Posted On by &filed under अपराध, मीडिया.


pratyusha
टीवी कलाकार प्रत्यूषा बनर्जी द्वारा आत्महत्या प्रकरण की कहानी महाकवि कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ से अन्तरंग होते हुए भी काफी भिन्न प्रतीत होती है। इण्टरमीडिएट के संस्कृत विषय में ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का चतुर्थांक है जबकि अधिकांश विश्वविद्यालयों के स्नातक के संस्कृत पाठ्यक्रम में ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ है। 30 वर्ष के अध्यापन काल में मैं सदैव ये सवाल करता रहा – ‘‘आखिर इस नाटक के माध्यम से महाकवि कालिदास समाज को क्या संदेश देने चाहते हैं?’’ दरअसल में ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ मात्र प्रेम-गाथा ही नहीं बल्कि परिस्थिति से मुकाबला करने और अपने चरित्र की रक्षा करते हुए स्वधर्म पालन के लिए प्रेरित करता है। नाटक के 4 अंकों का कथानक शकुन्तला (प्रत्यूषा)-दृष्यन्त (राहुल) प्रणयगाथा और गर्भधारण करने तक काफी मेल खाता है। जब गर्भवती शकुन्तला आश्रम से विदा होकर हस्तिनापुर पहुचती है, तो दुष्यन्त उसे स्वीकार करने की बजाय दुत्कार कर भगा देते हैं, भले वहां महर्षि दुर्वासा का शाप निमित्त मात्र था। प्रत्यूषा-राहुल का लिव इन रिलेशन शकुन्तला- दुष्यन्त के गन्धर्व-विवाह के समतुल्य ही है। ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ के पंचम अंक में दुष्यन्त की दुत्कार और प्रत्यूषा-राहुल में विवाह की औपचारिकता में गतिरोध अथवा किसी तीसरी के दखल सहित कुछ भी (चूंकि जांच के बाद यथार्थ सामने आयेगा) रहा हो काफी मिलता जुलता है। शकुन्तलाने प्रत्यूषा की तरह आत्महत्या जैसा महापाप नहीं किया, बल्कि धैर्य और संयम का परिचय देते हुए ने महर्षि कण्व के आश्रम (मायके) लौटी, बल्कि ऋषि मरीचि के आश्रम में रहकर चरित्र की रक्षा करते हुए पुत्र का जन्म दिया, स्वधर्म पालन करते हुए शिशु भरत को पराक्रमी सम्राट बनाया, जो हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी हुआ। ‘‘पानी वाली भामिनियों ने ऐसे पूत जने हैं, जबड़े खोल जिन्होंने नाहर के भी दांत गिने हैं।’’
‘‘काव्येषु नाटकं रम्यं तत्र रम्या शकुन्तला’’ माहाकवि कालिदास ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ के माध्यम से ‘प्रेम-विवाह’ के हस्र को प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि क्षणिक लिव इन रिलेशन जीवन में तूफान ला सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण संदेश परिस्थिति का मुकावला करते हुए धैर्य और संयम का परिचय देना चाहिए शकुन्तला ने आत्महत्या नहीं की जबकि अब आत्महत्या जैसे महापाप को सहज उपचार माना जाता है। निश्चित रूप से नई पीढी को ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ की सीख को समझना होगा। – देवेश शास्त्री, इटावा

Leave a Reply

1 Comment on "‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ की सीख को समझे नई पीढ़ी"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
himwant
Guest
himwant

वाह क्या बात है. सही कहा.

wpDiscuz