केंद्र का बयान : ‘कारगिल में राफेल होता तो कम सैनिक हताहत होते’

नई दिल्लीः केंद्र ने राफेल की खरीद को सही ठहराते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 1999 में कारगिल की लड़ाई में यदि राफेल लड़ाकू जेट विमानों का इस्तेमाल किया गया होता तो हताहतों की संख्या कम होती।

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि यदि उस लड़ाई में राफेल का इस्तेमाल किया गया होता तो वह 60 किलोमीटर दूर से ही पहाड़ी की चोटियों को निशाना बनाता। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि श्रीमान अटार्नी कारगिल 1999-2000 में हुआ था। राफेल 2014 में आया। इस पर वेणुगोपाल ने हंसते हुए कहा कि उनका मतलब काल्पनिक स्थिति से था, यानी यदि राफेल कारगिल युद्ध के दौरान होता।

वायुसेना ने कोर्ट में कहा-राफेल चाहिए

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राफेल सौदे की जांच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान वायुसेना ने भी अपना पक्ष रखा। वायुसेना अधिकारियों ने कोर्ट में कहा कि भारत को राफेल जैसे पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक विमान की दरकार है, जो दुश्मन के रडार और निगरानी उपकरणों को चकमा दे सकें।

दरअसल, सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह राफेल सौदे को लेकर विवाद पर वायुसेना के अधिकारियों से बात करना चाहते हैं। इस पर वायुसेना के शीर्ष अधिकारी एयर वाइस मार्शल जे चेलापति, एयर मार्शल अनिल खोसला और एयर मार्शल वी आर चौधरी बहुत कम समय के बुलावे पर अदालत पहुंचे। कोर्ट ने एक एयर मार्शल चेलापति से विमानों के घरेलू उत्पादन के बारे में पूछा। चेलापति ने बताया कि सबसे ताजा विमान सुखोई 30 लिए गए थे और उससे पहले 1985 में तीसरी पीढ़ी के मिराज थे। इसके बाद कोई विमान वायुसेना के बेड़े में नहीं जोड़ा गया। इस पर किसी ने सुखोई के शामिल होने की जानकारी दी। चेलापति ने कहा कि भारत को पांचवी पीढ़ी के विमान चाहिए, जिसमें रडार को चकमा देने वाली स्टील्थ तकनीक से लैस हों और इसी को देखते हुए ही राफेल विमानों को चुना गया था।

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