अबतक बेटियों को वह हक नहीं मिला जिसकी वह हकदार हैंः राष्ट्रपति

नई दिल्लीः दुर्भाग्य से बेटियों को वह हक नहीं मिल रहा जिसकी वह हकदार हैं। बेटियों से जुड़े कार्यक्रमों को अौर अागे बढ़ाने की जरूरत है जैसे सुकन्या योजना, बेटी बढ़ाअो-बेटी बचाअो। यह बात शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फॉगसी की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एक दिनी दौरे पर शनिवार सुबह 9:15 बजे कानपुर पहुंचे। चकेरी एयरपोर्ट पर राज्यपाल राम नाईक के साथ कैबिनेट मंत्री सतीश महाना तथा महापौर प्रमिला पांडेय ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति शहर के तीन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। चकेरी एटरपोर्ट से सेना के हेलीकॉप्टर से चंद्रशेख अाजाद कृषि विश्वविद्यालय (सीएसए) पहुंचे अौर वहां से सड़क मार्ग से गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज आए। यहां उन्होंने फेडरेशन ऑफ ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी ऑफ इंडिया (फॉगसी) की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इसके बाद राष्ट्रपति सीएसए में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे अौर फिर सीएसए के ही हेलीपैड से हेलीकॉप्टर द्वारा दोपहर में नर्वल जाएंगे। जहां वह झंडा गीत के रचयिता श्याम लाल गुप्त पार्षद की मूर्ति का अनावरण और प्रवेश द्वार का लोकार्पण करेंगे।

बेटियों पर बेटों की अपेक्षा बंदिशें ज्यादा
मेडिकल कॉलेज में फॉगसी की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हए राष्ट्रपति ने कहा कि बेटियों पर बेटों की अपेक्षा बंदिशें ज्यादा होती हैं इसके बावजूद वह समाज में नित नए अायाम रच रहीं हैं। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों से अाह्वान किया कि महिलाएं स्वस्थ्य रहेंगी तभी परिवार, समाज अौर राष्ट्र का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इसलिए महिलाअों अौर वंचित वर्ग को स्वास्थ्य शिक्षा अौर सहूलियतें पहुंचाना अापके कंघों पर है। राष्ट्रपति ने कहा कि 2013 की अपेक्षा मैटरनल मोटेलिटी रेट में 2016 में काफी कमी अा रही है, लेकिन अभी इसमें सुधार की जरूरत है। महिलाअों से जुड़े हर मुद्दे पर प्रभावी प्लानिंग की जरूरत है।

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