सबरीमामा मंदिर: महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ याचिका पर फौरन सुनावई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्लीः सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। बुधवार को वकील की तरफ से इस मामले पर फौरन सुनवाई की मांग को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।

इससे पहले, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल में स्थित सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर रोक लगाने से मंगलवार को भी इनकार कर दिया। परंतु, वह इस पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर खुले न्यायालय में 22 जनवरी को सुनवाई के लिये तैयार हो गया।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने चैंबर में इन पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर किया और सारे मामले में न्यायालय में सुनवाई करने का निश्चय किया। भाषा के अनुसार, चैंबर में होने वाली कार्यवाही में वकील उपस्थित नहीं रहते हैं। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल थे।

मंगलवार को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था- ”सभी पुनर्विचार याचिकाओं पर सभी लंबित आवेदनों के साथ 22 जनवरी, 2019 को उचित पीठ के समक्ष सुनवाई होगी। हम स्पष्ट करते है कि इस न्यायालय के 28 सितंबर, 2018 के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लैंगिक भेदभाव करार देते हुये अपने फैसले में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।

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