कांग्रेस ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को ध्यान में रखते हुए लड़ेगी चुनाव

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ‘सोशल इंजीनियरिंग’ करेगी। पार्टी जातीय समीकरणों के साथ उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनावी सभाओं को भी सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखते हुए तय किया जा रहा है, ताकि बसपा के असर को कम किया जा सके।

तीनों राज्यों में कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में हैं। पार्टी ने बसपा और कुछ छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन की कोशिश की थी, पर वह नाकाम रही। बसपा मध्य प्रदेश और राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ रही है। जबकि छत्तीसगढ़ में बसपा ने अजीत जोगी की पार्टी से समझौता किया है। ऐसे में इन राज्यों में कांग्रेस बसपा के असर को कम करने की रणनीति पर अमल कर रही है।

राहुल गांधी अगले सप्ताह मध्य प्रदेश (मालवा) का दौरा कर सकते हैं। मालवा भाजपा का गढ़ माना जाता है। मालवा क्षेत्र में आने वाली 66 में 57 सीट भाजपा के पास हैं और 9 कांग्रेस के पास हैं। मालवा में आने वाली 22 सुरक्षित (एससी) में 16 सीट पर भाजपा का कब्जा है। जबकि सुरक्षित (एसटी) की सभी नौ सीट पर भाजपा जीती थी। ऐसे में पार्टी मालवा में सवर्णो और दलितों को साधने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

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