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भारतीय बैंकों की सबसे बड़ी समस्या है एनपीए नॉन परफोर्मिंग एसेट यानि कर्ज दिया हुआ वह पैसा जो बैंकों के पास वापस नहीं आता। केन्द्र सरकार इस मुद्दें से निपटने के लिए जल्द ही एक ठोस नीति लागू करने की तैयारी में है।
केन्द्र बैंकों के फंसे हुए कर्ज की बढ़ती रकम को लेकर चिंतित है और इस बारे में लगातार कदम उठा रहा है । वित्त मंत्रालय इससे निपटने के लिए के लिए ठोस नीति अमल में लाने को भी तैयार है । जानकारों का कहना है कि.केंद्र के कदमों से आने वाले दिनों में एनपीए की समस्या दूर हो सकती है ।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार बैंकों के फंसे हुए बड़े कर्जो की समस्या यानी गैर निष्पादित आस्तियों एनपीए से निपटने के उपायों की जल्द ही घोषणा करेगी, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि बैंकों के वसूल नहीं होने वाले कर्ज में बढ़ोतरी की दर में मार्च तिमाही में गिरावट का रुख रहा और इस्पात क्षेत्र में सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि फंसे हुए कर्ज में ज्यादातर बड़ी रकम के कर्ज हैं और इस कर्ज को नहीं चुकाने वालों में करीब 30, 40 या ज्यादा से ज्यादा 50 कंपनियां शामिल हैं।

वित्त मंत्री के मुताबिक एनपीए की मुख्य समस्या बहुत बड़ी कंपनियों के साथ है जो कि मुख्य रूप से इस्पात, बिजली, बुनियादी ढांचा और कपडा क्षेत्र की हैं हालांकि इनकी संख्या ज्यादा नही है। दरअसल इस महीने की शुरुआत में जेटली ने एनपीए के मुद्दे पर आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी । इस बैठक में ‘बैड बैंक’ पर भी चर्चा की गई।

गौरतलब है कि सार्वजनिक बैंकों का एनपीए मार्च 2016 के आखिर में 5.02 लाख करोड़ रुपये था जो दिसंबर 2016 के आखिर में बढ़कर 6.06 लाख करोड़ रुपये हो गया ।

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