दिल्ली के स्वयंभू बाबा पर एक प्राइवेट स्कूल की 24 वर्षीय शिक्षिका से बलात्कार का आरोप, दो महिलाओं समेत गिरफ्तार

नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस ने बताया कि खुद को भगवान का रूप बताने वाले बाबा हरि नारायण को उत्तराखंड के हल्द्वानी से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी बाबा ‘आद्या परम योग पीठ’ नाम का अध्यात्मिक सेंटर चलाता था।

दिल्ली पुलिस की टीम ने एक प्राइवेट स्कूल की 24 वर्षीय शिक्षिका की शिकायत मिलने के बाद आरोपी बाबा को उसकी महिला सहायक समेत रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि आरोपी बाबा ने दिल्ली के जनकपुरी स्थिति अाध्यात्मिक सेंटर में जुलाई में उससे बलात्कार किया था। शिक्षिका का बलात्कार करने से पहले उसे नशीला पदार्थ मिला खाना खिलाया गया।

डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने बताया कि इस वारदात में बाबा की महिला सहायक ने साथ दिया और पीड़िता को गलत तरीके से टच किया था। पुलिस ने पीड़िता टीचर की सहेली को भी गिरफ्तार किया है। आरोूप है कि शिक्षिका की दोस्त ने ही उसे बाबा के आश्रम पहुंचाया था।

शिक्षिका उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसने अपनी निजी समस्याएं अपनी एक सहेली को बताईं, तो उसकी सहेली ने आरोपी बाबा हरि नारायण के पास जाने के लिए कहा। सहेली ने दावा कि किया बाबा ने अपने चमत्कार से उसकी समस्याएं दूर कर दी हैं।
इसके बाद शिक्षिका की सहेली उसे लेकर 10 जुलाई को बाबा के आश्रम गई। इतना ही नहीं आश्रम जाने से कुछ दिन पहले उसने सहली को बताया कि वह सिर्फ फल ही खाए, जिससे कि बॉडी डिटॉक्सीफाई हो जाए। इसके बाद आश्रम जाकर दोनों ने 38 साल की साक्षी नाम की महिला को खुश करना शुरू कर दिया, जोकि नारायण की सचिव के तौर पर काम करती है। साक्षी ने बाबा के पास भेजने के पहले शिक्षिका से घंटों बात की और उसके हर एक राज की पड़ताल कर ली।

घर लौटना चाहती थी पर बरगलाया

बातचीत के बाद शिक्षिका बाबा से बिना मिले ही वापस अपने घर लौटना चाहती थी, लेकिन उसकी सहेली और साक्षी ने समझाया कि वह आज रात आश्रम में ही रुके। इसके बाद रात में 8 बजे से ध्यान की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें उसे कहा गया कि पहले वह स्नान करे। इसके बाद उसे रात का खाना दिया गया, जिसमें नशीला पदार्थ मिला था।

खाना खाने के बाद शिक्षिका अपनी सुध बुध भूलने लगी। तभी आरोपी बाबा ने उसकी सहेली और अपनीस सहायक के सामने उसका बलात्कार किया। घटना के बाद शिक्षिका इतनी बुरी तरह से सहम गई थी। एक हफ्ते बाद उसने हिम्मत जुटाई और इस बारे में दिल्ली पुलिस को एक ई-मेल लिखा। इसके जवाब में पुलिस ने मदद का भरोसा दिया और घटना की एफआईआर दर्ज कराने को कहा। तब जाकर मामला सामने आया।

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