पुराने जर्जर सरकारी बस अड्डों की जगह बनेंगे अब ‘बस पोर्ट’

नयी दिल्लीः राज्यों में दशकों पुराने जर्जर बस अड्डे अब बीते जमाने की बात होने जा रही है। उनके स्थान पर यात्री सुविधाओं से लैस अत्याधुनिक ‘बस पोर्ट’ बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि ‘बस पोर्ट’ से निजी बसों का भी संचालन किया जाएगा। बस पोर्ट में साफ टॉयलेट, वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर, रेस्तरां, बसों, कारों व मोटर साइकिल के लिए पृथक कार पार्किंग की सुविधाएं होंगी।

केंद्र सरकार ने बस पोर्ट संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। वर्तमान व्यवस्था में निजी बसें सड़क पर सवारियां भरती हैं। अब निजी बसों को भी इन सरकारी अड्डों में जगह मिलेगी। सरकार की सार्वजनिक परिवहन सेवा को बढ़ावा देने के प्रयासों से शहरों से जाम, वायु प्रदूषण कम होगा, बेहतर संपर्क बनेंगे और लोग किफायती सफर कर सकेंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 7 सिंतबर को नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए राज्यों से मॉर्डन बस पोर्ट बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं।

यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों अक्तूबर से अपने प्रस्ताव भेजने शुरू कर देंगे। मंत्रलाय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्यों के प्रस्ताव की स्क्रूटनी की जाएगी। चयनित स्थलों की प्री-फिजबिलटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा। इसमें पता चलेगा कि बताए गए स्थान पर बस पोर्ट बनना संभव है अथवा नहीं। यह तय होगा कि बस पोर्ट पीपीपी मॉडल अथवा सरकारी पैसे से बनाए जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक राज्य में एक मॉडल बस पोर्ट बनाया जाएगा। इसके मॉडल आधार पर राज्य के अन्य शहरों में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ग्रीन फील्ड मौजूदा बस अड्डों के स्थान पर बस बनेंगे।

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