सम्मानित नारी का सम्मान करने से पहले हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने घर में सबसे पहले अपनी मां का आदर और सम्मान करे। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के योगदान को पहचानना और उन्हें सम्मानित करना समाज के लिए प्रेरणादायक है।
समारोह में समाजसेवी मालती अंबेडकर (रामपुर), महिला विशेषज्ञ डॉ. निशी, वर्षा रावत, डॉ. महेंद्र माथुर (सीएमएस, पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिन महिलाओं को सम्मानित किया गया, उनमें प्रमुख रूप से डॉ. निशी, डॉ. श्वेता, डॉ. रिद्धि, सुविधा पांडे, वर्षा रावत, नीरू शर्मा, रोजमेरी, अनामिका सहाय, शबनम, दर्शना कुमारी, रीना महलवार, सविता कुमारी, राधा रानी वर्मा, रुबीना सिंह, भगवान देवी, स्नेहलता, लीना सिगलर, आरिफा बेगम, रेखा लाल, जैस्मिन डेविड, प्रेमलता सिंह, पूजा रानी, रचना, संगीता, बिंदु, रेनू शर्मा, चित्रा रानी, पूजा चौहान, गिरीबाला, मंजू गुप्ता, ममता, बबीता, सुमन, कोमल पुंडीर, विनीता रानी, शीला देवी, सुमन चौधरी, नाजिया, अंजलि सहित अनेक महिलाएं शामिल रहीं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में तानसेन संगीत महाविद्यालय की निदेशक परवेज शेख एवं उनकी टीम—सोम प्रकाश शर्मा, अजीत बागड़ी, शिव कुमार, चेतन रावत, विवेक कुमार और रंजन राणा—ने विशेष सहयोग प्रदान किया।